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#भगवत गीता #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓
भगवत गीता - संपदा वालों के लक्षण और उनकी अधोगति का कथना आसुरी : द्वौ भृतसर्गौ लोकडस्मिन्दैव आसर एव च। में श्रृणुण दैवाो विस्तरशः प्रोक्त आसर पाथो हे अर्जुन! इस् लोक म्ें भूरतोंकी सृष्टि यानी मनृष्य समूदॉय दो ही प्रकार का है॰ एकॅतो दैवी प्रकृति वाला और द्रूसरा आसुरी प्रकृति वाला। उनमें से दैवी प्रकृति चाला तो विस्तारपूर्वक कहॉ गया , अबॅ न ऑसरी प्रकृति चाले मनुष्य समुदायको भी विस्तारपूर्वक मुझसेसुन Il व्यख्यः हे अर्जुन! इस संसार में मनुष्योकि दो प्रमख प्रकार होते हैंः यलोगउच्च आत्मा औरनैतिकता कगुजस परिपूर्ण दैवी स्वभावचाले నైసౌసే] आसुरी स्वभाव वाले - ये लोग अरधर्म और आसुरी प्रवृत्तियों से प्रभावित् होते हैंl भगवान कृष्ण यहाँ अर्जुन को समझा रहे हैं कि पहले दैवी स्वभाव वाले लोगोंकि लक्षण और ्उनकणुण विस्तार से बताएजा चुकेहै। अबच स्वभाव चालेलोगोंकी विशेषताओं औरउनकी अधोगति uId कुदृष्टि विस्तार से समझाएंगेा ಈ इस श्लोक के माध्यम से भगवान कृष्ण अर्जुन का सूचित कर रहे हैं कि एक व्यक्ति का स्वभाव और उसकी प्रवृत्तियाँ उिँसे ऊँचाई या नीचाईकी ओरल आसुरी जाती है। दैवी स्वभाव सेव्यक्ति उन्नतिकी ओर बढता है जबकि स्वभाव से व्यक्ति पतन को ओर जाता हैl भगवान कृष्ण ने इस श्लोक में आसूरी स्वभाव वाले व्यक्तियों इस प्रकार की विशेषताओंको जॉननेकी आवश्यकता की ॅओर इशारा किया ह ताकि अर्जुन और अन्य लोग भी यह समझ सकें किचे किन गुर्णों को अपनाएँ और किनसे बचेl संपदा वालों के लक्षण और उनकी अधोगति का कथना आसुरी : द्वौ भृतसर्गौ लोकडस्मिन्दैव आसर एव च। में श्रृणुण दैवाो विस्तरशः प्रोक्त आसर पाथो हे अर्जुन! इस् लोक म्ें भूरतोंकी सृष्टि यानी मनृष्य समूदॉय दो ही प्रकार का है॰ एकॅतो दैवी प्रकृति वाला और द्रूसरा आसुरी प्रकृति वाला। उनमें से दैवी प्रकृति चाला तो विस्तारपूर्वक कहॉ गया , अबॅ न ऑसरी प्रकृति चाले मनुष्य समुदायको भी विस्तारपूर्वक मुझसेसुन Il व्यख्यः हे अर्जुन! इस संसार में मनुष्योकि दो प्रमख प्रकार होते हैंः यलोगउच्च आत्मा औरनैतिकता कगुजस परिपूर्ण दैवी स्वभावचाले నైసౌసే] आसुरी स्वभाव वाले - ये लोग अरधर्म और आसुरी प्रवृत्तियों से प्रभावित् होते हैंl भगवान कृष्ण यहाँ अर्जुन को समझा रहे हैं कि पहले दैवी स्वभाव वाले लोगोंकि लक्षण और ्उनकणुण विस्तार से बताएजा चुकेहै। अबच स्वभाव चालेलोगोंकी विशेषताओं औरउनकी अधोगति uId कुदृष्टि विस्तार से समझाएंगेा ಈ इस श्लोक के माध्यम से भगवान कृष्ण अर्जुन का सूचित कर रहे हैं कि एक व्यक्ति का स्वभाव और उसकी प्रवृत्तियाँ उिँसे ऊँचाई या नीचाईकी ओरल आसुरी जाती है। दैवी स्वभाव सेव्यक्ति उन्नतिकी ओर बढता है जबकि स्वभाव से व्यक्ति पतन को ओर जाता हैl भगवान कृष्ण ने इस श्लोक में आसूरी स्वभाव वाले व्यक्तियों इस प्रकार की विशेषताओंको जॉननेकी आवश्यकता की ॅओर इशारा किया ह ताकि अर्जुन और अन्य लोग भी यह समझ सकें किचे किन गुर्णों को अपनाएँ और किनसे बचेl - ShareChat