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गज़ल बशीर बद्र #✒ शायरी
✒ शायरी - "गजल" मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था फिर इसके बाद मुझे कोई अजनबी न मिला बहुत अजीब है ये क़ुरबतों की ೯  वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला ख़ुदा की इतनी बड़ी क़ायनात में मैंने बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला (बशीर बद्र) Motivational Videos App Want . "गजल" मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था फिर इसके बाद मुझे कोई अजनबी न मिला बहुत अजीब है ये क़ुरबतों की ೯  वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला ख़ुदा की इतनी बड़ी क़ायनात में मैंने बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला (बशीर बद्र) Motivational Videos App Want . - ShareChat