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#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - Cu r 444 JUSL aS you carry sorrow on a full moon niBht जिस प्रकार से की रात रमें यदि आप पूर्णिमा " लेकर जाते 3& your sorrow increases a thousand times But if हे, तो आपका दुःख हजार गुना वृद्धिगत होता हे। पर यटि you Bo with happiness your happiness increases लेकर जाते हे तो आपकी खुशी हजार गुना  खुशी  आप ೩thousand umes Eacty lke tis 15 tevrtue or वृद्धिगत हो जाती हे। ठीक इसी प्रकार से पुण्य महात्माओं का  Maharmas wharever you give you will back Ber हे। आप जो देँगे , उससे हजार गुना वृद्धिगत होके वापस  thousandtald because the warkaf the energies मिलेगा, क्योकि शक्ति्यों का कार्य वृद्धिगत करना है।  IS t০ Increase Shree Shivkrupanand Swamill शिवकृपानंद स्वामीजी  -श्री Cu r 444 JUSL aS you carry sorrow on a full moon niBht जिस प्रकार से की रात रमें यदि आप पूर्णिमा " लेकर जाते 3& your sorrow increases a thousand times But if हे, तो आपका दुःख हजार गुना वृद्धिगत होता हे। पर यटि you Bo with happiness your happiness increases लेकर जाते हे तो आपकी खुशी हजार गुना  खुशी  आप ೩thousand umes Eacty lke tis 15 tevrtue or वृद्धिगत हो जाती हे। ठीक इसी प्रकार से पुण्य महात्माओं का  Maharmas wharever you give you will back Ber हे। आप जो देँगे , उससे हजार गुना वृद्धिगत होके वापस  thousandtald because the warkaf the energies मिलेगा, क्योकि शक्ति्यों का कार्य वृद्धिगत करना है।  IS t০ Increase Shree Shivkrupanand Swamill शिवकृपानंद स्वामीजी  -श्री - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ৩০ साई बाबा Me n ७ भूर्भुवः स्वः तत्सवितु्वरेण्यं  मन चंचल होता है भर्गा देवस्य धीमहि थियो। यो नः प्रचोदयातू I इसलिए सदैव अपनी ७शकी पहिमा का थ्यान कखे ನ1 F बुद्धि के द्वार खुले रखो जो प्ूजनीय @ जो जात का भछार MIuMIIMIMnచI waN Ill दिखाए आरहय सत्प पपपर   LI ^ सखल पव पंगलमण ढिनकी शभकामनाएं वलाःया साक्षी अव्सरआत्म कहलाता हे। ध्यान जिेसी साधनाओं के माध्यम गुरुदेव स्थिरता की अवस्था विकसित Vl( निरंतर करके हम मानसिक गतिविधिया प्रतिबद्धता " क्षमताओं  अर्थ अपनी 6 l कर सकते हे और प्रवह अलग हाना எ Hal  को आपको जो सकल्प को अपन डस गहर पहलू ஏ5 हर बाधा से आगे ले जा सकता हे। श्रीजी 3 १ २०२६ ৩০ साई बाबा Me n ७ भूर्भुवः स्वः तत्सवितु्वरेण्यं  मन चंचल होता है भर्गा देवस्य धीमहि थियो। यो नः प्रचोदयातू I इसलिए सदैव अपनी ७शकी पहिमा का थ्यान कखे ನ1 F बुद्धि के द्वार खुले रखो जो प्ूजनीय @ जो जात का भछार MIuMIIMIMnచI waN Ill दिखाए आरहय सत्प पपपर   LI ^ सखल पव पंगलमण ढिनकी शभकामनाएं वलाःया साक्षी