neelam singhal
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Radhe radhe #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - काशी में "राम" नाम लेने से, मिलती हैं मुक्ति और वृन्दावन में " राधे" नाम लेने से, भक्ति मिलती हैं II z9 z9 | | काशी में "राम" नाम लेने से, मिलती हैं मुक्ति और वृन्दावन में " राधे" नाम लेने से, भक्ति मिलती हैं II z9 z9 | | - ShareChat
जय श्री कृष्ण 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 फूल के अन्दर जैसे समाएँ खूशबू.. सीप के अन्दर मोती राधा के दिल मैं बस गए जगत के पालनहारी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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💕ईश्वर हमारी पूजा की थाली का मूल्य नहीं 💗हमारी आत्मा की निश्छलता और मन के 💗भाव को समझते है...💗 💕ईश्वर को अंतर्यामी कहा गया इस का सूक्ष्म अर्थ है 💗इंसान के अंदर चलने वाले अच्छे भाव या 💗बुरे भाव वह तुरंत समझ जाते है...💗 💕💗जय श्री राधेकृष्ण जी💗💕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ज़िन्दुगी के हर मोड़ पर मैने उनको अपने पास पाया है, मुसीबतु चाहे जैसी होे, मेरे हमेश हयाथ बढ़ाया है। %47 @ Amandubey Writer ज़िन्दुगी के हर मोड़ पर मैने उनको अपने पास पाया है, मुसीबतु चाहे जैसी होे, मेरे हमेश हयाथ बढ़ाया है। %47 @ Amandubey Writer - ShareChat
*आप का व्यवहार, स्वभाव, समर्पण और विनम्रता तय करती है कि संसार में आप की जंग कौन लड़ेगा.....* *आप स्वयं या आपकी तरफ से संपूर्ण सृष्टि !! *आप का व्यवहार, स्वभाव, समर्पण और विनम्रता तय करती है कि संसार में आप की जंग कौन लड़ेगा.....* #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ೨೦೦ Gupra Guric' எUI5I ೨೦೦ Gupra Guric' எUI5I - ShareChat
꧁ঔৣ🩷 Զเधे Զเधे 🩷ঔৣ꧂ *🌿 श्री कृष्ण कहते हैं 🌿* ✨ "पेड़ पर *फल* तभी आता है..!! जब *मौसम* सही होता है..!! पानी रोज़ डालने से नहीं..!!"* 🌸 📖 *अर्थ:* हर चीज़ का एक निश्चित *समय* होता है..!! मेहनत के साथ *प्रतीक्षा* अनिवार्य है..!! *--------------------------------* 🌸🩷*।। श्री कृष्णार्पणमस्तु ।।* 🩷🌸 🌸*हे मेरे नाथ! मैं आपको भूलूँ नहीं!*🌸 🌸🩷*।। श्री कृष्णार्पणमस्तु ।।* .:⁠-💲❤️🙏💐😇🦚🌞🩷🌸 राधे राधे, श्याम मिला दे.:-$ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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प्रभु हम पे कृपा करना प्रभु हम पे दया करना वैकुण्ठ तो यहीं हैं हृदय में रहा करना प्रभु जी!! #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - जिब इनकी भर्जी का होगा तो चो सब भी होगा जो कभी सौचा भी नहीं होगा @ जिब इनकी भर्जी का होगा तो चो सब भी होगा जो कभी सौचा भी नहीं होगा @ - ShareChat
अगर ब्रह्म मुहूर्त में उठ गए है तो बोलिए मेरे साथ राधा रमन लाल की जय ll खस की कुटिया ll राधे राधे 🙏🙏 #radharaman vrindavan #mandir #darshan #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - जीवन के सबसे घने अंधेरे में அq$ रास्ता नहीं सूझता , तब इस पवित्र 3ঙ্খিক মাম ম राधा नाम की रोशनी মুহিকল কী { आसान कर देती है। राधे-राधे जीवन के सबसे घने अंधेरे में அq$ रास्ता नहीं सूझता , तब इस पवित्र 3ঙ্খিক মাম ম राधा नाम की रोशनी মুহিকল কী { आसान कर देती है। राधे-राधे - ShareChat
Radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe radhe #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - दर्शन कैसे करें ? हम लोगों को दर्शन करना नहीं आता हम मन्दिर में जाकर कहते   हैं- वाह बड़ी अच्छी ! मार्बल की भूर्ति है, सोने चाँदी की मूर्ति है, काश की भूर्ति है।