ShareChat
click to see wallet page
search
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - देदा देै लैदै थिकि पाहिय जुगा जुगंतरिद्खाही खाहि।। ఇ अर्थः परमात्मा इतना दयालु है कि वह निरंतर सबको HT देता ही रहता है, लेकिन लेने वाले जीव लेते्लेते थक जाते हैं। उसकी बख्शिशों का कोई अंत नहीं है, पर लगे मनुष्य की ग्रहण करने की क्षमता सीमित है। युगों युगों से जीव उसके दिए हुए पदार्थों और तेरा आशीर्वादों का उपभोग कर रहे हैं। उसके भंडार कभी खत्म नहीं होता; वह अनंत काल से सबको पाल रहा भाणा है और आगे भी पालता रहेगा। श्री गुरु नानक देव जी इन पंक्तियों के माध्यम से हमें यह समझाते हैं मनुष्य माँगते माँगते थक सकते हैं, लेकिन वह देते हुए कभी नहीं थकता। मनुष्य को यह अहसास होना चाहिए कि वह जो कुछ भी खा रहा है या भोग रहा है, वह उसी अकाल पुरख की कृपा है। देदा देै लैदै थिकि पाहिय जुगा जुगंतरिद्खाही खाहि।। ఇ अर्थः परमात्मा इतना दयालु है कि वह निरंतर सबको HT देता ही रहता है, लेकिन लेने वाले जीव लेते्लेते थक जाते हैं। उसकी बख्शिशों का कोई अंत नहीं है, पर लगे मनुष्य की ग्रहण करने की क्षमता सीमित है। युगों युगों से जीव उसके दिए हुए पदार्थों और तेरा आशीर्वादों का उपभोग कर रहे हैं। उसके भंडार कभी खत्म नहीं होता; वह अनंत काल से सबको पाल रहा भाणा है और आगे भी पालता रहेगा। श्री गुरु नानक देव जी इन पंक्तियों के माध्यम से हमें यह समझाते हैं मनुष्य माँगते माँगते थक सकते हैं, लेकिन वह देते हुए कभी नहीं थकता। मनुष्य को यह अहसास होना चाहिए कि वह जो कुछ भी खा रहा है या भोग रहा है, वह उसी अकाल पुरख की कृपा है। - ShareChat