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॥ विजयते् श्रीबालकृष्ण प्रभु॥
सदा शान्त रहें, निर्विकार रहें,
सम रहने की चेष्टा करें।
जगत के खेल से अपने आपको प्रभावित न होने दें
खेल को खेल ही समझे।
फिर जीवन में और कुछ बढ़ाने की इच्छा होगी और न घटने पर उसका दुःख हो होगा।
खेलाडुवृत्ति जीवन की समता को टिकाए रखती हैं।
जय हो प्रभु....
#राधे राधे
*रसिया कों नार बनाओ री रसिया कों*
_*कटि लंहगा गल माल कंचुकी,*_
_*वाकों चुनरी शीश उढ़ाओ* *री, रसिया कों।।*_
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