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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - जैसे विकल्प बेहतर साबित हा सकत ह। स पूरकिया जा सकता ह। ؟٦ ٩»«٦٢ ؟٦ ٨٢ ٦ ٩ ٦  सार्थक बदलात ळ आर्यन महल्यान सार्थक बदलाव कॉलम में अपनी सोच बदली , जीवन बदला अंत्तिग्ता . कृतिया इसके अपने जीवन आप हर इंसान के जीवन में एक ऐसा समय जरूर आता है, जब उसे महसूस होता है कि में आए किसी तो बहुत  अगर अब ख़ुद को नहीं बदला , कुछ हाथ से निकल सकता है। सार्थक बदलाव की मैंने भी पाया कि कुछ आदतें थीरेन्थीरै मुझे कमज़ोर बना रही थी।  बता सकते कहानी हैं जिसने आपके हले मैं हर काम को टाल देता था। पढ़ाई उस दिन मैँने तय किया कि मैं एक साथ सब महत्वपूर्ण  जीवन पर प हल समय फरमठनाट हल दाता्थिसी फकाम कुछ नहीं बदलूंगा, लेकिन रोज एक छोटी सो असर डाला हो। को पूरा करना हो, मैं सोचता बहुत था, लेकिन अच्छी आदत जरूर अपनाऊँगा। सबसे पहले इस बदलाव को करता कम था। मुझे हमेशा लगता था कि  अभी अपने दिन की शुरुआत बदलनी शुरू को। सुबह  अथिकतम ३०० तो समय है॰ बाद में कर लूंगा।' लेकिन यही धीरे- धीरे आत्मविश्वास लौटने लगा।  थोडा जल्दी उठनाः  पढाई का समय तय करना शब्दी मे लिखकर बाद में' धीरे-्धीरे मेरी सबसे बड़ी कमजोरी बन कामों की छोटीन्सी सूची बनाना और सबसे ने मुझे एक और सीख दी हमारी ईमेल आईडी बदलाव गया। इसका असर मेरी पढ़़ाई जरूरी, जो काम उसी दिन करना है, उसे टालना  जीवन अचानक नहों बदलता आत्मविश्वास रोज के पर भेज दीजिए। రగ और मन की शांति, तीनों पर पड़ने लगा। चुने गए अनुभव  नहीं। शुरुआत बहुत कठिन थी, क्योकि पुरानी छोटे छोटे फ़ैसलों से बदलता हे। आज भीरमैं आद्तें बार-्बार वापस खीँचती थीं। लेकिन मैने ख़ुद को सीखने को प्रक्रिया में मानता  प्रकाशित होंगे। जब दूसरे बच्चे अपने काम समय पर पूरा हूं। मैं यह মল ক মভীন্র ম नहीं कहता कि मैं पूरी तरह बदल गया हू लेकिन  कर लेते थे और मैं पीछे रह जाता थाः तब अंदर हार नहीं मानी। कुछ दिनों बाद अपने अंदर बदलाव महसूस ही अंदर बहुत बुरा लगता था। कई बार मन में सार्थक बदलाव ಕ್ಲೆ೯ 3 # "er इतना जरूर कह सकता जरूर लिखे। निराशा भी आती थी कि शायद मैं उतना अच्छा होने लगा। जो काम पहले बोझ लगते थे, वे व्यक्ति नहीं हूं। अब मैं कोशिश करने से वाला नहीं हूं। एक दिन मैँने ख़ुद से सवाल किया अब आसान लगने लगे। पढाई में मन पहले से हिमारी मेल आईडी डरता नहीं, बल्कि रुक जाने से डरता हूं| मैंने समझ लिया है कि अगर इंसान ख़ुद से॰ सच्चा  64 क्या सच में मुझमें कमी है, या मेरी आदतें मुझे ज्यादा लगने लगा। सबसे बड़ा फ़र्क यह पड़ा कि madhurima@ पीछे खींच रही है? यही सवाल मेरे जीवन का अब मुझे अपने ऊपर भरोसा होने लगा। पहले मैं रहे और हर दिन थोड़ा ्थोड़ा बेहतर बनने की ख़ुद को लेकर उलझन में रहता था, लेकिन अब dbcorpin कोशिश करे, तो बदलाव निश्चित है। HS FTII जैसे विकल्प बेहतर साबित हा सकत ह। स पूरकिया जा सकता ह। ؟