अव्सरआत्म कहलाता हे। ध्यान जिेसी साधनाओं के माध्यम गुरुदेव स्थिरता की अवस्था विकसित Vl( निरंतर करके हम मानसिक गतिविधिया प्रतिबद्धता " क्षमताओं  अर्थ अपनी 6 l कर सकते हे और प्रवह अलग हाना எ Hal  को आपको जो सकल्प को अपन डस गहर पहलू ஏ5 हर बाधा से आगे ले जा सकता हे। श्रीजी 3 १ २०२६ - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - ~ चित्त रहेतव चरणों रमें तिव चरणों रमें अनुष्ठान दिवस ३ उतलनपअपने खुद के सहस्त्रार पर।] की साकार अवतार ೦ गप्रममय जयत से निराकारतककी यात्रा सारजिग खोजें चित्त रमें बसे स्वामी छुप छप केमुस्काए के संदेश की HT {* {l SLSHI   ` {ಘ  ஜஜஷா;ீபு  काया तो आत्मा का हेःएक चाला 1 अपने शरीर भाव काया की माया में काहे मन डोला हे सवागी आत्मा तो तूही जगाए से मुक्त हो जाये तो परमात्मा  e उसमें ही॰ अवतरीत " हो सकता जन्म लिया क्यों जग मेंये ही भुलाया है। নানা মামী जगये थर्मशाला मन क्यो लगाया हास्वामी आत्मा को घरतूदिखाए Psa Upoares Commn ee মবে নযী নিরনব মরা রনা ৫ বিমব আাণকা ডানাকে ঘারি বনী TI  चितजसोही शीतरजाव आत्म पकाशित .0 हखाती ह ओरस्यय आल शक्ति जागृत होन लवती आरहमरी बईशकि एक गीतर S एक करक प्रकाशित तीव लगती हयस्यालिक _= 43uಗ1e ~ चित्त रहेतव चरणों रमें तिव चरणों रमें अनुष्ठान दिवस ३ उतलनपअपने खुद के सहस्त्रार पर।] की साकार अवतार ೦ गप्रममय जयत से निराकारतककी यात्रा सारजिग खोजें चित्त रमें बसे स्वामी छुप छप केमुस्काए के संदेश की HT {* {l SLSHI   ` {ಘ  ஜஜஷா;ீபு  काया तो आत्मा का हेःएक चाला 1 अपने शरीर भाव काया की माया में काहे मन डोला हे सवागी आत्मा तो तूही जगाए से मुक्त हो जाये तो परमात्मा  e उसमें ही॰ अवतरीत " हो सकता जन्म लिया क्यों जग मेंये ही भुलाया है। নানা মামী जगये थर्मशाला मन क्यो लगाया हास्वामी आत्मा को घरतूदिखाए Psa Upoares Commn ee মবে নযী নিরনব মরা রনা ৫ বিমব আাণকা ডানাকে ঘারি বনী TI  चितजसोही शीतरजाव आत्म पकाशित .0 हखाती ह ओरस्यय आल शक्ति जागृत होन लवती आरहमरी बईशकि एक गीतर S एक करक प्रकाशित तीव लगती हयस्यालिक _= 43uಗ1e - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - Geபு - C೦ आत्मा की शाति सर्वोपरि हे।उसे किसीःभी॰ कीमत पर खोने नदे। The souts peace is paramount do श्री शिवकृपानंद स्वामीजी not loseitatany cost -Shree Shivrupanand Swamiji Geபு - C೦ आत्मा की शाति सर्वोपरि हे।