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#🙏गुरु महिमा😇 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏
🙏गुरु महिमा😇 - शिचार अगरजच्े ह अपना मनन्दी मदिरह। ٩7٩7٢ ٦٦ तो अपना तनगहा मदिर 8 । Sadguru is everything [ शदशदा शा वहार जगरभच्छा 6 inour eterna ne अपना धनन्ही भदिरह। Nothingis posstbie Vrhont hims ओरपा तीनों अगरआच्े { Lile needs some power जीवननही मथिर हे ् Mal to push you up Sadguru TNT' १a that super powen जयजिनेन्द्र  संगीत को आध्यात्मिक साघना केरूपमे 35 िो गने पार। अपनाकर हम आंतरिक खोज ओर विकास की प्रणाम लिए स्वयको खोलते हे সনন মসাননাসা ক प्रणाम   प्रेम ६ जिससे संगीत हर्मे हमारे अस्तित्व के सबसे गहरे সপাস  সনুমামন E हिस्सों की यात्रा परलेजाता ह। a प्रणाम   आदर 6 श्रीजी १४२ २०२६ प्रणाम   शीतलता ह प्रणाम से॰ सुविचार आते ह WITIT AఫITIITI प्रणाम सकना सिखाता ४ प्र्रणमम औस्ू्न धमिदता है प्रणाम अहकार भिटा देता Timii-k:nfi प्रणाम हमारी सस्कति @ সপাস   ময মমস্পনা ঊ सभी को प्रणाम ज साप जागा गोगेढ राह =ர்=  = ஈனரிஈள் == मनापर्यत स्वभाव नषट हो जार्त 6 पदैसपर मख मैगिर नो विप चन पोहोचला जाती 6 पदि रमलपय पर गिरतो चमवने रगर्त 7 समुदर क सर्प मगिर ता मती बन  आपुलकीच আঁমলি दत  ٢ F71 निमाण होतं =7##7==77 5=~` नाहीतर फक्त आळखच उसनी विशपना ह। उर्स फहा गिरख तग मनुप्य फा जीवन भीत मनुप्य निमा ठर सा्य सद झरता ढ उसा प्रकारतीजात ७ L1   anm inM ಹa-inl 7 शिचार अगरजच्े ह अपना मनन्दी मदिरह। ٩7٩7٢ ٦٦ तो अपना तनगहा मदिर 8 । Sadguru is everything [ शदशदा शा वहार जगरभच्छा 6 inour eterna ne अपना धनन्ही भदिरह। Nothingis posstbie Vrhont hims ओरपा तीनों अगरआच्े { Lile needs some power जीवननही मथिर हे ् Mal to push you up Sadguru TNT' १a that super powen जयजिनेन्द्र  संगीत को आध्यात्मिक साघना केरूपमे 35 िो गने पार। अपनाकर हम आंतरिक खोज ओर विकास की प्रणाम लिए स्वयको खोलते हे সনন মসাননাসা ক प्रणाम   प्रेम ६ जिससे संगीत हर्मे हमारे अस्तित्व के सबसे गहरे সপাস  সনুমামন E हिस्सों की यात्रा परलेजाता ह। a प्रणाम   आदर 6 श्रीजी १४२ २०२६ प्रणाम   शीतलता ह प्रणाम से॰ सुविचार आते ह WITIT AఫITIITI प्रणाम सकना सिखाता ४ प्र्रणमम औस्ू्न धमिदता है प्रणाम अहकार भिटा देता Timii-k:nfi प्रणाम हमारी सस्कति @ সপাস   ময মমস্পনা ঊ सभी को प्रणाम ज साप जागा गोगेढ राह =ர்=  = ஈனரிஈள் == मनापर्यत स्वभाव नषट हो जार्त 6 पदैसपर मख मैगिर नो विप चन पोहोचला जाती 6 पदि रमलपय पर गिरतो चमवने रगर्त 7 समुदर क सर्प मगिर ता मती बन  आपुलकीच আঁমলি दत  ٢ F71 निमाण होतं =7##7==77 5=~` नाहीतर फक्त आळखच उसनी विशपना ह। उर्स फहा गिरख तग मनुप्य फा जीवन भीत मनुप्य निमा ठर सा्य सद झरता ढ उसा प्रकारतीजात ७ L1   anm inM ಹa-inl 7 - ShareChat
#🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान #🙏गुरु महिमा😇
🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 - এসারিমী 7 Hae  1 1 ೯; बह नो तुफ्तारे पेमकी पड्चकन रम सास नेता ह। जिस दिन नुन बिना Nई बवा मागे प्रेम करने लगत हो॰ उसी दिन अहकारगिर जाना आर परमात्मा प्कटतजाता हपरिम  शतसे { पक हीता @ बढ पार्थना बन तगी a जहा प्रमगहरा होता ह HO रहा शर्दमान ही जाते ಒir3i La परमात्मा तृम पहली यार रूता ह प्रेम में रगा ढदप ही ईश्वर எராரி ஈச पहचने कासवस सरल सहल आर सर्वशेष मार्ग पूर्ण चिश्चास व समर्पण मेरा दिया हुआ चचन कभी अधूरा १११ इन भाँ्षों नही होताःसमय भले ही बदल हे मेरे साई जाए हालात कठिन होजाए पर मेरी बात कभी झूठी नहीं होती। तुम बड़ा खुश नसीब है जल्दी में परिणाम चाहते हो॰ बो जिसकेनसीब में ो देषो तुफ्ें हा प्रश्नों इसलिए कभीनकभी तुम्हे लगता6 तुम हो , उसे ओर क्या कि कुछहो नहीं रहा। परजो मने चाहिये जिसके तुम तुम्हारे लिए तय किया aRನ सही रूपनेंही पूस करीब हो Fm -0 मेरीहरदेरी के पीछे भी तहारी ठा ग्तता गित जाएगा भलाई होती ह॰॰तम बस धर्य छपी चाहे कसी मी स्थिति आए ओर विश्वास बनाएरखो। मेजो उसे निभाता भी हू। अगर कभी अपने गुर का साथ कहत मेने तुम्हारा हाथ थामा ह॰तो 5 मत छाडा। सदा उन पा मंज़िल तक पहचाकर ही छोड़ूँग विश्वास रखा। इसलिएचिंता मत करो॰शंका पत ar मेरा वचन पत्थरकी लिकीर है। देरहो सकती है॰ परअधूरा कभी 69 এসারিমী 7 Hae  1 1 ೯; बह नो तुफ्तारे पेमकी पड्चकन रम सास नेता ह। जिस दिन नुन बिना Nई बवा मागे प्रेम करने लगत हो॰ उसी दिन अहकारगिर जाना आर परमात्मा प्कटतजाता हपरिम  शतसे { पक हीता @ बढ पार्थना बन तगी a जहा प्रमगहरा होता ह HO रहा शर्दमान ही जाते ಒir3i La परमात्मा तृम पहली यार रूता ह प्रेम में रगा ढदप ही ईश्वर எராரி ஈச पहचने कासवस सरल सहल आर सर्वशेष मार्ग पूर्ण चिश्चास व समर्पण मेरा दिया हुआ चचन कभी अधूरा १११ इन भाँ्षों नही होताःसमय भले ही बदल हे मेरे साई जाए हालात कठिन होजाए पर मेरी बात कभी झूठी नहीं होती। तुम बड़ा खुश नसीब है जल्दी में परिणाम चाहते हो॰ बो जिसकेनसीब में ो देषो तुफ्ें हा प्रश्नों इसलिए कभीनकभी तुम्हे लगता6 तुम हो , उसे ओर क्या कि कुछहो नहीं रहा। परजो मने चाहिये जिसके तुम तुम्हारे लिए तय किया aRನ सही रूपनेंही पूस करीब हो Fm -0 मेरीहरदेरी के पीछे भी तहारी ठा ग्तता गित जाएगा भलाई होती ह॰॰तम बस धर्य छपी चाहे कसी मी स्थिति आए ओर विश्वास बनाएरखो। मेजो उसे निभाता भी हू। अगर कभी अपने गुर का साथ कहत मेने तुम्हारा हाथ थामा ह॰तो 5 मत छाडा। सदा उन पा मंज़िल तक पहचाकर ही छोड़ूँग विश्वास रखा। इसलिएचिंता मत करो॰शंका पत ar मेरा वचन पत्थरकी लिकीर है। देरहो सकती है॰ परअधूरा कभी 69 - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #☝अनमोल ज्ञान #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏
