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#🪔कब है सावन की कामिका एकादशी❓ 🌿 कामिका एकादशी व्रत
📅 9 अगस्त 2026, रविवार
🌙 श्रावण मास • कृष्ण पक्ष • एकादशी
कामिका एकादशी की कथा एवं महात्म्य
सनातन वैष्णव परम्परा में कामिका एकादशी को अत्यन्त महिमामयी एकादशी माना गया है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आती है और विशेष रूप से भगवान श्रीहरि की प्रसन्नता का दिवस मानी गई है।
पुराणों में वर्णन आता है कि प्राचीन काल में एक प्रतापी राजा अनजाने में एक गंभीर अपराध का भागी बन गया। उस पाप के कारण उसके जीवन में अशान्ति और मानसिक क्लेश बढ़ने लगा। अनेक उपाय करने पर भी उसे शान्ति प्राप्त नहीं हुई। अन्ततः एक महर्षि ने उसे भगवान श्रीहरि की शरण ग्रहण करने तथा कामिका एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया। राजा ने श्रद्धापूर्वक उपवास किया, भगवान का स्मरण, कीर्तन और रात्रि-जागरण किया तथा द्वादशी के दिन विधिपूर्वक पारण किया।
भगवान की कृपा से उसके हृदय का अज्ञान दूर हुआ, पापों का क्षय हुआ और उसके जीवन में पुनः भक्ति एवं शान्ति का उदय हुआ।
इसी कारण शास्त्रों में कहा गया है कि—
कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य के पापों का नाश करने वाला, भगवान की भक्ति को पुष्ट करने वाला तथा भगवत्प्रेम की दिशा में अग्रसर करने वाला है।
शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि इस दिन भगवान विष्णु को तुलसीदल अर्पित करना, हरिनाम संकीर्तन करना, श्रीमद्भागवत एवं भगवद्गीता का श्रवण-स्वाध्याय करना तथा यथाशक्ति वैष्णव सेवा करना अत्यन्त मंगलकारी माना गया है।
*किन्तु वैष्णव आचार्य हमें स्मरण कराते हैं कि एकादशी का वास्तविक उद्देश्य केवल अन्न का त्याग नहीं, बल्कि मन को भगवान की ओर अधिक लगाना है। यदि उपवास के कारण भजन बढ़े, तो वही एकादशी की सफलता है।*
🌿 *वैष्णव निवेदन*
_विशुद्ध भक्ति मार्ग पर अग्रसर होते हुए किसी भी फल की कामना से कोई भी एकादशी व्रत नहीं करना चाहिए। केवल यह जानकर कि आज हमारे इष्टदेव का विशेष दिवस है, उनकी प्रसन्नता प्राप्त करने के आनन्द में यह उपवास किया जाना चाहिए। यदि निर्जला सम्भव न हो तो श्रद्धापूर्वक जल, फल अथवा दूध ग्रहण करके भी व्रत किया जा सकता है। उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि भजन के लिए उत्साह और शरीर का आवश्यक निर्वाह बनाए रखना है।मूल रूप से एकादशी का उद्देश्य भजन को बढ़ाना है, खाने-पीने को केन्द्र बनाना नहीं।_
*प्रत्येक एकादशी पर कोई एक नियम अवश्य लीजिए—जैसे अधिक जप, कुछ अधिक स्वाध्याय, श्रीधाम सेवन, संकीर्तन, वैष्णव सेवा अथवा अपने इष्टदेव के निकट ले जाने वाली कोई भी साधना। जो भी क्रिया हमें हमारे इष्ट के अधिक समीप ले जाए, वह इस दिन अवश्य कीजिए। आनन्द हो जाएगा। एकादशी उपवास अवश्य कीजिए।*
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📲 विशेष सूचना
_*प्रत्येक भगवद् उत्सव एवं एकादशी विशेष दिवस से 3–4 दिन पूर्व उस तिथि की सूचना, महात्म्य एवं कथा की जानकारी सभी पंजीकृत सदस्यों को निःशुल्क भेजी जाती है। यदि आप अथवा आपका कोई भी स्नेहीजन यह सेवा प्राप्त करना चाहता हो, तो कृपया मो. 9855172211 पर केवल WhatsApp द्वारा अपना नम्बर निःशुल्क पंजीकृत करवा सकते हैं। कृपया कॉल न करें। केवल WhatsApp संदेश भेजें।*
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