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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं बारि मथें घृत होइ बरु सिकता ते बरु तेल बिनु हरि भजन न तव तरिअ यह सिद्धांत अपेल जल को मथने से भले ही घी उत्पन्न हो जाए और बालू को पेरने से भले ही तेल निकल आवे, परंतु श्री हरि के भजन बिना संसार रूपी समुद्र से नहीं तरा जा सकता, यह सिद्धांत अटल है॰तुलसीदास जी कहते लिए हैं कि संसार में असंभव बातें भी एक बार के संभव हो सकती हैं, लेकिन ईश्वर की भक्ति के बिना मोक्ष प्राप्त करना या सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाना पूरी तरह असंभव है हरि शरणं बारि मथें घृत होइ बरु सिकता ते बरु तेल बिनु हरि भजन न तव तरिअ यह सिद्धांत अपेल जल को मथने से भले ही घी उत्पन्न हो जाए और बालू को पेरने से भले ही तेल निकल आवे, परंतु श्री हरि के भजन बिना संसार रूपी समुद्र से नहीं तरा जा सकता, यह सिद्धांत अटल है॰तुलसीदास जी कहते लिए हैं कि संसार में असंभव बातें भी एक बार के संभव हो सकती हैं, लेकिन ईश्वर की भक्ति के बिना मोक्ष प्राप्त करना या सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाना पूरी तरह असंभव है - ShareChat