ं वहाँ जाकर भगवान् का दर्शन करना चाहिए न की जड़ वस्तुओं का। सस्ते में जो नहीं देखना चाहिए, वो तो देखते चले जाते हैं। के गुणदोष और भगवान् के दूसरों বৃ্ি सामने प्रेमपूर्वक दर्शन करके करना चाहिए तो को कृतार्थ आँख मूँद के खड़े हो जाते हैं। यथा है ! कितनी सुन्दर झाँकी है, फिर भी आँख मुंदकर खड़े हैं। आँख दुर्भाव मूंदकर खहे हैं तो वी भी किसी निस्काम भाव से प्रार्थना करने नहीं वल्कि- है भगवन ! वहाँ से चलकर हम यहाँ तक आए हैं। हमें अमुक- की आवश्व्कता है, आप ये दे दीजिये, ये दे दीजिये।' बस बस्तुओं अमुक पूरी जिस्ट बाँचकर सुनाई , फिर प्रणाम किया और चले आए। फिर दुबारा मुड़कर देखा ही नहीं। ये दर्शन दत्तचित्त नहीं है। निहारो, ठाकुरजी को निहारो। चरण से लेकर मुख पर्यन्त और मुख से लेकर घरण पर्यन्त। बार बार छवि को निहारो। जरुरी नहीं की १० -२० मन्दिरों में जाए॰ एक जगह दर्शन करो लेकिन निहारो और जब प्रेमपूर्वक ठाकुरजी को आप निहारने लग जायेंगे तो मन्दिरों में ही नहीं ठाकुरजी में ही आपको विविध आप के घर के होने लगेंगी। अनुभूतियों कभी लगेगा हमारे ठाकुरजी आज थोड़े गंभीर हैं , कभी लगेगा आज थोड़े अगमने से हैं॰ कभी लगेगा नजर से नजर तो मिलती है लेकिन ये शरमा हैं। और फिर तन्मयता बढ़ेगी तो वे बातचीत भी करने लगेंगे। Pxactind ( ' राधे राधे pradintgyan proalptgyon.com दर्शन कैसे करें ? हम लोगों को दर्शन करना नहीं आता हम मन्दिर में जाकर कहते   हैं- वाह बड़ी अच्छी ! मार्बल की भूर्ति है, सोने चाँदी की मूर्ति है, काश की भूर्ति है।ं वहाँ जाकर भगवान् का दर्शन करना चाहिए न की जड़ वस्तुओं का। सस्ते में जो नहीं देखना चाहिए, वो तो देखते चले जाते हैं। के गुणदोष और भगवान् के दूसरों বৃ্ি सामने प्रेमपूर्वक दर्शन करके करना चाहिए तो को कृतार्थ आँख मूँद के खड़े हो जाते हैं। यथा है ! कितनी सुन्दर झाँकी है, फिर भी आँख मुंदकर खड़े हैं। आँख दुर्भाव मूंदकर खहे हैं तो वी भी किसी निस्काम भाव से प्रार्थना करने नहीं वल्कि- है भगवन ! वहाँ से चलकर हम यहाँ तक आए हैं। हमें अमुक- की आवश्व्कता है, आप ये दे दीजिये, ये दे दीजिये।' बस बस्तुओं अमुक पूरी जिस्ट बाँचकर सुनाई , फिर प्रणाम किया और चले आए। फिर दुबारा मुड़कर देखा ही नहीं। ये दर्शन दत्तचित्त नहीं है। निहारो, ठाकुरजी को निहारो। चरण से लेकर मुख पर्यन्त और मुख से लेकर घरण पर्यन्त। बार बार छवि को निहारो। जरुरी नहीं की १० -२० मन्दिरों में जाए॰ एक जगह दर्शन करो लेकिन निहारो और जब प्रेमपूर्वक ठाकुरजी को आप निहारने लग जायेंगे तो मन्दिरों में ही नहीं ठाकुरजी में ही आपको विविध आप के घर के होने लगेंगी। अनुभूतियों कभी लगेगा हमारे ठाकुरजी आज थोड़े गंभीर हैं , कभी लगेगा आज थोड़े अगमने से हैं॰ कभी लगेगा नजर से नजर तो मिलती है लेकिन ये शरमा हैं। और फिर तन्मयता बढ़ेगी तो वे बातचीत भी करने लगेंगे। Pxactind ( ' राधे राधे pradintgyan proalptgyon.com - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - श्मशान घाट में पीछे मुडकर क्यों नहीं afe! १. अंतिम संस्कार के बाद भले ही शरीर जलकर भस्म हो जाता है, लेकिन आत्मा का अस्तित्व वहीं रहता है। गरुड़ पुराण के अनुसार , परिजनों के साथ- साथ आत्मा ' खुद' भी अपने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाएं देखती है। पुराण में बताया गया है कि मृतक का अपने परिजनों २. गरुड़ के साथ मोह रहता है और इसी मोह से ग्रस्त होकर मृतक की आत्मा परिजनों के आसपास भटकती रहती है। यदि मोह का बंधन नहीं टूटा तो आत्मा परलोक गमन नहीं कर पाएगी।  इसलिए ऐसी स्थिति में मोह का टूटना जरूरी होता है। ३. अगर परिजन अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे तो आत्मा को ऐसा प्रतीत होगा कि अब उसका इस लोक में समय पूरा हो गया और वह दूसरे लोक में चली जाएगी। # हे प्रभु उसकी रातों रात किस्मत चमक जाए जो कमेंट में हर বং সঙ্কানন লিষ্ট্ II श्मशान घाट में पीछे मुडकर क्यों नहीं afe! १. अंतिम संस्कार के बाद भले ही शरीर जलकर भस्म हो जाता है, लेकिन आत्मा का अस्तित्व वहीं रहता है। गरुड़ पुराण के अनुसार , परिजनों के साथ- साथ आत्मा ' खुद' भी अपने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाएं देखती है। पुराण में बताया गया है कि मृतक का अपने परिजनों २. गरुड़ के साथ मोह रहता है और इसी मोह से ग्रस्त होकर मृतक की आत्मा परिजनों के आसपास भटकती रहती है। यदि मोह का बंधन नहीं टूटा तो आत्मा परलोक गमन नहीं कर पाएगी।  इसलिए ऐसी स्थिति में मोह का टूटना जरूरी होता है। ३. अगर परिजन अंतिम संस्कार के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे तो आत्मा को ऐसा प्रतीत होगा कि अब उसका इस लोक में समय पूरा हो गया और वह दूसरे लोक में चली जाएगी। # हे प्रभु उसकी रातों रात किस्मत चमक जाए जो कमेंट में हर বং সঙ্কানন লিষ্ট্ II - ShareChat