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#sad life #poems #poetry #feeling ##️⃣DilShayarana💘
sad life - "पराया धन" कितना छोटा सा शब्द समेटे हुए।  और कितनी बड़ी बेगानगी जिस घर में पहली बार चलना सीखा, जहाँ दीवारों पर बचपन टंगा থা  কীনী থী - से सुबह  जहाँ माँ की आवाज़़ उसी घर से एक दिन कहा जाता है, "ये घर तेरा नहीं रहेगा। " अब फिर एक अनजाने घर में भेज दिया जाता है, जहाँ अपनापन कमाया जाता है, जैसे प्यार नहीं, कोई परीक्षा हो। और इस सबके बीच एक लड़की धीरे-धीरे सीख जाती है कि उसे हर जगह रहना है... पर कहीं पूरी तरह ठहरना नहीं है। "ना घर की॰ ना घाट की" सिर्फ मुहावरा नहीं, कई औरतों की उम्र भर की थकान है। लेकिन सच यह भी है - इंसान कोई " धन " नहीं होता जिसे एक घर से दूसरे घर भेज दिया जाए।  एक लड़की भी घर होती है। उसके होने से जगहें घर बनती हैं। वह खुद बेघर नहीं होती।  शायद एक दिन लड़कियों से यह कहना बंद होगा कि तुम पराई हो।" और तब वे पहली बार किसी चौखट के बीच नहीं, अपने ही अस्तित्व में घर महसूस करेंगी। "पराया धन" कितना छोटा सा शब्द समेटे हुए।  और कितनी बड़ी बेगानगी जिस घर में पहली बार चलना सीखा, जहाँ दीवारों पर बचपन टंगा থা  কীনী থী - से सुबह  जहाँ माँ की आवाज़़ उसी घर से एक दिन कहा जाता है, "ये घर तेरा नहीं रहेगा। " अब फिर एक अनजाने घर में भेज दिया जाता है, जहाँ अपनापन कमाया जाता है, जैसे प्यार नहीं, कोई परीक्षा हो। और इस सबके बीच एक लड़की धीरे-धीरे सीख जाती है कि उसे हर जगह रहना है... पर कहीं पूरी तरह ठहरना नहीं है। "ना घर की॰ ना घाट की" सिर्फ मुहावरा नहीं, कई औरतों की उम्र भर की थकान है। लेकिन सच यह भी है - इंसान कोई " धन " नहीं होता जिसे एक घर से दूसरे घर भेज दिया जाए।  एक लड़की भी घर होती है। उसके होने से जगहें घर बनती हैं। वह खुद बेघर नहीं होती।  शायद एक दिन लड़कियों से यह कहना बंद होगा कि तुम पराई हो।" और तब वे पहली बार किसी चौखट के बीच नहीं, अपने ही अस्तित्व में घर महसूस करेंगी। - ShareChat