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#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति १। और जो पुरुप सम्पूर्ण कर्मोंको सब प्रकारसे  সকৃনিন্ধ द्वारा हो किये जाते हुए देखता हैं और आत्माको अकर्ता  देखता हैं, वही यथार्थ देखता है Il २९ II भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति | মনা एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा।। पृथक्- पृथक् भावको जिस क्षण यह पुरुप " भूतोंके एक परमात्मामें हो स्थित तथा उस परमात्मासे हो विस्तार देखता हैं॰ उसी क्षण वह सम्पूर्ण भूतोंका মমিরানবমন সম্মক্ষী সাদ ক্াঁ ভানা ৮ঁ Il ২০ Il अनादित्वान्नि्गुणत्वात्परमात्मायमव्ययः शरीरस्थोउपि   कौन्तेय न करोति न लिप्यते।। हे अर्जुन ! अनादि होनेसे और निर्गुंण होनेसे यह अविनाशी परमात्मा शरीरमॅं स्थित होनेपर भौ वास्तवमें न तो कुछ करता है और न लिप्त ही होता है II ३१ I। यथा सर्वगतं सौक्ष्म्यादाकाशं नोपलिप्यते। सर्वत्रावस्थितो   देहे तथात्मा नोपलिप्यते ।। आकाश सूक्ष्म होनेकेकारण  जिस प्रकार सर्वत्र व्याप्त लिप्त नहीं होता, वैसे हा दैहमें सर्वत्र स्थित आत्मा निर्गुण होनेके कारण देहके गुणौंसे लिप्त नहीं होता II३२ II श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस गोरखपुर से साभार प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति १। और जो पुरुप सम्पूर्ण कर्मोंको सब प्रकारसे  সকৃনিন্ধ द्वारा हो किये जाते हुए देखता हैं और आत्माको अकर्ता  देखता हैं, वही यथार्थ देखता है Il २९ II भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति | মনা एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा।। पृथक्- पृथक् भावको जिस क्षण यह पुरुप " भूतोंके एक परमात्मामें हो स्थित तथा उस परमात्मासे हो विस्तार देखता हैं॰ उसी क्षण वह सम्पूर्ण भूतोंका মমিরানবমন সম্মক্ষী সাদ ক্াঁ ভানা ৮ঁ Il ২০ Il अनादित्वान्नि्गुणत्वात्परमात्मायमव्ययः शरीरस्थोउपि   कौन्तेय न करोति न लिप्यते।। हे अर्जुन ! अनादि होनेसे और निर्गुंण होनेसे यह अविनाशी परमात्मा शरीरमॅं स्थित होनेपर भौ वास्तवमें न तो कुछ करता है और न लिप्त ही होता है II ३१ I। यथा सर्वगतं सौक्ष्म्यादाकाशं नोपलिप्यते। सर्वत्रावस्थितो   देहे तथात्मा नोपलिप्यते ।। आकाश सूक्ष्म होनेकेकारण  जिस प्रकार सर्वत्र व्याप्त लिप्त नहीं होता, वैसे हा दैहमें सर्वत्र स्थित आत्मा निर्गुण होनेके कारण देहके गुणौंसे लिप्त नहीं होता II३२ II श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस गोरखपुर से साभार - ShareChat