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​खुद को ढूँढने की बस जद्दोजहद में हूँ, कमाल ये है कि अब भी अपनी हद में हूँ। ​सँभालनी है तो सँभालो तुम अपनी हुकूमत, मैं मुसाफिर हूँ, सिर्फ रास्तों की जद में हूँ। ​कोई ज़ंजीर मुझे बांध कर क्या रखेगी, मैं परिंदा हूँ, कहाँ सरहद में हूँ। ​वो समझते हैं कि मैं हार के चुप बैठा हूँ, मैं तो बस अपनी ही एक ज़िद में हूँ। ​वो जानते हैं कि मैं चीज़ क्या हूँ, भले खाक पर हूँ, मगर मसनद में हूँ। ​रिहाई की तमन्ना अब किसे है 'मुसाफिर', मैं सदियों से ही अपनी ज़ात की क़ैद में हूँ। #✨हमार विचार #✒️दर्द भरल शायरी स्टेटस #📖 शायरी स्टेटस #✒ शायरी #💌शायरी के डायरी📚
✨हमार विचार - ढूँढने की बस जद्दोजहद में हूँ खूद को कमाल ये है कि अब भी अपनी हद में हूँl सँभालनी है तो सँभालो तुम अपनी हुकूमत, मैं मुसाफिर हूँ सिर्फ रास्तों की जद में हूँl कोई ज़ंजीर मुझे बांध कर क्या रखेगी, मैं परिदा हूँ कहाँ सरहद में हूँl मैं हार के चुप बैठा हूँ वो समझते हैं कि मैं तो बस अपनी ही एक ज़िद में हूँl वो जानते हैं कि मैं चीज़ क्या हूँ ৪ুঁ সঠাং সমন@ ম ৪ুঁ भले खाक पर रिहाईकी तमन्ना अब किसे है 'मुसाफिर मैं सदियों से ही अपनी ज़ात की क़ैद में हूँ Manoj musafir ढूँढने की बस जद्दोजहद में हूँ खूद को कमाल ये है कि अब भी अपनी हद में हूँl सँभालनी है तो सँभालो तुम अपनी हुकूमत, मैं मुसाफिर हूँ सिर्फ रास्तों की जद में हूँl कोई ज़ंजीर मुझे बांध कर क्या रखेगी, मैं परिदा हूँ कहाँ सरहद में हूँl मैं हार के चुप बैठा हूँ वो समझते हैं कि मैं तो बस अपनी ही एक ज़िद में हूँl वो जानते हैं कि मैं चीज़ क्या हूँ ৪ুঁ সঠাং সমন@ ম ৪ুঁ भले खाक पर रिहाईकी तमन्ना अब किसे है 'मुसाफिर मैं सदियों से ही अपनी ज़ात की क़ैद में हूँ Manoj musafir - ShareChat