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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - दूसरों को देखन्देख क्यों जल रहा मैं हूं सबसे अच्छा अभिमान यह बोल रहा मैं ज्येष्ठ मैं सर्वश्रेष्ठ पूरे जग में देखो मुझसा ना कोई एक मेरे पग पग में फूल बीछे हे मेरी मेहनत के यह सब रंग खिले हैं मेरी हुनर की सब दाद देते हैं कोई नूर तो कोई मुझे कोहिनूर कहते हैं मुझे प्रतिस्पर्धा में हरा ना पाओगे कहता हूं शर्म से मुख कहीं दिखला ना पाओगे 74 ऐसा उसका अहंकार बोल रहा वह तो अब खुद को कहीं का राज दुलारा समझ रहा ऐठ में ऐसी वह चल रहा अपना सर्वस्व जेसे खुद ही निगल रहा मुझको तो वह घमंड का पुतला दिख रहा खुद को चाहे वह कहीं का राजा समझ रहा अब उसकी हार क्या जीत क्या वह तो अखंड अकेला उसका कोई मीत ना स्वाती छीपा...... दूसरों को देखन्देख क्यों जल रहा मैं हूं सबसे अच्छा अभिमान यह बोल रहा मैं ज्येष्ठ मैं सर्वश्रेष्ठ पूरे जग में देखो मुझसा ना कोई एक मेरे पग पग में फूल बीछे हे मेरी मेहनत के यह सब रंग खिले हैं मेरी हुनर की सब दाद देते हैं कोई नूर तो कोई मुझे कोहिनूर कहते हैं मुझे प्रतिस्पर्धा में हरा ना पाओगे कहता हूं शर्म से मुख कहीं दिखला ना पाओगे 74 ऐसा उसका अहंकार बोल रहा वह तो अब खुद को कहीं का राज दुलारा समझ रहा ऐठ में ऐसी वह चल रहा अपना सर्वस्व जेसे खुद ही निगल रहा मुझको तो वह घमंड का पुतला दिख रहा खुद को चाहे वह कहीं का राजा समझ रहा अब उसकी हार क्या जीत क्या वह तो अखंड अकेला उसका कोई मीत ना स्वाती छीपा...... - ShareChat