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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - ज़िन्दगी के किसी दौर में जब तुम खुद को अकेले पाओ, तो खुद को चाँद समझ लेना जो अकेले ही स्याह रातों को उजियारीत करता है.... जब मंज़िल दूर लगे और पग पग पर भी ठोकर लगे, तो खुद को दीवार पर चढ़ती नन्ही चींटी समझ लेना जो सौ बार फिसलती है पर हिम्मत नही खोती है॰ जब राहों में कॉँटे ही काँटे हो और मुश्किलों के पत्थर राह रोकें हो, तो खुद को वो शिल्पकार समझ लेना जो पत्थर को तराशकर ईश्वर बना दे.... जब हो रहा हो मन हताश विश्वास में न रहे कोई आस, 3R तब खुद को बच्चा समझ लेना और हर मन को सच्चा समझ लेना.... ज़िन्दगी के किसी दौर में जब तुम खुद को अकेले पाओ, तो खुद को चाँद समझ लेना जो अकेले ही स्याह रातों को उजियारीत करता है.... जब मंज़िल दूर लगे और पग पग पर भी ठोकर लगे, तो खुद को दीवार पर चढ़ती नन्ही चींटी समझ लेना जो सौ बार फिसलती है पर हिम्मत नही खोती है॰ जब राहों में कॉँटे ही काँटे हो और मुश्किलों के पत्थर राह रोकें हो, तो खुद को वो शिल्पकार समझ लेना जो पत्थर को तराशकर ईश्वर बना दे.... जब हो रहा हो मन हताश विश्वास में न रहे कोई आस, 3R तब खुद को बच्चा समझ लेना और हर मन को सच्चा समझ लेना.... - ShareChat