भगवान श्री गणेश की पूजा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इसीलिए किसी भी शुभ काम से पहले भगवान श्री गणेश की सर्वप्रथम पूजा की जाती है इसके बाद ही कोई भी शुभ काम शुरू किया जाता है. प्रत्येक 3 सालों में एक बार आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने से भगवान श्री गणेश प्रसन्न होते हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक महीने में दो बार चतुर्थी तिथि पड़ती है. एक कृष्ण पक्ष में तो दूसरी शुक्ल पक्ष में आती है. लेकिन विभुवन संकष्टी का व्रत 3 वर्ष में एक बार आता है. मान्यता है कि विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर विधि विधान से पूजा पाठ करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं, और अपने भक्तों को विद्या धन के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करते हैं। विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश की पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख शांति का आगमन होता है। यदि नारद पुराण में इस कथा का वर्णन किया गया है। इस पुराण में यह बताया गया है कि किस विधि से संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाना चाहिए और इस व्रत के दौरान किस कथा को पढ़ना या सुनना चाहिए। विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा कुछ इस प्रकार है कि प्राचीन काल में जब पांडव द्रौपदी के साथ जंगलों में रहने को मजबूर थे। उस समय उन्होंने महर्षि वेदव्यास से यह प्रश्न किया कि प्रभु हमारे दुखों का अंत कैसे होगा? इतने अधिक समय से हम पांचों पांडव और हमारी अर्धांगिनी द्रौपदी दुख भोगते आ रहे हैं। अब इन कष्टों भरे जीवन से हमें उबारने के लिए कोई रास्ता बताएं।
इस पर महर्षि वेदव्यास ने यह उत्तर दिया कि अधिक मास में आने वाले विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत को परम पावन माना जाता है। कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती हैं। यह व्रत विभुवन पालक भगवान गणेश को समर्पित हैं। जो व्यक्ति इस दिन भगवान गणेश की आराधना करता है उसके सभी दुख दूर होते हैं। इसलिए आप सभी यह व्रत कीजिए। वेदव्यास जी के कहने पर पांडवों ने द्रौपदी समेत यह व्रत किया और उन्हें सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति मिली।
#शुभ कामनाएँ 🙏


