ShareChat
click to see wallet page
search
#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उन परिंदों पर जो उड़ान भी अपनी अपना नीड़ छोड़कर भरते हे क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस पात पर जो रंग भी अपना आती पतझड़ देखकर बदलते है क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस सूरत पर जो सीरत भी अपनी हस्ती तोल कर बनाते है क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस कर्म पर जो परिणाम भी अपना बिना सोच समझ कर करते हे क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस वचन पर जो ज़ुबा भी अपनी अमृत छद्म विष समान रखते हैे क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस झूठ पर তী মুত্রমা ৪ী অণনা सच की परत चढ़ाकर पहनते है क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस मानस पर जो छुपा भेद भी अपना पीठ पीछे वार कर छोड़ते हैे स्वाती छीपा क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उन परिंदों पर जो उड़ान भी अपनी अपना नीड़ छोड़कर भरते हे क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस पात पर जो रंग भी अपना आती पतझड़ देखकर बदलते है क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस सूरत पर जो सीरत भी अपनी हस्ती तोल कर बनाते है क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस कर्म पर जो परिणाम भी अपना बिना सोच समझ कर करते हे क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस वचन पर जो ज़ुबा भी अपनी अमृत छद्म विष समान रखते हैे क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस झूठ पर তী মুত্রমা ৪ী অণনা सच की परत चढ़ाकर पहनते है क्या खूब कहा था किसी ने ना कर यकीन उस मानस पर जो छुपा भेद भी अपना पीठ पीछे वार कर छोड़ते हैे स्वाती छीपा - ShareChat