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मलेरिया दिवस विश्व मलेरिया दिवस प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को मनाया जाता है यह दिन इस बात के लिए भी पहचाना जाता है कि मलेरिया के नियंत्रण हेतु किस प्रकार के वैश्विक प्रयास किए जा रहे हैं। मच्छरों के कारण फैलने वाली इस बीमारी में हर साल कई लाख लोग जान गवाँ देते हैं। 'प्रोटोजुअन प्लाज्‍मोडियम' नामक कीटाणु मादा एनोफिलीज मच्छर के माध्यम से फैलते है।पूरे विश्व की 3.3 अरब जनसंख्या में लगभग 106 से देश हैं जिनमें मलेरिया का खतरा है वर्ष 2012 में मलेरिया के कारण लगभग 6,27,000 मृत्यु हुई जिनमें से अधिकतर अफ्रीकी, एशियाई, लैटिन अमेरिकी बच्चे शामिल है[1] इसका प्रभाव कुछ हद तक मध्य पूर्व तथा कुछ यूरोप के भागों में भी हुआ। विश्व मलेरिया दिवस उन 8 आधिकारिक वैश्विक सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक हैं जिसे [विश्व स्वास्थ्य संगठन] द्वारा चिन्हित किया गया है इनमें से विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व रक्तदाता दिवस, विश्व टीकाकरण सप्ताह, विश्व तपेदिक दिवस, विश्व तंबाकू निषेध दिवस, विश्व हेपेटाइटिस दिवस एवं विश्व एड्स दिवस हैं। विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना मई 2007 में 60 वे विश्व स्वास्थ्य सभा के सत्र के दौरान की गई।विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना से पूर्व 25 अप्रैल सन 2001 से मनाए जाने वाले अफ्रीका मलेरिया दिवस के एक वर्ष पश्चात ऐतिहासिक अबुजा घोषणा में 44 मलेरिया ग्रसित देशों ने अफ्रीकी शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए। मलेरिया इटालियन भाषा के शब्द माला एरिया से बना है, जिसका कि अर्थ बुरी हवा होता है। कहा जाता है कि इस बीमारी को सबसे पहले चीन में पाया गया था, जहां इसे उसे समय दलदली बुखार कहा जाता था क्योंकि यह बीमारी गंदगी से पनपती है। साल 1880 में मलेरिया पर सबसे पहला अध्ययन वैज्ञानिक चार्ल्स लुई अल्फोंस लैवेरिन ने किया। जब हम मलेरिया की रोकथाम और उपचार के बारे में बातें करते हैं, तो हमें चीनी महिला वैज्ञानिक थू योयो का उल्लेख करना होगा। क्योंकि उन्होंने मलेरिया के इलाज के लिये इस्तेमाल की जाने वाली दवा आर्टीमिसिनिन की खोज की, और दुनिया भर में खास तौर पर विकासशील देशों में मलेरिया से पीड़ित लाखों-करोड़ों लोगों की जान बचाई है।गौरतलब है कि अक्टूबर, 2015 में थू योयो को चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार मिला। पुरस्कार पाने का कारण यह है कि उन्होंने आर्टीमिसिनिन की खोज की, क्योंकि यह दवा मलेरिया रोगियों की मृत्यु दर को प्रभावी ढंग से कम कर सकती है, जिससे वे विज्ञान में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली चीनी बन गयीं।उनके अलावा थू योयो को गणतंत्र का पदक भी मिला, जो चीन लोक गणराज्य में सम्मान का सर्वोच्च पदक है। केवल उन लोगों को इसे प्राप्त करने के योग्य हैं, जिन्होंने चीन के निर्माण और देश की रक्षा करने में बड़ा योगदान दिया या अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल कीं। मार्च 2020 में, उन्हें टाइम मैगजीन की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं में से एक के रूप में चुना गया था। #जागरूकता दिवस
जागरूकता दिवस - 2 51H AP R | L WORLD MALARIA DAYI Uniting to Defeat Malaria | ogeieie we can makel silenf kiler: every day a viclory against 2 51H AP R | L WORLD MALARIA DAYI Uniting to Defeat Malaria | ogeieie we can makel silenf kiler: every day a viclory against - ShareChat