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रुबाई उमर खय्याम #सूफी काव्य #सूफी काव्य
सूफी काव्य - "रुबाई" गर राहरवी रह बरत ब-कुशायंद वर नीस्त शवी बऱ्हसतीयत ब-गिरायंद वर पस्त शवी न-गुंजी अंदर आ'लम वाँगाह तुरा बे तू बुतो ब-्नुमायंद भावार्थः यदि आप मार्ग (भक्ति) का अनुसरण करते हैं, तो वे आपके लिए रास्ता खोल देंगे अगर तुम फ़ना हो गए तो तुम्हें बक़ा (अस्तित्व) की तरफ ले जाएंगे यदि तुम पद में छोटे हो जाओगे , तो तूम पूरे ब्रह्मांड में भी समायोजित न हो पाओगे उस समय तुझे बिना तुम्हारे (विध्यमानता) आपको दिखाएंगे (जलालुद्दीन रूमी) Want ' Motivational Videos App "रुबाई" गर राहरवी रह बरत ब-कुशायंद वर नीस्त शवी बऱ्हसतीयत ब-गिरायंद वर पस्त शवी न-गुंजी अंदर आ'लम वाँगाह तुरा बे तू बुतो ब-्नुमायंद भावार्थः यदि आप मार्ग (भक्ति) का अनुसरण करते हैं, तो वे आपके लिए रास्ता खोल देंगे अगर तुम फ़ना हो गए तो तुम्हें बक़ा (अस्तित्व) की तरफ ले जाएंगे यदि तुम पद में छोटे हो जाओगे , तो तूम पूरे ब्रह्मांड में भी समायोजित न हो पाओगे उस समय तुझे बिना तुम्हारे (विध्यमानता) आपको दिखाएंगे (जलालुद्दीन रूमी) Want ' Motivational Videos App - ShareChat