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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - अहकार अहंकार धीरे धीरे इंसान की ज़िंदगी को भीतर से खोखला कर देता है। 'जब व्यक्ति को अपने ज्ञान, अपनी सोच या अपने निर्णयों पर ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा होने लगता है॰ तब चह सीखना बंद कर देता है। उसे लगता है कि चही सही है और बाकी सब गलत हैं। यही सोच रिश्तों में दूरी पैदा करती है, क्योंकि अहंकारी बजाय केवल खुद को साबित करने में ಖfh सुनने के लगा रहता है। धीरे धीरे लोग उससे दूर होने लगते हैं॰ मौके हाथ से निकलने लगते हैं और व्यक्ति को समझ ही नहीं आता कि गलती कहाँ हो रही है। सच यह है कि अहंकार इंसान को इतना अंधा बना देता है कि वह अपनी ही कमियों को देख नहीं पाता, और यही अंधापन धीरे धीरे उसकी पूरी जिंदगी को बिगाड़ देता 81 अहकार अहंकार धीरे धीरे इंसान की ज़िंदगी को भीतर से खोखला कर देता है। 'जब व्यक्ति को अपने ज्ञान, अपनी सोच या अपने निर्णयों पर ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा होने लगता है॰ तब चह सीखना बंद कर देता है। उसे लगता है कि चही सही है और बाकी सब गलत हैं। यही सोच रिश्तों में दूरी पैदा करती है, क्योंकि अहंकारी बजाय केवल खुद को साबित करने में ಖfh सुनने के लगा रहता है। धीरे धीरे लोग उससे दूर होने लगते हैं॰ मौके हाथ से निकलने लगते हैं और व्यक्ति को समझ ही नहीं आता कि गलती कहाँ हो रही है। सच यह है कि अहंकार इंसान को इतना अंधा बना देता है कि वह अपनी ही कमियों को देख नहीं पाता, और यही अंधापन धीरे धीरे उसकी पूरी जिंदगी को बिगाड़ देता 81 - ShareChat