#सत भक्ति संदेश
गरीब, तन मन सेती दूर है, मांहे मंझ मिलाप।
तरबर छाया विरछ में, है सो आपे आप।।
सरलार्थ:- वह परमेश्वर दूर सतलोक में है जिसे स्थूल शरीर तथा मन की कल्पनाओं
से नहीं देख सकते। वैसे उस प्रभु का प्रभाव शरीर में भी है। इस प्रकार जीव से मिला भी है।


