"वक़्त"
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महकेगी ये गुलसन ऐसे,
कली के खिल जाने के बाद।
जैसे रोशनी बिखरती है,
किरण के आजाने के बाद।
बिसरेंगी नही ये आँखे,
हँसी के छाजाने के बाद।
छलकेंगे जाम नजरों से,
दिल से दिल मिलाने के बाद।
रंगीन होंगे दिन और रात,
साथ-साथ बिताने के बाद।
बरसेंगी फूलझरी खुशियों की,
संगी संग दिल लगाने के बाद।
हक है मेरा तुझे पे अपनापन का,
थोड़ा-थोड़ा छेड़ लेने दे आज।
गुलजार होंगे फिर ये वक्त भी,
तुम्हारे.........मुस्कुराने के बाद।L 💕💞
........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #🌹प्यार के नगमे💖 #🥰लव शायरी😘 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️


