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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - Shantikunj WhatsApp 8439014110 लिंची दार्शनिक चीन ಹ چ प्रसिद्ध कन्फ्यूशियस समकालीन थे और उनके सम्मान के पात्र भी।वे सदा कहा करते थे सिर्फ लिंची कीं प्रार्थनाएँ सुनता है। कौतूहलंवश कि भगवान कन्फ्यूशियस का एक शिष्य लिंची से मिलने पहुँचा । उसने लिंची से उनकी दिनचर्या के विषय में पूछा लिंची हँसे और बोले- मैं किसान हूँ ।दिन खेत में गुजर जाता है।जब भूख लगती है, साथारण खा लेता हूँ ।जब नींद आती है तो सो जाता हूँ । भगवान की अलग से प्रार्थना क्या करनीं - यह सब तो उसी का है , उसी को अर्पित है। शिष्य यह सुन कर बड़ा निराश हुआ " उसने यह घटना कन्फ्यूशियस को सुनाई। कन्फ्यूशियस बोले- वत्स! जिसका जीवन ही भगवान की प्रार्थना बन गया हो, उसे अलग से आडंबर करने की क्या आवश्यकता है। सच्चा भक्त परमात्मा को अंतरात्मा से पुकारता है, बाहर के साधनों से नहीं |शिष्य की समझ में आ गया कि भक्ति का मर्म अंतर्मन की सच्ची पुकार में है, बाह्य कलेवरों में 767/ Youlube Shantikunj Rishi Chintan  Shantikunj WhatsApp 8439014110 लिंची दार्शनिक चीन ಹ چ प्रसिद्ध कन्फ्यूशियस समकालीन थे और उनके सम्मान के पात्र भी।वे सदा कहा करते थे सिर्फ लिंची कीं प्रार्थनाएँ सुनता है। कौतूहलंवश कि भगवान कन्फ्यूशियस का एक शिष्य लिंची से मिलने पहुँचा । उसने लिंची से उनकी दिनचर्या के विषय में पूछा लिंची हँसे और बोले- मैं किसान हूँ ।दिन खेत में गुजर जाता है।जब भूख लगती है, साथारण खा लेता हूँ ।जब नींद आती है तो सो जाता हूँ । भगवान की अलग से प्रार्थना क्या करनीं - यह सब तो उसी का है , उसी को अर्पित है। शिष्य यह सुन कर बड़ा निराश हुआ " उसने यह घटना कन्फ्यूशियस को सुनाई। कन्फ्यूशियस बोले- वत्स! जिसका जीवन ही भगवान की प्रार्थना बन गया हो, उसे अलग से आडंबर करने की क्या आवश्यकता है। सच्चा भक्त परमात्मा को अंतरात्मा से पुकारता है, बाहर के साधनों से नहीं |शिष्य की समझ में आ गया कि भक्ति का मर्म अंतर्मन की सच्ची पुकार में है, बाह्य कलेवरों में 767/ Youlube Shantikunj Rishi Chintan - ShareChat