٦ ٩»«٦٢ ؟٦ ٨٢ ٦ ٩ ٦  सार्थक बदलात ळ आर्यन महल्यान सार्थक बदलाव कॉलम में अपनी सोच बदली , जीवन बदला अंत्तिग्ता . कृतिया इसके अपने जीवन आप हर इंसान के जीवन में एक ऐसा समय जरूर आता है, जब उसे महसूस होता है कि में आए किसी तो बहुत  अगर अब ख़ुद को नहीं बदला , कुछ हाथ से निकल सकता है। सार्थक बदलाव की मैंने भी पाया कि कुछ आदतें थीरेन्थीरै मुझे कमज़ोर बना रही थी।  बता सकते कहानी हैं जिसने आपके हले मैं हर काम को टाल देता था। पढ़ाई उस दिन मैँने तय किया कि मैं एक साथ सब महत्वपूर्ण  जीवन पर प हल समय फरमठनाट हल दाता्थिसी फकाम कुछ नहीं बदलूंगा, लेकिन रोज एक छोटी सो असर डाला हो। को पूरा करना हो, मैं सोचता बहुत था, लेकिन अच्छी आदत जरूर अपनाऊँगा। सबसे पहले इस बदलाव को करता कम था। मुझे हमेशा लगता था कि  अभी अपने दिन की शुरुआत बदलनी शुरू को। सुबह  अथिकतम ३०० तो समय है॰ बाद में कर लूंगा।' लेकिन यही धीरे- धीरे आत्मविश्वास लौटने लगा।  थोडा जल्दी उठनाः  पढाई का समय तय करना शब्दी मे लिखकर बाद में' धीरे-्धीरे मेरी सबसे बड़ी कमजोरी बन कामों की छोटीन्सी सूची बनाना और सबसे ने मुझे एक और सीख दी हमारी ईमेल आईडी बदलाव गया। इसका असर मेरी पढ़़ाई जरूरी, जो काम उसी दिन करना है, उसे टालना  जीवन अचानक नहों बदलता आत्मविश्वास रोज के पर भेज दीजिए। రగ और मन की शांति, तीनों पर पड़ने लगा। चुने गए अनुभव  नहीं। शुरुआत बहुत कठिन थी, क्योकि पुरानी छोटे छोटे फ़ैसलों से बदलता हे। आज भीरमैं आद्तें बार-्बार वापस खीँचती थीं। लेकिन मैने ख़ुद को सीखने को प्रक्रिया में मानता  प्रकाशित होंगे। जब दूसरे बच्चे अपने काम समय पर पूरा हूं। मैं यह মল ক মভীন্র ম नहीं कहता कि मैं पूरी तरह बदल गया हू लेकिन  कर लेते थे और मैं पीछे रह जाता थाः तब अंदर हार नहीं मानी। कुछ दिनों बाद अपने अंदर बदलाव महसूस ही अंदर बहुत बुरा लगता था। कई बार मन में सार्थक बदलाव ಕ್ಲೆ೯ 3 # "er इतना जरूर कह सकता जरूर लिखे। निराशा भी आती थी कि शायद मैं उतना अच्छा होने लगा। जो काम पहले बोझ लगते थे, वे व्यक्ति नहीं हूं। अब मैं कोशिश करने से वाला नहीं हूं। एक दिन मैँने ख़ुद से सवाल किया अब आसान लगने लगे। पढाई में मन पहले से हिमारी मेल आईडी डरता नहीं, बल्कि रुक जाने से डरता हूं| मैंने समझ लिया है कि अगर इंसान ख़ुद से॰ सच्चा  64 क्या सच में मुझमें कमी है, या मेरी आदतें मुझे ज्यादा लगने लगा। सबसे बड़ा फ़र्क यह पड़ा कि madhurima@ पीछे खींच रही है? यही सवाल मेरे जीवन का अब मुझे अपने ऊपर भरोसा होने लगा। पहले मैं रहे और हर दिन थोड़ा ्थोड़ा बेहतर बनने की ख़ुद को लेकर उलझन में रहता था, लेकिन अब dbcorpin कोशिश करे, तो बदलाव निश्चित है। HS FTII - ShareChat