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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - दोसु नही काहू कउ भीता।माइओ मोह बंधु प्रभि कीतादरंद निवारहि जा के आ पैानानक ते ते गुरमुखि ध्रापे। अर्थः मनुष्य अक्सर अपनी परेशानियों के लिए मै तेरा दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं। जीवन के आये दुखों के लिए को दोष देना व्यर्थ है। वास्तव में, यह माया का किसी दूसरे भिखारी मोह और सांसारिक बंधन स्वयं प्रभु ने ही पैदा किया है। परमात्मा स्वयं ही मिले हुए का निवारण करता है। अपनी दुखों  जिओ स्थिति के लिए कभी भी दूसरों को दोष न दें क्योंकि सब कुछ प्रभु की आज्ञा और माया के खेल के अधीन है। माया और मोह के बंधन भी उसी ने पहाडा बनाए हैं ताकि जीव खेल को समझ सके। हे नानक! गुरु के बताए मार्ग पर चलने वाले पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं। शांति वाले और दुखों का अंत केवल प्रभु की कृपा से मिलता है। जो गुरु की शरण में रहते हैं, वे ही मोहमाया की भूख से मुक्त होकर Iq[ होते हैं।इसलिये किसी को बुरा कहने या दोष देने के संतुष्ट बजाय प्रभु की रज़ा को स्वीकार करना ही सुखी होने का जी एकमात्र मार्ग है। दोसु नही काहू कउ भीता।माइओ मोह बंधु प्रभि कीतादरंद निवारहि जा के आ पैानानक ते ते गुरमुखि ध्रापे। अर्थः मनुष्य अक्सर अपनी परेशानियों के लिए मै तेरा दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं। जीवन के आये दुखों के लिए को दोष देना व्यर्थ है। वास्तव में, यह माया का किसी दूसरे भिखारी मोह और सांसारिक बंधन स्वयं प्रभु ने ही पैदा किया है। परमात्मा स्वयं ही मिले हुए का निवारण करता है। अपनी दुखों  जिओ स्थिति के लिए कभी भी दूसरों को दोष न दें क्योंकि सब कुछ प्रभु की आज्ञा और माया के खेल के अधीन है। माया और मोह के बंधन भी उसी ने पहाडा बनाए हैं ताकि जीव खेल को समझ सके। हे नानक! गुरु के बताए मार्ग पर चलने वाले पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं। शांति वाले और दुखों का अंत केवल प्रभु की कृपा से मिलता है। जो गुरु की शरण में रहते हैं, वे ही मोहमाया की भूख से मुक्त होकर Iq[ होते हैं।इसलिये किसी को बुरा कहने या दोष देने के संतुष्ट बजाय प्रभु की रज़ा को स्वीकार करना ही सुखी होने का जी एकमात्र मार्ग है। - ShareChat