sn vyas
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏गीता ज्ञान🛕 *गीता में संसार का वर्णन करते हुए परमात्मा श्री कृष्ण कहते हैं*
*यह संसार दुःख का भंडार है, नश्वर है , अनित्य है , उसमें सुख की एक जरा सी बूंद भी नहीं है, ऐसा समझ कर तू मेरा ही स्मरण कर - मेरी ही शरण स्वीकार कर ले ।*
*जन्म लेने का दुख*,,,,,,
*माता के गर्भ में जीवात्मा आती है और नौ महीने तक उल्टे सिर लटकती हुई हाथ पर संतुलित किए हुए पड़ी रहती है ।*
*यह वर्णन पढ़ते ही हमें कप- कपी छूट जाए और रोंगटे खड़े हो जाए ऐसा है । ऐसा भयंकर दुख माता के गर्भ में , आप_ मैं _ हम _ सब भोग कर आए हैं।*
*यदि किसी आदमी के हाथ पैर इकट्ठा करके खूब कसकर बांध दिए जाएं , पैर सीधा न हो सके, करवट भी न ले सके , ऐसी स्थिति में किसी दुर्गंध देती हुई , मलमूत्र से भरपूर और अनेक प्रकार के जहरीले जीव जंतुओं, मकोड़ों से भरी अंधेरी नाली में उलटे सिर लटकाया जाए तो वह आदमी नौ महीने तो क्या_ नौ दिन तो क्या _ परंतु नौ घंटे भी जी नहीं सकता ।*
*ऐसी अंधेरी गंदी माता के गर्भ की गंदगी से सनी कोठरी में, आप _ मैं _ और हम सब , नौ महीने सजा भोग कर आए हैं।*
*फिर भी परमात्मा की कृपा कहिए _ माया कहिए _ जो कहे सो , हम सब इस भयंकर दुख को बिल्कुल भूल गए।*
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