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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - 29 अक्षय कुमार | रांची, झारखंड " পিনা মী সানা, কীন & जीवनसाथी? सच्चा पीछे एक महिला का हाथ कहते हैं कि सफल पुरुष ` होत है, लेकिन मैने इसका दूसरा रूप अपने घर में देखा है। मेरी मां को सफलता के पौछे पापा का अटूट साथ रखडा के बाद भी जब मां पुलिस भर्ती तीन भाई-्बहनों है। ক্কী রম াবী के लिए दौड़ने जाती थीं॰ तो गांव केँ लोग उन्हें अजीब नजरों से देखते थे। लेकिन पापा हर कदम पर उनके  खड़े रहे। भर्ती प्रक्रिया के दौरान पैसे और पहचान के साथ ने तीन दिन तक आधे पेट रहकर जिला अ्ययावल यें पोरेसंने नेै ना्तेैनि तक् लाकन हिस्हत नही हारी।  न्यायालय तो गांव में पंचायत तक बैठ गई कि हुआ, जब मां का चयन उठाएंगी ! तब भी पापा मां बंदूक  क्या अब गांव की बहुए में हाया के साथ मजबूती से खड़े रहे। मां की " f रात मे॰ उनका टिफिन तैयार करने जूते पॉलिश करने और  जरूरत पड़ने पर आधी रात को थाने छोड़ने तक का काम पापा ही करते थे। एक समय ऐसा भी था, जब छोटे भाई के इलाज के लिए घर की इकलौती बछड़ी बेचनी पडी शीै आज्ल वह्ी भाईँ केंद्रीय विश्वविद्यालय में पढ रहा है और " पूरी कर लौटा हूं। स्कॉटलैंड से अपनी 9618` लोाग मां को सफलता देखते है लेकिन हैेम उस ख़ंसानरे को देखते हें जिसने हर संघर्ष में उनका हाथ थामे रखा। असली हीरो मेरे पापा हैं॰ जिन्होने सिखाया कि॰ सच्चा लिए जीवनसाथी वहो है, जो हर परिस्थिति में साथ खडा रहे।  सम्मानित कमार अम्बज  कसमाग्रज राष्ट्रीय साहित्य " দুফকায ಭxಭumnದದ; 29 अक्षय कुमार | रांची, झारखंड " পিনা মী সানা, কীন & जीवनसाथी? सच्चा पीछे एक महिला का हाथ कहते हैं कि सफल पुरुष ` होत है, लेकिन मैने इसका दूसरा रूप अपने घर में देखा है। मेरी मां को सफलता के पौछे पापा का अटूट साथ रखडा के बाद भी जब मां पुलिस भर्ती तीन भाई-्बहनों है। ক্কী রম াবী के लिए दौड़ने जाती थीं॰ तो गांव केँ लोग उन्हें अजीब नजरों से देखते थे। लेकिन पापा हर कदम पर उनके  खड़े रहे। भर्ती प्रक्रिया के दौरान पैसे और पहचान के साथ ने तीन दिन तक आधे पेट रहकर जिला अ्ययावल यें पोरेसंने नेै ना्तेैनि तक् लाकन हिस्हत नही हारी।  न्यायालय तो गांव में पंचायत तक बैठ गई कि हुआ, जब मां का चयन उठाएंगी ! तब भी पापा मां बंदूक  क्या अब गांव की बहुए में हाया के साथ मजबूती से खड़े रहे। मां की " f रात मे॰ उनका टिफिन तैयार करने जूते पॉलिश करने और  जरूरत पड़ने पर आधी रात को थाने छोड़ने तक का काम पापा ही करते थे। एक समय ऐसा भी था, जब छोटे भाई के इलाज के लिए घर की इकलौती बछड़ी बेचनी पडी शीै आज्ल वह्ी भाईँ केंद्रीय विश्वविद्यालय में पढ रहा है और " पूरी कर लौटा हूं। स्कॉटलैंड से अपनी 9618` लोाग मां को सफलता देखते है लेकिन हैेम उस ख़ंसानरे को देखते हें जिसने हर संघर्ष में उनका हाथ थामे रखा। असली हीरो मेरे पापा हैं॰ जिन्होने सिखाया कि॰ सच्चा लिए जीवनसाथी वहो है, जो हर परिस्थिति में साथ खडा रहे।  सम्मानित कमार अम्बज  कसमाग्रज राष्ट्रीय साहित्य " দুফকায ಭxಭumnದದ; - ShareChat