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आजकल पढे लिखे लोगों को अधिकांशतः सभी को सुंदर छिलके पर ही नजर है जबकि अनपढ़ जमाने में प्राचीन काल में भारतीय आत्मीयता आंतरिक सुंदरता पर ही अधिक ध्यान देते थे इसीलिए चरित्र हीनता नीचता अश्लीलता बेईमानी मांसाहार शराब रिश्वतखोरी झूठ फरेब कम था #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #Suvichar #anmol gyan #anmol vichar
❤️जीवन की सीख - हमारे लगता है सब हूमें ही देखकर हमसे संपर्क व्यवहार् लेन देन सम्मान पसंद नापसंद करते हैं यह सरासर झूठ है सभी जीवों को एक বা ٤٢؟ आवरण चित्र दिखता है पंच भौतिक स्थूल शूरीर म़ून का स्वभाव संस्कार आदतें अच्छाई बुराई कूहां चाहतें दिखती है जो कि सुक्ष्म शरीर में है और कारण शरीर वह ज़हां गहरी़। हैं इन तीनों नींद में हम सभी रहते शरीरों से परे हम सभी तो निर्मल 38 ईश्वर प्रकाश चेतना आत्मा फिर नहम किसी को देखकर कोई हमें देख कर ؟؟؟ कर्म हैं और जो ऐसा करने दक्ष हा वह धन्य है उन्हें मेरा प्रणाम सागर सिमरोल हमारे लगता है सब हूमें ही देखकर हमसे संपर्क व्यवहार् लेन देन सम्मान पसंद नापसंद करते हैं यह सरासर झूठ है सभी जीवों को एक বা ٤٢؟ आवरण चित्र दिखता है पंच भौतिक स्थूल शूरीर म़ून का स्वभाव संस्कार आदतें अच्छाई बुराई कूहां चाहतें दिखती है जो कि सुक्ष्म शरीर में है और कारण शरीर वह ज़हां गहरी़। हैं इन तीनों नींद में हम सभी रहते शरीरों से परे हम सभी तो निर्मल 38 ईश्वर प्रकाश चेतना आत्मा फिर नहम किसी को देखकर कोई हमें देख कर ؟؟؟ कर्म हैं और जो ऐसा करने दक्ष हा वह धन्य है उन्हें मेरा प्रणाम सागर सिमरोल - ShareChat