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#मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - य एवं वेत्ति पुरुपं प्रकृतिं च ToT: ೧೯ | सर्वथा वर्तमानोउपि न स भूयोउभिजायते ।। सहित प्रकृतिको  इस प्रकार पुरुपको और  गुणोंके जो मनुष्य तत्त्वसे जानता है९ वह सव प्रकारसे कर्तव्यकर्म करता हुआ भी फिर नहों जन्मता II २३ II ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना | अन्ये साइख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे।।  परमात्माको कितने हा मनुप्य तो शुद्ध हुई उस ध्यानके द्वारा हृदयमें देखते हॅ ; अन्य चुद्धिसे सूक्ष्म कितने हो ज्ञानयोगके द्वारा और दूसरे कितने हो कर्मयोगकें द्वारा देखते हैॅ अर्थात् प्राप्त करते हैॅ II २४ II १० दृश्यमात्र सम्पूपं जगत् मायाका कार्यं होनेसे श्वपभंगुर ,  नाशवान जड ओर अनित्य ऐ तथा जोवात्मा नित्य चेतन निर्विकार और अविनाशी एवं शुड बोधस्वरूप सच्चिदानन्दघन परमात्पाका हो मायिक पदार्योके सनातन अंश ऐ इस प्रकार समझकर মম্ূর্ণ  संगका सवंथा त्याग करके परमपुरुषप परमात्मामें हो एकोभावसे नित्य स्थित रहनेका नाम उनको ' तत्वसे जानना ' ४। २. जिसका वणन गीोता अध्याय ६ में श्लोक ११ से ३२ तक  विस्तारपूरवंक किया र। ३. जिसका वणन गोता अध्याय २ में श्लोक ११ से ३० तक विस्तारपूर्वंक किया ऐ। ४. जिसका वणन गोता अध्याय २ मेॅ श्लाक ४० से अथ्याय समाप्तिपर्यंन्त विस्तारपूर्वंक किया रै। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार य एवं वेत्ति पुरुपं प्रकृतिं च ToT: ೧೯ | सर्वथा वर्तमानोउपि न स भूयोउभिजायते ।। सहित प्रकृतिको  इस प्रकार पुरुपको और  गुणोंके जो मनुष्य तत्त्वसे जानता है९ वह सव प्रकारसे कर्तव्यकर्म करता हुआ भी फिर नहों जन्मता II २३ II ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना | अन्ये साइख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे।।  परमात्माको कितने हा मनुप्य तो शुद्ध हुई उस ध्यानके द्वारा हृदयमें देखते हॅ ; अन्य चुद्धिसे सूक्ष्म कितने हो ज्ञानयोगके द्वारा और दूसरे कितने हो कर्मयोगकें द्वारा देखते हैॅ अर्थात् प्राप्त करते हैॅ II २४ II १० दृश्यमात्र सम्पूपं जगत् मायाका कार्यं होनेसे श्वपभंगुर ,  नाशवान जड ओर अनित्य ऐ तथा जोवात्मा नित्य चेतन निर्विकार और अविनाशी एवं शुड बोधस्वरूप सच्चिदानन्दघन परमात्पाका हो मायिक पदार्योके सनातन अंश ऐ इस प्रकार समझकर মম্ূর্ণ  संगका सवंथा त्याग करके परमपुरुषप परमात्मामें हो एकोभावसे नित्य स्थित रहनेका नाम उनको ' तत्वसे जानना ' ४। २. जिसका वणन गीोता अध्याय ६ में श्लोक ११ से ३२ तक  विस्तारपूरवंक किया र। ३. जिसका वणन गोता अध्याय २ में श्लोक ११ से ३० तक विस्तारपूर्वंक किया ऐ। ४. जिसका वणन गोता अध्याय २ मेॅ श्लाक ४० से अथ्याय समाप्तिपर्यंन्त विस्तारपूर्वंक किया रै। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat