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#पूजन विधि
पूजन विधि - विभुवन  संकष्टी चतुर्थी 2026 विभुवन हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार अधिक मास् के कृष्ण पक्ष की संकष्टी को विभुवन संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। अधिक मास में आने के कारण माना जाता है क्योंकि यह प्रत्येक ढाई वर्ष के संकष्टी को अत्यन्त दुर्लभ विभुवन  संकष्टी किसी भी चन्द्र माह में पड़ सकती है अतः সানী ৯ ওপযান इसके लिये कोई निश्चित माह निर्धारित नहीं है। किन्तु माह के परिवर्तित होने से इसके नाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, अतः किसी भी माह में अधिक विभुवन  पडने पर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी के रूप में ही मनाया मास जाता है। विभुवन  इस दिन भगवान गणपति के गणेश रूप की आराधना की जाती है। विभुवन  अर्थ 'तीनों लोकों में विद्यमान' अथवा 'तीनों लोकों को प्रकाशित বরা विभुवन " गणेश कर अभिप्राय है, तीनों लोकों में करने वाले होता है। अतः विद्यमान रहने वाले भगवान गणेश। विभुवन  संकष्टी के दिन व्रत एवं पूजन का विधान अन्य संकष्टी व्रतों हालाँकि के समान ही है, किन्तु इस दिन विशेष रूप से भगवान गणेश को नारियल के लड्डुओं : का भोग लगाया जाता है। अधिक मास होने के कारण इस दिन किये गये जप, तप, पूजन तथा व्रत आदि का सामान्य संकष्टी के व्रत् की तुलना में अनेक गुणा फल प्राप्त होता है। यह उत्तम व्रत सभी मनोरथ पूर्ण करने तथा समस्त कष्टों का निवारण करने वाला है। विभुवन  संकष्टी चतुर्थी 2026 विभुवन हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार अधिक मास् के कृष्ण पक्ष की संकष्टी को विभुवन संकष्टी के रूप में मनाया जाता है। अधिक मास में आने के कारण माना जाता है क्योंकि यह प्रत्येक ढाई वर्ष के संकष्टी को अत्यन्त दुर्लभ विभुवन  संकष्टी किसी भी चन्द्र माह में पड़ सकती है अतः সানী ৯ ওপযান इसके लिये कोई निश्चित माह निर्धारित नहीं है। किन्तु माह के परिवर्तित होने से इसके नाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, अतः किसी भी माह में अधिक विभुवन  पडने पर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी के रूप में ही मनाया मास जाता है। विभुवन  इस दिन भगवान गणपति के गणेश रूप की आराधना की जाती है। विभुवन  अर्थ 'तीनों लोकों में विद्यमान' अथवा 'तीनों लोकों को प्रकाशित বরা विभुवन " गणेश कर अभिप्राय है, तीनों लोकों में करने वाले होता है। अतः विद्यमान रहने वाले भगवान गणेश। विभुवन  संकष्टी के दिन व्रत एवं पूजन का विधान अन्य संकष्टी व्रतों हालाँकि के समान ही है, किन्तु इस दिन विशेष रूप से भगवान गणेश को नारियल के लड्डुओं : का भोग लगाया जाता है। अधिक मास होने के कारण इस दिन किये गये जप, तप, पूजन तथा व्रत आदि का सामान्य संकष्टी के व्रत् की तुलना में अनेक गुणा फल प्राप्त होता है। यह उत्तम व्रत सभी मनोरथ पूर्ण करने तथा समस्त कष्टों का निवारण करने वाला है। - ShareChat