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#श्री हरि विष्णु
🕉️भगवान् श्रीविष्णु के विना दूसरे कोई भी देव मुक्ति नहीं दे सकते हैं। जब-जब वर देने का प्रसंग आता है तब-तब देवता यह कह देते हैं कि मुक्ति को छोड़ कर और वर माँगो । श्रीमद्भागवत में मुचकुन्द राजा के प्रसंग में भी यही बात आई है कि मुचकुन्द पर प्रसन्न होकर देवता लोग बोले
कि —🕉️
वरं वृणीष्व भद्रं ते ऋते
कैवल्यमद्य नः ।
एक एवेश्वरस्तस्य भगवान् विष्णुरव्ययः ।।
—श्रीमद्भागवत, 10/51/20
📕राजन् ! मोक्ष को छोड़कर जो तुम्हारी इच्छा हो वह माँगो ! इसी तरह शिव जी ने भी घण्टाकर्ण के प्रसंग में मुक्ति के लिये भगवान् विष्णु के पास उनको भेजा। अतः भगवान् श्रीमन्नारायण के विना मुक्ति देना किसी के हाथ में नहीं है। जहाँ तक जिसका अधिकार है वहाँ तक ही वह दे सकता है। परम् पद से बढ़कर और कोई चीज नहीं है। उसका अधिपति सर्वेश्वर भगवान् श्रीमन्नारायण के विना और दूसरा नहीं हो सकता ।
श्रुतियों में भी यह स्पष्ट ही लिखा है कि जो मुक्ति स्थान है। यानी परमपद है, वह भगवान् श्रीहरि का ही है। उस दिव्य धाम को उनके शरणागत् ही पाते हैं।📕
तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः ।
🌸सुप्रभात 🌸
🌷जय श्रीहरि 🌷🙏
🙏जय श्रीराम 🙏