🙏गुरु महिमा😇 - உ5/ (( 7311೪ ೩ ೭೫f 1rd &1 Ne amun Tem 4 cua 84 E1d & | MMt an MuMLyl(5  ಖrlxt6M.42R आर पतित्र होता ह। मनष्य उस मन को म दूषित करदेता ह। आरजब दसर गेरे जीचन र्गबुरी परिस्थितियों आईी बर लीग आएया सकट आयगनो माने अपन आप को कछए कीो तरह समट {6312 4e 0<  | N!" ப uI" 1 11==440-4 1 लोती। बढ लमेशा ಖpa ಒTau2 7=17 ी शिगकणनद रगमीजी  इश्वर पर निशर रहनी ह आर इसीलिए जीवनको सबस कठिनत रडा२ He huiu MGdld परिस्थितियों कासामना करे की शक्ति मिली आरगेर शीनर केबल एक अनुष्ठान दिवस४५ ही आवाज गूजी कि ईश्वर शश्वत ह।ये बुरी परिस्थितिया ओर बुरे लोग क्षणिक সণনা" বী মাব্ধায ল সাতন্দবদ্রনী অনীস! वर्तमान समय क्षणिक चाजों परध्यान मे निराकारतक की यात्रा ೊd aHHal 4ಾ ೫? Jilನ की उपस्थितिमें वर्तमान समय के के संदेश की आत्मा பசு  a   a है। { পৃত্লা 900 0 समर्पण के लिए आध्यात्मीक प्रगति " सदेव  शूर् शूर्ण 0 0 श्रद्धा ओर FI5 पूर्ण ही साकारसे निराकारकीओर आवश्यकता होती 6 कयकि होती ह। ओर यही सामान्य  श्रद्धा ओर विश्वास किए मनुष्य का मार्गहे।  बिना पूर्ण समर्पण नहीं ही बाबा स्वामी सकता हे।(बाचा स्वामी जी) உ5/ (( 7311೪ ೩ ೭೫f 1rd &1 Ne amun Tem 4 cua 84 E1d & | MMt an MuMLyl(5  ಖrlxt6M.42R आर पतित्र होता ह। मनष्य उस मन को म दूषित करदेता ह। आरजब दसर गेरे जीचन र्गबुरी परिस्थितियों आईी बर लीग आएया सकट आयगनो माने अपन आप को कछए कीो तरह समट {6312 4e 0<  | N!" ப uI" 1 11==440-4 1 लोती। बढ लमेशा ಖpa ಒTau2 7=17 ी शिगकणनद रगमीजी  इश्वर पर निशर रहनी ह आर इसीलिए जीवनको सबस कठिनत रडा२ He huiu MGdld परिस्थितियों कासामना करे की शक्ति मिली आरगेर शीनर केबल एक अनुष्ठान दिवस४५ ही आवाज गूजी कि ईश्वर शश्वत ह।ये बुरी परिस्थितिया ओर बुरे लोग क्षणिक সণনা" বী মাব্ধায ল সাতন্দবদ্রনী অনীস! वर्तमान समय क्षणिक चाजों परध्यान मे निराकारतक की यात्रा ೊd aHHal 4ಾ ೫? Jilನ की उपस्थितिमें वर्तमान समय के के संदेश की आत्मा பசு  a   a है। { পৃত্লা 900 0 समर्पण के लिए आध्यात्मीक प्रगति " सदेव  शूर् शूर्ण 0 0 श्रद्धा ओर FI5 पूर्ण ही साकारसे निराकारकीओर आवश्यकता होती 6 कयकि होती ह। ओर यही सामान्य  श्रद्धा ओर विश्वास किए मनुष्य का मार्गहे।  बिना पूर्ण समर्पण नहीं ही बाबा स्वामी सकता हे।(बाचा स्वामी जी) - ShareChat
#🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान #🙏गुरु महिमा😇
🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 - जीवन आसान नहीं है ज्यादा बात करो तो मैंने हर किस्म के लोग देखे है पागल ান ক্মীন্ী WWIWIil নীলন নাল मदद लेकर থুক্রিয়া कम बात बेवकूफ भी और मदद लेकर काम की बात करो बोलने वाले भी। মনলনী WIIII IIWWTT | Sunny Sharma Sharee Rupess ~MMnn जीवन की सुगप का भानंद तो वही ले सकता ह (ITiIWIFiITWId की ताकत को कभी दुआओं  कम मत आंकिए.. यह वह खामोश ऊर्जा है॰ जो आपके असंभव कार्यों को संभव vfrrkfurar೦vri बनाने की सबसे बड़़ी शक्ति है..! के बीच गहकने की काबिलिपत रखता हे। -T मे feTaT ٤ ١  किस्मत उनका साथ देती हे हमारे சச= पर भरोसा रखते हें। भगयान कहते ह कर्मोकी रील मिलता ह 3া परमात्मा के पास परमजल उनको ही मिलती < 71 यलते रहते ह Sfaஎ =২  সল ভ২ী क्योकि जीत हमेशा उसी कीहोती हे எ<8 ٦ जो आरकीरी तय लड्ता हे। सही হ্রবলিৎ 1 F గ  Yl[ सोच समझकर @ గంా -5 गीला + लिखा e ceeta Me Likha na करें। న எபள =1ச்- -5 {   6   { சனா =ஈ movarion 2 जीवन आसान नहीं है ज्यादा बात करो तो मैंने हर किस्म के लोग देखे है पागल ান ক্মীন্ী WWIWIil নীলন নাল मदद लेकर থুক্রিয়া कम बात बेवकूफ भी और मदद लेकर काम की बात करो बोलने वाले भी। মনলনী WIIII IIWWTT | Sunny Sharma Sharee Rupess ~MMnn जीवन की सुगप का भानंद तो वही ले सकता ह (ITiIWIFiITWId की ताकत को कभी दुआओं  कम मत आंकिए.. यह वह खामोश ऊर्जा है॰ जो आपके असंभव कार्यों को संभव vfrrkfurar೦vri बनाने की सबसे बड़़ी शक्ति है..! के बीच गहकने की काबिलिपत रखता हे। -T मे feTaT ٤ ١  किस्मत उनका साथ देती हे हमारे சச= पर भरोसा रखते हें। भगयान कहते ह कर्मोकी रील मिलता ह 3া परमात्मा के पास परमजल उनको ही मिलती < 71 यलते रहते ह Sfaஎ =২  সল ভ২ী क्योकि जीत हमेशा उसी कीहोती हे எ<8 ٦ जो आरकीरी तय लड्ता हे। सही হ্রবলিৎ 1 F గ  Yl[ सोच समझकर @ గంా -5 गीला + लिखा e ceeta Me Likha na करें। న எபள =1ச்- -5 {   6   { சனா =ஈ movarion 2 - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏
🙏गुरु महिमा😇 - अपने आपको कितीनी भी॰ जीवन  সকলা कठीण परिस्थिती आय कभी मत समझो जीवन मे कितनी भी॰ মe৭ স সাপক মাং চী रेहता  Eুl कठिण समस्या आय अपने आपको कितीनी भी॰ जीवन  সকলা कठीण परिस्थिती आय कभी मत समझो जीवन मे कितनी भी॰ মe৭ স সাপক মাং চী रेहता  Eুl कठिण समस्या आय - ShareChat
#🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 - aHa Ha ಚಬ/0  l ஈசர #ர ப கரி 'মর্মী আলাব ক্ষে ৪1 ৪ মিরদ্ধ; মীর্মাকা থমদোষ বরাা हेत { आमभाव कम होन ४।कीरीका आलभाव जादा  बिना न कोई तेरा होता 6 शररभाव ४म होता ह।और चे शतीरभाव जादा  447 117 47.741d 4ಞನ1 ೧ जाते ह।सारी समरगार शरीर तक अकर सिपिट जाती { जपवी आल्मा वो अच्ी पवि्र आलाओ कै सनिष्यरनेते जाने ने अपमी आत्मा स्यग होगी ओीर उती आल्मा क निपाण शरर परहो जाएगा। 4444444 मिःततव के सान्निध्य से हमारे मय  तनाव , रोग आदि लगते ह।  