neelam singhal
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#🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🤗जया किशोरी जी🕉️ - 7976] qer&- 343 | करणाथयी ह्याथु  रखती हैँ खुले सदा ದ[ಹರಟಿಂಿತಹೆ] कुष्ा की आवश्यकता हरो॰ ತಣಿ೯ಶಹಿಷನಹಂ दैर दा हरो॰ वे बिना थैदभाव 94/ हरभततत पर अपना लुताती हैं और उसकी அவிசிவிதிgூிQதி शंढि और अर्नन आशीर्वाद सै भर दैती हैँ० శిశ్ర్రీిశిశ్రి 7976] qer&- 343 | करणाथयी ह्याथु  रखती हैँ खुले सदा ದ[ಹರಟಿಂಿತಹೆ] कुष्ा की आवश्यकता हरो॰ ತಣಿ೯ಶಹಿಷನಹಂ दैर दा हरो॰ वे बिना थैदभाव 94/ हरभततत पर अपना लुताती हैं और उसकी அவிசிவிதிgூிQதி शंढि और अर्नन आशीर्वाद सै भर दैती हैँ० శిశ్ర్రీిశిశ్రి - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ऊँ जय श्री श्याम देवाय नमः तेरी मोहब्बत मेर आदत है बाबा तेरी तमन्ना मेरी साँस है तेरे बिना जो लम्हा गुज़रे dIdI लगता है वो मेरै आख़िरी साँस है शीश के दानी महा बलवानी कीजय নিতত নানলা ऊँ जय श्री श्याम देवाय नमः तेरी मोहब्बत मेर आदत है बाबा तेरी तमन्ना मेरी साँस है तेरे बिना जो लम्हा गुज़रे dIdI लगता है वो मेरै आख़िरी साँस है शीश के दानी महा बलवानी कीजय নিতত নানলা - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - जब अच्छे और सच्चे लोग ठेस खाते है॰ तो वे झगड़ा नहीं करते, बस चुपचाप किनारा कर लेते है। फिर चाहे पीछे खजाना ही क्यों ना छुट रहा हो... मुड़ कर नही देखते.. ! जब अच्छे और सच्चे लोग ठेस खाते है॰ तो वे झगड़ा नहीं करते, बस चुपचाप किनारा कर लेते है। फिर चाहे पीछे खजाना ही क्यों ना छुट रहा हो... मुड़ कर नही देखते.. ! - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ऊँ कृष्णाय वासुदवाय  हरये पूरमात्मने। प्रणतूःक्लेशुनाशाय সীনিল্ায়  नमा नमः|| ऊँ कृष्णाय वासुदवाय  हरये पूरमात्मने। प्रणतूःक्लेशुनाशाय সীনিল্ায়  नमा नमः|| - ShareChat
आसरा इस जहाँ का मिले न मिले...मुझको तेरा सहारा सदा चाहिए.. जय हो मेरे प्राणधन.. बाँकेबिहारीलाल जी🌹🙏🏼🌹 #🤗जया किशोरी जी🕉️
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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - जिसकौ जीनै का ढंग आ गया उसका ढोंग चला गया। লীব্রথানন ०८४ ढंग और ढोंग लोकेशानन्द जिसकौ जीनै का ढंग आ गया उसका ढोंग चला गया। লীব্রথানন ०८४ ढंग और ढोंग लोकेशानन्द - ShareChat
❤️🌹🙏 राधे राधे दोस्तों 🙏🌹❤️ जैसे-जैसे पैसा बढ़ता जाता है,, शून्यता बढ़ती जाती है..! 100, 1000,10,000,10,0000 इसलिए हमारे बुजुर्गों ने,, 11, 21,51,101,और 501 देने का रिवाज बनाया था,, ताकि ,,, रिश्तों में "1" एकता बनी रहे शून्यता "0" नहीं..! #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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#जय_श्री_राम_जय_हनुमान #जय_श्री_रामभक्त_हनुमान 🙏🌹पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि,विवेकविज्ञान निधानाकवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम पाहीं।'🙏🌹 श्री हनुमान जी आप सबका जीवन सुखमय और मंगलमय करें। 🌷🙏🏻जय बजरंगबली🙏🏻🌷 🌷🙏🏻जय श्री राम जी 🙏🏻🌷 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - जयश्र राम शभ संगूलवार रामको समझो कृष्ण को जानो राम केभक्त हनुमान कृष्ण के साथ बलराम भक्ति हो हनुमान जैसी रोम रोम से निकले राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम आप भी बोलो राम राम राम जयश्र राम शभ संगूलवार रामको समझो कृष्ण को जानो राम केभक्त हनुमान कृष्ण के साथ बलराम भक्ति हो हनुमान जैसी रोम रोम से निकले राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम आप भी बोलो राम राम राम - ShareChat