उसे किसीःभी॰ कीमत पर खोने नदे। The souts peace is paramount do श्री शिवकृपानंद स्वामीजी not loseitatany cost -Shree Shivrupanand Swamiji - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - हिमालयन समर्पण घ्यान योग मेने ठाकुर साहब को समझाया अगर মাচন চী নী आत्म साक्षात्कार पाना सिद्धियाँ छोड़नी होगी और उन सिद्धियों के कारण ही समाज में आपका सम्मान ! ৯ নুহল নীল मेने समाज के ह लिए क्ष, रिश्तेदारों के लिए बहुत किया " लिए গণ ৭ গণন নএ ৯ कुछ करना चाहते हूँ । बाद में उन्हे आत्मसाक्षात्कार कराया तो उनकी सारी सिद्ियाँ चली बुद्धि से जाना जा सकता है। आत्मा Ts ಾ कारण उसका यर था यर सिद्धिया उनकी थी ही नर्ही ! उन्होंने से माना जा सकता हे। बुद्धि जहाँ पर साधना शक्तियाँ , सिद्धियाँ पाने के लिए गिर जाती है॰ वहीं से आत्मा काउदय कीःथी ओर परोपकारी आत्माएँ कुछ होता हैे। | आध्यात्मिक सत्य। परम जिन्होंने अपने जीवनमें सिद्धियां तो पूज्य श्री शिवकृपानंदस्वामी जी साधना करके प्राप्त की॰ परचे अपने जीवन में उसका उपयोग समाज कार्य हेतु नहीं कर पाए तो तो उन आत्माओं  वे ठाकुर की यह इच्छा साहब के शरीर के माध्यम से पूरी कर रहे थे। क्योकि  ठाकुर साहब के पास शरीर था और उन आत्माओं के पास सिद्धियाँ थी ಕತ' साहब के आत्म साक्षात्कार सेवे भीतर की आत्माएँ भी मुक्त हो गई , क्योकि  सिद्धियों का उपयोग करने की इच्छा भी॰ ೯1 15 ಾ/ उनकी पूर्ण जुगनू से सीखा मैँने - योगिनी ( नवरात्रि विशेष) शिवकृपानंदस्वामी जी परम पूज्य श्री जीवन ग अपनी आत्न लो प्रकारित करा ही सच्ची सफतता ह। हिमालयन समर्पण घ्यान योग मेने ठाकुर साहब को समझाया अगर মাচন চী নী आत्म साक्षात्कार पाना सिद्धियाँ छोड़नी होगी और उन सिद्धियों के कारण ही समाज में आपका सम्मान ! ৯ নুহল নীল मेने समाज के ह लिए क्ष, रिश्तेदारों के लिए बहुत किया " लिए গণ ৭ গণন নএ ৯ कुछ करना चाहते हूँ । बाद में उन्हे आत्मसाक्षात्कार कराया तो उनकी सारी सिद्ियाँ चली बुद्धि से जाना जा सकता है। आत्मा Ts ಾ कारण उसका यर था यर सिद्धिया उनकी थी ही नर्ही ! उन्होंने से माना जा सकता हे। बुद्धि जहाँ पर साधना शक्तियाँ , सिद्धियाँ पाने के लिए गिर जाती है॰ वहीं से आत्मा काउदय कीःथी ओर परोपकारी आत्माएँ कुछ होता हैे। | आध्यात्मिक सत्य। परम जिन्होंने अपने जीवनमें सिद्धियां तो पूज्य श्री शिवकृपानंदस्वामी जी साधना करके प्राप्त की॰ परचे अपने जीवन में उसका उपयोग समाज कार्य हेतु नहीं कर पाए तो तो उन आत्माओं  वे ठाकुर की यह इच्छा साहब के शरीर के माध्यम से पूरी कर रहे थे। क्योकि  ठाकुर साहब के पास शरीर था और उन आत्माओं के पास सिद्धियाँ थी ಕತ' साहब के आत्म साक्षात्कार सेवे भीतर की आत्माएँ भी मुक्त हो गई , क्योकि  सिद्धियों का उपयोग करने की इच्छा भी॰ ೯1 15 ಾ/ उनकी पूर्ण जुगनू से सीखा मैँने - योगिनी ( नवरात्रि विशेष) शिवकृपानंदस्वामी जी परम पूज्य श्री जीवन ग अपनी आत्न लो प्रकारित करा ही सच्ची सफतता ह। - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ٢ ٧ ٧٣٢ « {RUR IIITTTIITIT चित्त जैसे ही भीतर जाने लगता हैे आत्मा प्रकाशित हो जाती हे और स्वयं आत्म शक्ति जागृत होने लगती हे और हमारे ही भीतर हुई शक्ति एक छुपी एक करके प्रकाशित होने लगतीं हे। ।