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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - किसी परिवर की ओर से प्रियजन के निधन के बाद लिया नेत्रदान का निर्णय लाया किसी के जीवन में उजाला  নিঃবনম্রবাল নিব্রম में जिंदा हैंँवे लोग, जिन्होंने मौत कै बाद भी रोशनी बांटी 8131: जोधपुर  मैं रोज उस अनजान व्यक्ति को आशीर्वाद जिन्हें रोशनी मिली वे ही नहीं उनका पूरा परिवार के्रदान करे वालों का ऋगी है देता हूं जिसकी वजह से आज यह दुनिया देख पा रहा हूं। ऐसे ही भाव उन लोगों के हैं जिनकी आंखों की बाड़मरे निवासी लीलाधर सोनी( ७५ ) ने बीकानेर ( डूंगरगढ़़ निवासी अशोक रोशनी किसी बीमारी, संक्रमण, चोट या गलत उपचार बताया कि गलत उपचार के कारण मेरी आंख (२८ ) ने बताया कि मेरी आंखों में गंभीर के कारण चली गई थी। किसी ने वर्षों अंधेरे में जीवन की रोशनी चली गई थी। करीब डेढ़ साल पहले संक्रमण हो गया था और धीरेन्धीरे रोशनी बिताया, तो किसी की युवावस्था में ही दुनिया धुंधली हो जोधपुर में उनका कानिया प्रत्यारोपण एम्स चली गई। एक साल पहले एम्स जोधपुर में गई। लेकिन किसी परिवार को ओर से अपने प्रियजन हुआ। दायीं आंख में नया कॉर्निया लगाए जाने मेरा कॉर्निया प्रत्यारोपण हुआ। ऑपरेशन के के निधन के बाद लिया गया नेत्रदान का निर्णय इनके के बाद उनकी दुनिया में फिर से उजाला लौट मेरी जिंदगी बदल गई। आज मैं फिर से बाट जीबन में फिर से उजाला लेकर आया। आज ये लोग रूप से देख पा रहा हूं। आया। आज सामान्य अपने परिवार को देख पा रहा और जीपन जा राहा क्ूा नैत रोजहसुबृह सामान्य और दुनिया को देख पा रहे हैं कवल अपने परिवार किसी अनजान व्यकि्त ओर उसके परिवार के उठकर उस बल्क हर दिन उस दाता और उसके परिवार को दुआएं फैसले ने उन्हें नई जिंदगी दी हे।वे हर दिन उस अनजान व्यक्त को आशीर्वाद देता हूं जिसने भी दि रहे हें, जिनके एक फैसले ने उन्हें नई दृष्टि, नया दे रहा हूं॰ जिसकी वजह से दाता को आशीर्वाद सुझे कोर्निया दिया।  4e भगवान आत्मविश्वास और मानो नया जीवन दे दिया। सुंदर दुनिया देख पा रहा हूं। जन्म दिया है। किसी परिवर की ओर से प्रियजन के निधन के बाद लिया नेत्रदान का निर्णय लाया किसी के जीवन में उजाला  নিঃবনম্রবাল নিব্রম में जिंदा हैंँवे लोग, जिन्होंने मौत कै बाद भी रोशनी बांटी 8131: जोधपुर  मैं रोज उस अनजान व्यक्ति को आशीर्वाद जिन्हें रोशनी मिली वे ही नहीं उनका पूरा परिवार के्रदान करे वालों का ऋगी है देता हूं जिसकी वजह से आज यह दुनिया देख पा रहा हूं। ऐसे ही भाव उन लोगों के हैं जिनकी आंखों की बाड़मरे निवासी लीलाधर सोनी( ७५ ) ने बीकानेर ( डूंगरगढ़़ निवासी अशोक रोशनी किसी बीमारी, संक्रमण, चोट या गलत उपचार बताया कि गलत उपचार के कारण मेरी आंख (२८ ) ने बताया कि मेरी आंखों में गंभीर के कारण चली गई थी। किसी ने वर्षों अंधेरे में जीवन की रोशनी चली गई थी। करीब डेढ़ साल पहले संक्रमण हो गया था और धीरेन्धीरे रोशनी बिताया, तो किसी की युवावस्था में ही दुनिया धुंधली हो जोधपुर में उनका कानिया प्रत्यारोपण एम्स चली गई। एक साल पहले एम्स जोधपुर में गई। लेकिन किसी परिवार को ओर से अपने प्रियजन हुआ। दायीं आंख में नया कॉर्निया लगाए जाने मेरा कॉर्निया प्रत्यारोपण हुआ। ऑपरेशन के के निधन के बाद लिया गया नेत्रदान का निर्णय इनके के बाद उनकी दुनिया में फिर से उजाला लौट मेरी जिंदगी बदल गई। आज मैं फिर से बाट जीबन में फिर से उजाला लेकर आया। आज ये लोग रूप से देख पा रहा हूं। आया। आज सामान्य अपने परिवार को देख पा रहा और जीपन जा राहा क्ूा नैत रोजहसुबृह सामान्य और दुनिया को देख पा रहे हैं कवल अपने परिवार किसी अनजान व्यकि्त ओर उसके परिवार के उठकर उस बल्क हर दिन उस दाता और उसके परिवार को दुआएं फैसले ने उन्हें नई जिंदगी दी हे।वे हर दिन उस अनजान व्यक्त को आशीर्वाद देता हूं जिसने भी दि रहे हें, जिनके एक फैसले ने उन्हें नई दृष्टि, नया दे रहा हूं॰ जिसकी वजह से दाता को आशीर्वाद सुझे कोर्निया दिया।  4e भगवान आत्मविश्वास और मानो नया जीवन दे दिया। सुंदर दुनिया देख पा रहा हूं। जन्म दिया है। - ShareChat