ShareChat
click to see wallet page
search
#राधे-राधे #राधे #जय श्री राधे #जय श्री कृष्ण #जय श्री राधे कृष्ण श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख रानियाँ “अष्टभार्या” कहलाती हैं। पुराणों में इन्हें केवल रानियाँ नहीं, बल्कि भगवान की विभिन्न दिव्य शक्तियों और गुणों का प्रतीक माना गया है। 1. रुक्मिणी 2. सत्यभामा 3. जाम्बवती 4. कालिंदी 5. मित्रविंदा 6. नाग्नजिति (सत्या) 7. भद्रा 8. लक्ष्मणा 1. रुक्मिणी — लक्ष्मी और परम भक्ति का स्वरूप रुक्मिणी जी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वे “अनन्य भक्ति” की प्रतीक हैं। उन्होंने मन से पहले ही कृष्ण को पति स्वीकार कर लिया था। उनका विवाह दिखाता है कि सच्चा प्रेम बाधाओं से नहीं रुकता। 2. सत्यभामा — शक्ति और स्वाभिमान सत्यभामा तेजस्वी और साहसी थीं। वे पृथ्वी शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। तुलाभार कथा सिखाती है कि भक्ति, धन से श्रेष्ठ है। उनमें प्रेम के साथ स्वाभिमान भी था। 3. जाम्बवती — धैर्य और पहचान जाम्बवती, जाम्बवान की पुत्री थीं। यह विवाह राम और कृष्ण अवतार के संबंध का संकेत देता है। जाम्बवान ने कृष्ण में राम का दर्शन किया। 4. कालिंदी — तपस्या और समर्पण कालिंदी यमुना से जुड़ी दिव्य शक्ति मानी जाती हैं। उन्होंने कठोर तप करके कृष्ण को प्राप्त किया। वे पवित्रता और साधना का प्रतीक हैं। 5. मित्रविंदा — प्रेम का साहस मित्रविंदा कृष्ण से प्रेम करती थीं, लेकिन परिवार विरोध में था। उनका जीवन सिखाता है कि सत्य प्रेम में साहस आवश्यक है। 6. नाग्नजिति (सत्या) — धर्म और पराक्रम सत्या के स्वयंवर में सात उग्र बैलों को वश में करना था। कृष्ण ने यह कार्य कर धर्मयुक्त वीरता का परिचय दिया। यह मन और इंद्रियों पर विजय का प्रतीक भी माना जाता है। 7. भद्रा — सरलता और शुभता भद्रा को शांत, सौम्य और मंगलमयी माना गया है। वे पारिवारिक प्रेम और संतुलन की प्रतीक हैं। 8. लक्ष्मणा — कौशल और निष्ठा लक्ष्मणा का स्वयंवर वीरता परीक्षा पर आधारित था। वे समर्पण, प्रतिभा और दृढ़ निष्ठा की प्रतीक मानी जाती हैं। अष्टभार्या का आध्यात्मिक अर्थ:: भक्ति परंपराओं में कहा जाता है कि: कृष्ण परमात्मा हैं। अष्टभार्या उनकी आठ दिव्य शक्तियाँ हैं। ये आठ प्रकार की भक्ति, शक्ति, प्रेम, धैर्य, तप, धर्म और समर्पण का प्रतीक हैं। ~जय श्री कृष्ण~
राधे-राधे - ASHTABHARYA THE EIGHT WIVES OF LORD KRISHNA 3. JAMBAWATI 1 RUKMINI 2 SATYABHAMA KALINDI Daughter of Jambavan | Goddess of Lakshmi | [mhodimunt of [irth Goddess of Yamuna | Praonification 0 Symbol of pride; | Symbol of patience;| Symhol 0f pcnance; loyalty and humility duvotion and [ovc. courage and devotion;| purity and devotion 6. NAGNIITI 5. MITRAVINDA 7 BHADRA 8. LAKSHMANA (SATYA) Kaikeya Princess of Avanti | Princess ofMadra| ೊrincess 01 Dutyhter of Kins Natnajit [oue; Symbol of auspiciousness;| Symbol ofskill;| Symbol or ` Symbol of rightcousness | CouraBe and sicrifice: kindness amd hartonys dudicntion and loyaltys strcnsth and Vcton. They are not just queens but divine manifestations of love devotion, strength wisdom and virtue श्रीकृष्णः शरणं माम ASHTABHARYA THE EIGHT WIVES OF LORD KRISHNA 3. JAMBAWATI 1 RUKMINI 2 SATYABHAMA KALINDI Daughter of Jambavan | Goddess of Lakshmi | [mhodimunt of [irth Goddess of Yamuna | Praonification 0 Symbol of pride; | Symbol of patience;| Symhol 0f pcnance; loyalty and humility duvotion and [ovc. courage and devotion;| purity and devotion 6. NAGNIITI 5. MITRAVINDA 7 BHADRA 8. LAKSHMANA (SATYA) Kaikeya Princess of Avanti | Princess ofMadra| ೊrincess 01 Dutyhter of Kins Natnajit [oue; Symbol of auspiciousness;| Symbol ofskill;| Symbol or ` Symbol of rightcousness | CouraBe and sicrifice: kindness amd hartonys dudicntion and loyaltys strcnsth and Vcton. They are not just queens but divine manifestations of love devotion, strength wisdom and virtue श्रीकृष्णः शरणं माम - ShareChat