आध्यात्मिक पवित्र आत्माए ईश्वरीय देन ह।ये बताईनह जाती हन पवितस्थान सत्य। परम पूज्य श्री निर्मण होने परये स्वर्यही प्रकटहो जाती ह। आथ्यात्मिक सत्य) परम शिवकपनससवामी जी पूज्यःश्री शिवकृणानदस्वामी जी ٢ ٧ ٧٣٢ « {RUR IIITTTIITIT चित्त जैसे ही भीतर जाने लगता हैे आत्मा प्रकाशित हो जाती हे और स्वयं आत्म शक्ति जागृत होने लगती हे और हमारे ही भीतर हुई शक्ति एक छुपी एक करके प्रकाशित होने लगतीं हे। ।आध्यात्मिक पवित्र आत्माए ईश्वरीय देन ह।ये बताईनह जाती हन पवितस्थान सत्य। परम पूज्य श्री निर्मण होने परये स्वर्यही प्रकटहो जाती ह। आथ्यात्मिक सत्य) परम शिवकपनससवामी जी पूज्यःश्री शिवकृणानदस्वामी जी - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - (2120 मंगल ्होगा 1 o n शुक्षपुख्वर देवाला प्रसन्न करण्यासाठी शुळ रदय आणि चांगले विचार पुरस आरत (2120 मंगल ्होगा 1 o n शुक्षपुख्वर देवाला प्रसन्न करण्यासाठी शुळ रदय आणि चांगले विचार पुरस आरत - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - आत्मा को अक्सर सच्चे स्वके रूप में वर्णित किया जाता है चह शाश्वत और अपरिवर्तनीय केंद्र जो मन औरशरीरके उतार चढ़ाव से परे है। आत्मा को अनुभव करना इस आंतरिक वास्तविकता को पहचानना और अपनाना है, उस दिव्य उपस्थिति के साथ स्वयं को जोड़़ना है जो हममें से प्रत्येक के भीतर निवास करती है। श्री जी १.१.२०२६ आत्मा को अक्सर सच्चे स्वके रूप में वर्णित किया जाता है चह शाश्वत और अपरिवर्तनीय केंद्र जो मन औरशरीरके उतार चढ़ाव से परे है। आत्मा को अनुभव करना इस आंतरिक वास्तविकता को पहचानना और अपनाना है, उस दिव्य उपस्थिति के साथ स्वयं को जोड़़ना है जो हममें से प्रत्येक के भीतर निवास करती है। श्री जी १.१.२०२६ - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मुक्ति का अर्थ है ख्वयं को केवल चेतना के रूप में जानना। वर्णचा शेव्ट पादरंग  गयवक गीत ख भाणि Tdl-aufl रचात स्वामीच्या आशावदाने मुदरपोगापोग आहे  काप २७ सरेल, नवे उगवेल  काळाच्या ओघात सर्व काही बदलेल॰ . সসথনী  पण, श्री स्वामी तुम जिस दिन सब जरूरतें पूरी कर लोगे साथ कायम राहील! दिन तुम  अचानक पाओगे कि असली उस स्वामीच्या कृपाछत्राखाली  जरूरत एक थी - वह ध्यान हेः नवीन वर्ष आनंदाचे तुमचे  बाकी सब जरूरते शरीरकीःथी आणि आरोग्यदायी जावो॰ नर्ही। तुम्हारी ।। नूतन वर्षाच्या स्वामीमय शुभेच्छा ।। मुक्ति का अर्थ है ख्वयं को केवल चेतना के रूप में जानना। वर्णचा शेव्ट पादरंग  गयवक गीत ख भाणि Tdl-aufl रचात स्वामीच्या आशावदाने मुदरपोगापोग आहे  काप २७ सरेल, नवे उगवेल  काळाच्या ओघात सर्व काही बदलेल॰ . সসথনী  पण, श्री स्वामी तुम जिस दिन सब जरूरतें पूरी कर लोगे साथ कायम राहील! दिन तुम  अचानक पाओगे कि असली उस स्वामीच्या कृपाछत्राखाली  जरूरत एक थी - वह