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#बलिदान दिवस #शहीद दिवस #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🇮🇳 देशभक्ति
बलिदान दिवस - अमर शहीद तेलंगा खड़िया जी के बलिदान दिवस पर থান-থান নমন ^) तेलंगा खड़िया का जन्म 9 फरवरी १८०६ को झारखंड के गुमला जिले के सिसई थाना अंतर्गत मुर्गू गांव में हुआ था. उन्होंने खड़िया और अन्य आदिवासी को ब्रिटिश शासन के अत्याचार के खिलाफ समुदायों दुर्भाग्यवश, २३ अप्रैल १८८० को तेलंगा আামূন ক্িমা| खड़िया की हत्या कर दी गई। उनके शव को गुमला के सोसो नीम टोली में दफनाया गया, जिसे आज भी तेलगा टोपा टांड के नाम से जाना जाता है। अमर शहीद तेलंगा नेतृत्व क्षमता आज भी खड़िया की संगठनात्मक एवं हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। अपर चलिदानी तेलंगा खड़िया बलिदान दिवस २३ अप्रैल देश के लिए सब कुछ अर्पित करे वाले हुतात्माओं गें एक अग्रणी नाम है तेलंगा खड़़िया का। तेलंगा बाल्यावस्था से ही अपने साथियोंके आदि किया करते थे। साथ शस्त्र अभ्यास कुश्ती  १८३१ ३२ की कोल कांति नेउन्हेंकाफी उद्वेलित किया और उन्होंने अंग्रेजों के নিহ संघर्ष के लिए लोगों को प्रेरित करना प्रारंभ कर दिया। इस परअंग्रेजों ने उन्हें बंदी बना लिया। बादचे फिरसे अपने ad ச गाँव लोटे और अग्रेजों से लडने की तेयारी प्रारंभ कर दी। उनके बढते प्रभाव को देखते हुए अंग्रेजोंने उनके ही एक साथी को पेसे देकर उन्हेंमारने के लिए कहा। २३ अप्रेल १८८० को तेलंगा जब धरती माता को प्रणाम कर प्रार्थना कर रहे ्थे तब उन्हें गोली मारदी गई। अमर शहीद तेलंगा खड़िया जी के बलिदान दिवस पर থান-থান নমন ^) तेलंगा खड़िया का जन्म 9 फरवरी १८०६ को झारखंड के गुमला जिले के सिसई थाना अंतर्गत मुर्गू गांव में हुआ था. उन्होंने खड़िया और अन्य आदिवासी को ब्रिटिश शासन के अत्याचार के खिलाफ समुदायों दुर्भाग्यवश, २३ अप्रैल १८८० को तेलंगा আামূন ক্িমা| खड़िया की हत्या कर दी गई। उनके शव को गुमला के सोसो नीम टोली में दफनाया गया, जिसे आज भी तेलगा टोपा टांड के नाम से जाना जाता है। अमर शहीद तेलंगा नेतृत्व क्षमता आज भी खड़िया की संगठनात्मक एवं हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। अपर चलिदानी तेलंगा खड़िया बलिदान दिवस २३ अप्रैल देश के लिए सब कुछ अर्पित करे वाले हुतात्माओं गें एक अग्रणी नाम है तेलंगा खड़़िया का। तेलंगा बाल्यावस्था से ही अपने साथियोंके आदि किया करते थे। साथ शस्त्र अभ्यास कुश्ती  १८३१ ३२ की कोल कांति नेउन्हेंकाफी उद्वेलित किया और उन्होंने अंग्रेजों के নিহ संघर्ष के लिए लोगों को प्रेरित करना प्रारंभ कर दिया। इस परअंग्रेजों ने उन्हें बंदी बना लिया। बादचे फिरसे अपने ad ச गाँव लोटे और अग्रेजों से लडने की तेयारी प्रारंभ कर दी। उनके बढते प्रभाव को देखते हुए अंग्रेजोंने उनके ही एक साथी को पेसे देकर उन्हेंमारने के लिए कहा। २३ अप्रेल १८८० को तेलंगा जब धरती माता को प्रणाम कर प्रार्थना कर रहे ्थे तब उन्हें गोली मारदी गई। - ShareChat