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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - करिकिरपा अपनी सेवा लाए।। साधूर्संगि सरब सुख पाए।। हे परमात्मा! आप अपनी असीम किरपा करो और मुझे अपनी ম নয় सेवा भक्ति दान बख्शो। सच तो यह है कि तुहाडी नदर (कृपा) के बिना न तो हृदय में आपका सिमरन जागता है और न ही सेवा का भिखारी सौभाग्य प्राप्त होता है। जीवन के सारे ' ব্রী অভ 'সাধ্-যান' gef वेशभूषा ' में है। यहाँ साधु संग का मतलब सिर्फ बाहरी ' नहीं, बल्कि जिओ उन रूहों की सोहबत है जो सच्च और परमात्मा के मार्ग पर अडिग हैंl मनुष्य अपनी मर्जी या चतुराई से नेक रास्ते पर नहीं পঙ্াভা लिए ' चल सकता; इसके ' अकाल पुरख की रहमत और मार्गदर्शन लाज़मी है। जब इंसान अपने अहंकार (हिउमै) को त्याग कर पूरे वाले समर्पण के साथ ' सेवा' का भाव दिले में लाता है, तभी उसके असली कल्याण का रास्ता खुलता हैl मनुष्य का मन स्वभाव से बाबा चंचल ' ते अशांत है, लेकिन जब वह उच्च सुच्चे विचारों वाले शांत जी चित्त महापुरुषों की संगत में बैठता है, तो उसके जीवन के सारे दुख और मानसिक द्वंद्व अपने आप खत्म होने लगते हैंl करिकिरपा अपनी सेवा लाए।। साधूर्संगि सरब सुख पाए।। हे परमात्मा! आप अपनी असीम किरपा करो और मुझे अपनी ম নয় सेवा भक्ति दान बख्शो। सच तो यह है कि तुहाडी नदर (कृपा) के बिना न तो हृदय में आपका सिमरन जागता है और न ही सेवा का भिखारी सौभाग्य प्राप्त होता है। जीवन के सारे ' ব্রী অভ 'সাধ্-যান' gef वेशभूषा ' में है। यहाँ साधु संग का मतलब सिर्फ बाहरी ' नहीं, बल्कि जिओ उन रूहों की सोहबत है जो सच्च और परमात्मा के मार्ग पर अडिग हैंl मनुष्य अपनी मर्जी या चतुराई से नेक रास्ते पर नहीं পঙ্াভা लिए ' चल सकता; इसके ' अकाल पुरख की रहमत और मार्गदर्शन लाज़मी है। जब इंसान अपने अहंकार (हिउमै) को त्याग कर पूरे वाले समर्पण के साथ ' सेवा' का भाव दिले में लाता है, तभी उसके असली कल्याण का रास्ता खुलता हैl मनुष्य का मन स्वभाव से बाबा चंचल ' ते अशांत है, लेकिन जब वह उच्च सुच्चे विचारों वाले शांत जी चित्त महापुरुषों की संगत में बैठता है, तो उसके जीवन के सारे दुख और मानसिक द्वंद्व अपने आप खत्म होने लगते हैंl - ShareChat