ध्यान हेः नवीन वर्ष आनंदाचे तुमचे  बाकी सब जरूरते शरीरकीःथी आणि आरोग्यदायी जावो॰ नर्ही। तुम्हारी ।। नूतन वर्षाच्या स्वामीमय शुभेच्छा ।। - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - (ು *Il ল9 নানা মানী Il" अनुष्ठान केलिये प्रार्पना  7#`777 14 आओ हम सभी मिलकर गुरुदेवसे +9*149 711 करते 8की कृपपा हमे इ्स  प्रार्पना   54=/4H = 0स9 ४५ दिन सदेव सूक्ष्म शरिरसेजुरे रखे द नी नहीतपतकता प्रहणकिया चैतन्य मोन ऋकर जतन  करने कीशक्ति प्रदान करे पही पुज्प गुरुदेव के चरणो मै॰ अपने स्वयंके आस्तित्व को उस AA"| A पिता परमेश्वर पर पूर्णतः परम अनुष्ठान दिवस १ छोडकर उसकी की गई करुणा की अनूभूति करना ही ध्यान है। ~ কী মাব্ধায सततित   निषय सतलत अवतार W (आध्यात्मिक सत्य) परम पूज्य - F से निराकारतक की यात्रा  श्री शिवकपानंदस्वामी जी n హ आत्मा " के संदेश की " श्रृंखला है।  के ही वर्तमान  परमात्मा रूप को ही " अवतार  कहते है।बाबा स्वामी  - Ira mlaraed 7milran mogress only 441 नववर्ष की नव ऊषा की नवकिरणों का ஏரபப்ாி ச 11ஈஈ51 பre 1 4 441 9 जीवन में प्रतिक्षण गुरु  ا सुस्वागतम { 454119-/ப1444~! [ n n सानिध्य के चेतन्य का भी सुस्वागतम ~104 4 ಭಬor21e AHuaz raAaaaue {47m7024 r ಭೊ<aues तेरी तो ओ देह अब संगत हो गुरुदेव 0 0 7610141== 1 भाव मुक्त हो मन ! कर्मों के भोग, भोग ೊRa rav naraaHa Hanamu a  av लें हम हो गुरुमय जीवन सुस्वागतम. 7- =76011 HIrA. की ढेरों शुभकामनाएँ नववर्ष a a आपकी गुरु माँ ~1 (ು *Il ল9 নানা মানী Il" अनुष्ठान केलिये प्रार्पना  7#`777 14 आओ हम सभी मिलकर गुरुदेवसे +9*149 711 करते 8की कृपपा हमे इ्स  प्रार्पना   54=/4H = 0स9 ४५ दिन सदेव सूक्ष्म शरिरसेजुरे रखे द नी नहीतपतकता प्रहणकिया चैतन्य मोन ऋकर जतन  करने कीशक्ति प्रदान करे पही पुज्प गुरुदेव के चरणो मै॰ अपने स्वयंके आस्तित्व को उस AA"| A पिता परमेश्वर पर पूर्णतः परम अनुष्ठान दिवस १ छोडकर उसकी की गई करुणा की अनूभूति करना ही ध्यान है। ~ কী মাব্ধায सततित   निषय सतलत अवतार W (आध्यात्मिक सत्य) परम पूज्य - F से निराकारतक की यात्रा  श्री शिवकपानंदस्वामी जी n హ आत्मा " के संदेश की श्रृंखला है।  के ही वर्तमान  परमात्मा रूप को ही " अवतार  कहते है।बाबा स्वामी  - Ira mlaraed 7milran mogress only 441 नववर्ष की नव ऊषा की नवकिरणों का ஏரபப்ாி ச 11ஈஈ51 பre 1 4 441 9 जीवन में प्रतिक्षण गुरु  ا सुस्वागतम { 454119-/ப1444~! [ n n सानिध्य के चेतन्य का भी सुस्वागतम ~104 4 ಭಬor21e AHuaz raAaaaue {47m7024 r ಭೊ<aues तेरी तो ओ देह अब संगत हो गुरुदेव 0 0 7610141== 1 भाव मुक्त हो मन ! कर्मों के भोग, भोग ೊRa rav naraaHa Hanamu a  av लें हम हो गुरुमय जीवन सुस्वागतम. 7- =76011 HIrA. की ढेरों शुभकामनाएँ नववर्ष a a आपकी गुरु माँ ~1 - ShareChat