दूरहीने समपण ध्यान याग মব H দূব চ9রয স০ {3০ 81 4554 #যা মান 81 নিননব पवित्र एव शद्घ आत्माओं की सामहिकत fசசச55 #1# 71்சசா #4 ச #777 55 7  e : गुरु अच्छे भाव के कारण प्रेम के कारण  '24 #+4-~|74 04` 8/ आत्मीय भाव के कारण   सामुहिकता के 114=4-77 | சப்ர்ச 6 சிசரீச 1= কাতে সমন চীন 61 সা লেন সমন চীনা [ಹ7 {1 24447 14ArA0783aಬsan' हे॰ वह चेतन्य बरसने के लिए उचित माध्यम देसोग आपस 0  | बनता हे। ओर जव उपयुक्त माध्यम बनता ऐे 41 43414118 तभी उसके माथ्यम से परमात्मा का चेतन्य बरसने लगता हे। सदगुरु प्रसन्न होने परवे पला बरग हीभीतर जाओग २मेटा अदर जाअन बरस ही पड़ेंगे क्योकि ೯೯ಷ್ೆಕಿ #ಪಾಪಾ ತ ব্া লন্স টী 1a1107 -73 ' 1IRa _101 ऐलटन जताते हठ नालटन के की॰ फ उपर स॰ बोटने के बोटेंगे।    Fர - பிர் ==ரி7 ச ஈகச वे अपने पास कुछ रख ही नर्ही सकते हे। हते { पासवे होो हा ठीक उसा प्कारतेजेरे F रापभीतर बोटना गुरु का ईश्वरप्रदत्त स्वभाव होता ही लागम तोजीत्मा ठे प्रकाश म आपवो औपर सार ८ी५ नरर हे। शिष्य अपने जीवन मे गुरु को कितना " ஈர= 1# 7-+74 ரீர்ப 1# ஈப5 ஈசாரதி 812 42 14 6167 31 7 m9 Ean  प्रगति निर्भर  आध्यात्मिक करती 61 ाप# मक्त होन मक्ष ४ 07 पूज्प सदगुर श्री शिवकृपानद स्वामीजी शिवकृपानई सामी 4404^ W =-சர~1 கிஏ 4441 47346 00 11 aHa Ha ಚಬ/0  l ஈசர #ர ப கரி 'মর্মী আলাব ক্ষে ৪1 ৪ মিরদ্ধ; মীর্মাকা থমদোষ বরাা हेत { आमभाव कम होन ४।कीरीका आलभाव जादा  बिना न कोई तेरा होता 6 शररभाव ४म होता ह।और चे शतीरभाव जादा  447 117 47.741d 4ಞನ1 ೧ जाते ह।सारी समरगार शरीर तक अकर सिपिट जाती { जपवी आल्मा वो अच्ी पवि्र आलाओ कै सनिष्यरनेते जाने ने अपमी आत्मा स्यग होगी ओीर उती आल्मा क निपाण शरर परहो जाएगा। 4444444 मिःततव के सान्निध्य से हमारे मय  तनाव , रोग आदि लगते ह।  दूरहीने समपण ध्यान याग মব H দূব চ9রয স০ {3০ 81 4554 #যা মান 81 নিননব पवित्र एव शद्घ आत्माओं की सामहिकत fசசச55 #1# 71்சசா #4 ச #777 55 7  e : गुरु अच्छे भाव के कारण प्रेम के कारण  '24 #+4-~|74 04` 8/ आत्मीय भाव के कारण   सामुहिकता के 114=4-77 | சப்ர்ச 6 சிசரீச 1= কাতে সমন চীন 61 সা লেন সমন চীনা [ಹ7 {1 24447 14ArA0783aಬsan' हे॰ वह चेतन्य बरसने के लिए उचित माध्यम देसोग आपस 0  | बनता हे। ओर जव उपयुक्त माध्यम बनता ऐे 41 43414118 तभी उसके माथ्यम से परमात्मा का चेतन्य बरसने लगता हे। सदगुरु प्रसन्न होने परवे पला बरग हीभीतर जाओग २मेटा अदर जाअन बरस ही पड़ेंगे क्योकि ೯೯ಷ್ೆಕಿ #ಪಾಪಾ ತ ব্া লন্স টী 1a1107 -73 ' 1IRa _101 ऐलटन जताते हठ नालटन के की॰ फ उपर स॰ बोटने के बोटेंगे।    Fர - பிர் ==ரி7 ச ஈகச वे अपने पास कुछ रख ही नर्ही सकते हे। हते { पासवे होो हा ठीक उसा प्कारतेजेरे F रापभीतर बोटना गुरु का ईश्वरप्रदत्त स्वभाव होता ही लागम तोजीत्मा ठे प्रकाश म आपवो औपर सार ८ी५ नरर हे। शिष्य अपने जीवन मे गुरु को कितना " ஈர= 1# 7-+74 ரீர்ப 1# ஈப5 ஈசாரதி 812 42 14 6167 31 7 m9 Ean  प्रगति निर्भर  आध्यात्मिक करती 61 ाप# मक्त होन मक्ष ४ 07 पूज्प सदगुर श्री शिवकृपानद स्वामीजी शिवकृपानई सामी 4404^ W =-சர~1 கிஏ 4441 47346 00 11 - ShareChat
