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दोहा #संतो की रचनायें रहीम
संतो की रचनायें - মীমা रहिमन गली है साँकरी, दूजो : না ठहराहिं| आपु अहै तो हरि नहीं , हरि तो आपुन aIl भावार्थः रहीम कहते हैं कि(मन की) गली संकरी है, उसमें एक साथ दो जने नहीं गुज़र सकते? यदि वहाँ तुम यानी तुम्हारा अहंकार है तो परमात्मा के लिए वहाँ कोई ठौर नहीं और अगर वहाँ परमात्मा का निवास है तो अहंकार का क्या काम! यानी मन ही वह प्रेम की गली है, जहां अहंकार और भगवान एक साथ नहीं गुज़र सकते, एक साथ नहीं रह सकते। रहीम Motivational Videos App Want . মীমা रहिमन गली है साँकरी, दूजो : না ठहराहिं| आपु अहै तो हरि नहीं , हरि तो आपुन aIl भावार्थः रहीम कहते हैं कि(मन की) गली संकरी है, उसमें एक साथ दो जने नहीं गुज़र सकते? यदि वहाँ तुम यानी तुम्हारा अहंकार है तो परमात्मा के लिए वहाँ कोई ठौर नहीं और अगर वहाँ परमात्मा का निवास है तो अहंकार का क्या काम! यानी मन ही वह प्रेम की गली है, जहां अहंकार और भगवान एक साथ नहीं गुज़र सकते, एक साथ नहीं रह सकते। रहीम Motivational Videos App Want . - ShareChat