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#📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी #✍गुलजारांचे साहित्य
📝कविता / शायरी/ चारोळी - गुलज़ार साहब गलती चाँद की नहीं होती साहब, कि वो रात में निकलता है...! नाराज़गी तो उन आँखों की है, जो हर रोशनी में भी अंधेरा ढूँढ लेती हैं...! गुलज़ार साहब गलती चाँद की नहीं होती साहब, कि वो रात में निकलता है...! नाराज़गी तो उन आँखों की है, जो हर रोशनी में भी अंधेरा ढूँढ लेती हैं...! - ShareChat