ज़िंदगी में जो कुछ भी होता है, वो हमारे कर्मों का ही परिणाम होता है। हम अक्सर सोचते हैं कि दुख से बच जाएं और सुख खरीद लें… लेकिन सच्चाई यह है कि— न तो दुख बेचे जा सकते हैं, और न ही सुख खरीदे जा सकते हैं। 👉 जो बोओगे, वही काटोगे 👉 जो करोगे, वही लौटकर आएगा इसलिए… अपने कर्म अच्छे रखो, क्योंकि कर्मों का हिसाब कभी खाली नहीं जाता। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 66 कर्मों का लिखा ৪ং ম্াল ম भुगतना पड़ता है दुःख बेचे नहीं जा सकते और सुख खरीदे नहीं जा सकते कर्म अच्छे करो, कर्मो का फल जीवन अपने आप अच्छा होगा टाला नहीं जा सकता धैर्य रखो, जो करते हो, समय का लिखा कर्म अच्छे रखो, वही लौटकर कभी मिटता नहीं, फल अपन आप समय सबका आता है। साथ देता है। बस समय पर मिलता है। मिलेगा | 9 कर्मो से भागा नहीं जा सकता , इसलिए अच्छे कर्म करो और शांति से जीओ 66 कर्मों का लिखा ৪ং ম্াল ম भुगतना पड़ता है दुःख बेचे नहीं जा सकते और सुख खरीदे नहीं जा सकते कर्म अच्छे करो, कर्मो का फल जीवन अपने आप अच्छा होगा टाला नहीं जा सकता धैर्य रखो, जो करते हो, समय का लिखा कर्म अच्छे रखो, वही लौटकर कभी मिटता नहीं, फल अपन आप समय सबका आता है। साथ देता है। बस समय पर मिलता है। मिलेगा | 9 कर्मो से भागा नहीं जा सकता , इसलिए अच्छे कर्म करो और शांति से जीओ - ShareChat
जगत-जननी पार्वतीजी ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो वे दौड़ी-दौड़ी शंकरजी के पास गयीं और कहने लगीं, "भगवन् ! मुझे ऐसा लगता है कि आपका कठोर हृदय अपने अनन्य भक्तों की दुर्दशा देखकर भी नहीं पिघलता। कम-से-कम उनके लिए भोजन की उचित व्यवस्था तो कर ही देनी चाहिए। देखते नहीं वह बेचारा भर्तृहरि अपनी कई दिन की भूख मृतक को पिण्ड के दिये गये आटे की रोटियाँ बनाकर शान्त कर रहा है।" महादेव ने हँसते हुए कहा, "शुभे ! ऐसे भक्तों के लिए मेरा द्वार सदैव खुला रहता है। पर वह आना ही कहाँ चाहते हैं यदि कोई वस्तु दी भी जाये तो उसे स्वीकार नहीं करते। कष्ट उठाते रहते हैं फिर ऐसी स्थिति में तुम्हीं बताओ मैं क्या करूँ ?" माँ भवानी आश्चर्य से बोलीं, "तो क्या आपके भक्तों को उदर पूर्ति के लिए भोजन की आवश्यकता भी अनुभव नहीं होती ?" श्रीशिवजी ने कहा, "परीक्षा लेने की तो तुम्हारी पुरानी आदत है यदि विश्वास न हो तो तुम स्वयं ही जाकर क्यों न पूछ लो। परन्तु परीक्षा में सावधानी रखने की आवश्यकता है।" भगवान शंकर के आदेश की देर थी कि माँ पार्वती भिखारिन का छद्मवेश बनाकर भर्तृहरि के पास पहुँचीं और बोली, "बेटा ! मैं पिछले कई दिन से भूखी हूँ। क्या मुझे भी कुछ खाने को देगा ?" अवश्य भर्तृहरि ने केवल चार रोटियाँ सेंकी थीं उनमें से दो बुढ़िया माता के हाथ पर रख दीं। शेष दो रोटियों को खाने के लिए आसन लगाकर उपक्रम करने लगे। भिखारिन ने दीन भाव से निवेदन किया, "बेटा ! इन दो रोटियों से कैसे काम चलेगा ? मैं अपने परिवार में अकेली नहीं हूँ एक बुड्ढा पति भी है उसे भी कई दिन से खाने को नहीं मिला है।" भर्तृहरि ने वे दोनों रोटियाँ भी भिखारिन के हाथ पर रख दीं। उन्हें बड़ा सन्तोष था कि इस भोजन से मुझसे से भी अधिक भूखे प्राणियों का निर्वाह हो सकेगा। उन्होंने कमण्डल उठाकर पानी पिया। सन्तोष की साँस ली और वहाँ से उठकर जाने लगे। तभी आवाज सुनाई दी, "वत्स ! तुम कहाँ जा रहे हो ?" भर्तृहरि ने पीछे मुड़ कर देखा। माता पार्वती दर्शन देने के लिए पधारी हैं। माता बोलीं, "मैं तुम्हारी साधना से बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें जो वरदान माँगना हो माँगो।" प्रणाम करते हुए भर्तृहरि ने कहा, "अभी तो अपनी और अपने पति की क्षुधा शान्त करने हेतु मुझसे रोटियाँ माँगकर ले गई थीं। जो स्वयं दूसरों के सम्मुख हाथ फैलाकर अपना पेट भरता है वह क्या दे सकेगा। ऐसे भिखारी से मैं क्या माँगू।" पार्वती जी ने अपना असली स्वरूप दिखाया और कहा, "मैं सर्वशक्तिमती हूँ। तुम्हारी परदुःख कातरता से बहुत प्रसन्न हूँ जो चाहो सो वर माँगो।" भर्तृहरि ने श्रद्धा पूर्वक जगदम्बा के चरणों में सिर झुकाया और कहा, "यदि आप प्रसन्न हैं तो यह वर दें कि जो कुछ मुझे मिले उसे दीन-दुःखियों के लिए लगाता रहूँ और अभावग्रस्त स्थिति में बिना मन को विचलित किये शान्त पूर्वक रह सकूँ।" पार्वती जी 'एवमस्तु' कहकर भगवान् शिव के पास लौट गई। त्रिकालदर्शी शम्भु यह सब देख रहे थे उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "भद्रे ! मेरे भक्त इसलिए दरिद्र नहीं रहते कि उन्हें कुछ मिलता नहीं है। परन्तु भक्ति के साथ जुड़ी उदारता उनसे अधिकाधिक दान कराती रहती हैं और वे खाली हाथ रहकर भी विपुल सम्पत्तिवानों से अधिक सन्तुष्ट बने रहते है।" #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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