Rakesh Kumar Prajapati
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. 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 हिमालय का समर्पण योग भाग ३ 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 ♥️💎*166*💎♥️ *_"मैं उन्हें समझाती हूँ, जीवन में कभी-कभी प्रतिकूल परिस्थितियाँ ही मनुष्य को आगे बढ़ने का उत्साह देती हैं और वैसा ही हो सकता है कि उसके जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियाँ ही उसके जीवन में सहायक सिद्ध हों, उसे कभी प्रतिकूल परिस्थितियों की बातें करते सुना क्या? नहीं! क्योंकि यह निर्णय उसकी आत्मा का निर्णय है। इसीलिए उसकी आत्मा उसे अनुकूल तथा प्रतिकूल सभी परिस्थितियों में खुश रहने की शक्ति देती है। आत्मबल मनुष्य को सहनशील बनाता है। और कभी-कभी तो लगता है, कि वह शरीर से ही समाज में होता है। उसकी आत्मा तो सदैव हिमालय में रहती है। क्योंकि वह यहाँ रहकर भी वहीं की बात करता है। वहीं के विचार उसके मन में आते हैं। यानी उसका चित्त भी वहीं होता है। मनुष्य कहाँ है? किस स्थान पर है? किसके साथ है? इसका कोई अर्थ नहीं है। महत्वपूर्ण है , उसका चित्त कहाँ है? मैंने कई बार यह अनुभव किया है, कि वह यहाँ रहकर भी, यहाँ नहीं होता है। और हिमालय में नहीं होकर भी, हिमालय में ही होता है। उसका चित्त जहाँ होगा , वहाँ से वह ग्रहण करेगा। प्रतिकूल परिस्थितियाँ यहाँ उसके जीवन में होंगी। लेकिन वह यहाँ प्रतिकूल परिस्थितियों में होगा, तो ही वह प्रतिकूल परिस्थिति है, यह समझेगा।अगर प्रतिकुल परिस्थितियों में भी वह यहाँ है ही नहीं, तो नहीं समझेगा। सबसे महत्वपूर्ण है , कि उसका चित्त कहाँ है? मुझे नहीं लगता है कि वह कभी भी यहाँ होने पर यहाँ रहता है। "_* ♥️💎♥️ *_एक दिन शाम के समय हम सभी घर पर बातें करते बैठे थे, तो मेरे पिताजी हमारे साथ बैठे। सामान्यतः उन्हें साथ बैठकर बातें करने की ज्यादा आदत नहीं थी। वे पता नहीं , एक जगह स्थिर कभी नहीं रहते थे। सदैव कुछ-न-कुछ, भागदौड़ में, बाहर के कामों में, लगे रहते थे। उस दिन भी उन्हें कुछ सामान लेने बाज़ार जाना था, लेकिन पता नहीं दोपहर की चाय के बाद वे साथ बैठ गए। वे बैठे तो उन्होंने बड़ी जिज्ञासावश पूछा, "तू हिमालय जाता है, तो किस रास्ते से जाता है? किस प्रकार से जाता है? क्योंकि उस एरिया (क्षेत्र )में मैं कभी गया ही नहीं हूँ। और मुझे उस भाग की कोई जानकारी ही नहीं है। मैं केवल इलाहाबाद तक ही गया हूँ। वहाँ पर आखिरी रेल्वे स्टेशन (रेल स्थानक ) कौन सा है? रेल्वे कहाँ तक है रेल्वे (रेल विभाग )में होने के कारण उन्हें रेल्वे की गतिविधियों से बड़ा प्रेम था और निवृत्त होने के बाद भी एक दो घंटे स्टेशन पर अवश्य जाकर बैठते थे। रेलगाड़ी की सीटी व रेलगाड़ी की आवाज उनके जीवन का एक हिस्सा ही हो गए थे। वे ऐसे स्थान पर रहना पसंद नहीं करते जहाँ रेल्वे ही नहीं हो।_* ♥️💎♥️ *_मैंने कहा, "मैं ऐसे स्थान पर रहता हूँ , जहाँ रेल्वे ही नहीं है। मैं जाता रेल्वे (रेलगाड़ी )से ही हूँ। रेल्वे से गुवाहाटी जाता हूँ। उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद, असम प्रारंभ हो जाता है। इसका आखिरी रेल्वे स्टेशन गुवाहाटी है। वह एरिया (क्षेत्र ) सेवन सिस्टर्स , सात बहनें कहलाता है। असम, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर ऐसे छोटे-छोटे राज्य हैं , जो सात हैं, इसलिए वे सेवन सिस्टर्स कहलाते हैं। उन राज्यों की स्थिति शरीर के सिर जैसी ही है। और इन सबकी गर्दन की जगह भी है। एक स्टेशन आता है, कूचबिहार , वहाँ पर भी थोड़ा अशांति का वातावरण होता है। वहाँ पर रात्रि के समय मैंने ट्रेन (पास ) गुजरती नहीं है।अगर शाम के चार बज गए, तो दूसरे दिन सुबह होने तक वह ट्रेन वहीं खड़ी रहती है। इसलिए खड़ी रहती है , क्योंकि वह इलाका उग्रवादियों का गढ़ है। वह एक स्थान ऐसा स्थान है, कि वहाँ से ऊपर की ओर भागने पर भूटान में जाया जा सकता है, और नीचे की ओर भागने पर बांग्लादेश में जाया जा सकता है। "_* ♥️♥️💎💎♥️♥️ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🧘‍♂️मेडिटेशन मंत्र
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