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#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - १३ फरवरी ऐमा देखा जाता हकी यदि किसी प्रतिष्ठित घर म कोई एक व्यक्ति भी चार निकल जाए ओर उस जेल जाना  पडे तो पूग़ का पूग़ घर सफट मे पड जाता ए आर सभा  का नाम खपव हा जाता ह। गलता फच्चमति काता ह आर पृग परिवार भुगतता ह।  उसा तर्द यदि परिवार म कोईए எ7்7 নাঁপব எரர जाता ह। भजन एकव्यक्ति फाता 6 যম্রটা आर पनिन्न समस्त స్ాసాగా नानी द उदाहरण हशी प्रहाद मदारन Smiu ನದ ne ಣa   44 1 ~ { ~ ~ ైన్త " মি R =0  0  १३ फरवरी ऐमा देखा जाता हकी यदि किसी प्रतिष्ठित घर म कोई एक व्यक्ति भी चार निकल जाए ओर उस जेल जाना  पडे तो पूग़ का पूग़ घर सफट मे पड जाता ए आर सभा  का नाम खपव हा जाता ह। गलता फच्चमति काता ह आर पृग परिवार भुगतता ह।  उसा तर्द यदि परिवार म कोईए எ7்7 নাঁপব எரர जाता ह। भजन एकव्यक्ति फाता 6 যম্রটা आर पनिन्न समस्त స్ాసాగా नानी द उदाहरण हशी प्रहाद मदारन Smiu ನದ ne ಣa   44 1 ~ { ~ ~ ైన్త মি R =0  0 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ASadaurd sare one because theyare medlums; leyal((iೀialldlammama Cu ]Mat [au>D =0 ر lorsthrolph hesaduruis thesme "ப1 / ' 9 57 م م W মরমাদন ` सामूहिकता Stpumusislmpmn Smi ೯] पस mmamanmodliatinn nol { आनद n   لب [ ~ eع٧  و و    -#=745"5" n आपक भीतर बेठे WII WII TII परमात्मा को मेरा गुरुपूर्णिमा समर्पग ध्यानयोग महाशिविर समर्पण आश्रम अरडका अजमेर प्रणाम ASadaurd sare one because theyare medlums; leyal((iೀialldlammama Cu ]Mat [au>D =0 ر lorsthrolph hesaduruis thesme "ப1 / ' 9 57 م م W মরমাদন ` सामूहिकता Stpumusislmpmn Smi ೯] पस mmamanmodliatinn nol { आनद n   لب [ ~ eع٧  و و    -#=745"5" n आपक भीतर बेठे WII WII TII परमात्मा को मेरा गुरुपूर्णिमा समर्पग ध्यानयोग महाशिविर समर्पण आश्रम अरडका अजमेर प्रणाम - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - W6 uనuIllన JlflMHitlmuudlufrulml यह सृजनात्मक क्िया अत्यत उपचारात्मक होती ह क्याकि यहहर्म भीतरनो दव ढुणाहेउस ম সলবুন बाहरलाने ओरजागरूकता के प्रकाश करे देती हे। इस प्रक्रिया से हम अपने वास्तविक स्वरूप की अंतर्दष्टि प्राप्त करते ह को मुक्त करते हे ओर गहन संतोष  নে চ্য সানী तथा आत्म संवंध का अनुभव करते ह। श्रीजी १२ २ २०२६ W6 uనuIllన JlflMHitlmuudlufrulml यह सृजनात्मक क्िया अत्यत उपचारात्मक होती ह क्याकि यहहर्म भीतरनो दव ढुणाहेउस ম সলবুন बाहरलाने ओरजागरूकता के प्रकाश करे देती हे। इस प्रक्रिया से हम अपने वास्तविक स्वरूप की अंतर्दष्टि प्राप्त करते ह को मुक्त करते हे ओर गहन संतोष  নে চ্য সানী तथा आत्म संवंध का अनुभव करते ह। श्रीजी १२ २ २०२६ - ShareChat