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#☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇
☝अनमोल ज्ञान - HH H {की खुशी चित्त का आनन्द और भीतर सतत अचे कार्पसे पवित्र एव शुद्घ आत्माओं की सामूहिकता " केवल आत्मा के प्रसन्न होने परही जुडे रना हा ह्मे अच्छा  गुरुदेव में सूर्य के रूप ्में आपको वंदन  प्राप्त होती है कॅर रहा हू। अब मैने मेरा सारा अस्तित्व  बना सक्त ह। ओर ही आपको समर्पित कर दिया हे। अद मुझ्ने विश्वास ह आप * मेरी निजी॰ ऐसी कोई प्रार्थना नही हे। निशित अच्े साधक  अब मेरा कोई अस्तित्व ही नही है॰ तो फिर निजी प्रार्थना कैसे हो सकती हे? बनोगे हा। मै तुम्हारी लीला समझने ्मे असमर्थ हू। এদে দুত 97  वैसा ही हो। तुम जैसा चाहो अव जीवन   की॰ सभी   घटनाएँ   आपकी शिवकृपानंद खानीजी  बस यही प्रार्थना हे। इच्छानुसार हो R पुवशति বান श्री शिवकृपानंद खामीजी  परम पूज्य सदगुर वित्त (हिमालप का समर्पण योग भाग २/२८) 0 1(414~ गुरुचरण बह स्थान होता 6े ज्हो साधक  समर्पित कर सकता ह। अपना मेकी भाव  श्री शिवकृपानंद स्वामीजी  97m 1 '74 [ 07 गुरू शिष्य का नाता तो आदि अनादि ह a 9 HH H {की खुशी चित्त का आनन्द और भीतर सतत अचे कार्पसे पवित्र एव शुद्घ आत्माओं की सामूहिकता " केवल आत्मा के प्रसन्न होने परही जुडे रना हा ह्मे अच्छा  गुरुदेव में सूर्य के रूप ्में आपको वंदन  प्राप्त होती है कॅर रहा हू। अब मैने मेरा सारा अस्तित्व  बना सक्त ह। ओर ही आपको समर्पित कर दिया हे। अद मुझ्ने विश्वास ह आप * मेरी निजी॰ ऐसी कोई प्रार्थना नही हे। निशित अच्े साधक  अब मेरा कोई अस्तित्व ही नही है॰ तो फिर निजी प्रार्थना कैसे हो सकती हे? बनोगे हा। मै तुम्हारी लीला समझने ्मे असमर्थ हू। এদে দুত 97  वैसा ही हो। तुम जैसा चाहो अव जीवन   की॰ सभी   घटनाएँ   आपकी शिवकृपानंद खानीजी  बस यही प्रार्थना हे। इच्छानुसार हो R पुवशति বান श्री शिवकृपानंद खामीजी  परम पूज्य सदगुर वित्त (हिमालप का समर्पण योग भाग २/२८) 0 1(414~ गुरुचरण बह स्थान होता 6े ज्हो साधक  समर्पित कर सकता ह। अपना मेकी भाव  श्री शिवकृपानंद स्वामीजी  97m 1 '74 [ 07 गुरू शिष्य का नाता तो आदि अनादि ह a 9 - ShareChat