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।। ॐ।। न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः। अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः ॥ अर्जुन ! मेरी उत्पत्ति को न देवता लोग जानते हैं और न महर्षिगण ही जानते हैं। श्रीकृष्ण ने कहा था, 'जन्म कर्म च मे दिव्यम्' - मेरा वह जन्म और कर्म अलौकिक है, इन चर्मचक्षुओं से देखा नहीं जा सकता। इसलिये मेरे उस प्रकट होने को देव और महर्षि स्तर तक पहुँचे हुए लोग भी नहीं जानते। मैं सब प्रकार से देवताओं और महर्षियों का आदि कारण हूँ। #❤️जीवन की सीख #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #यथार्थ गीता
❤️जीवन की सीख - न मे बिदुः सुरगणाः प्रभवं महषयः| अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः Il मेरी उत्पत्ति को न देवता लोग जानते हैं अजुन श्रीकृष्ण  ने कहा और न महर्षिगण ही जानते हैं था, जन्म कर्म च मे दिव्यम् मरा वह जन्म और कर्म अलौकिक है, चर्मचक्षुओं से देखा नहीं जा इन इसलिये मेरे उस प्रकट होने को देव और सकता| महर्षि स्तर तक पहुँचे हुए लोग भी नहीं जानते। मैं सब प्रकार से देवताओं और महर्षियों का आदि कारण हू ( न मे बिदुः सुरगणाः प्रभवं महषयः| अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः Il मेरी उत्पत्ति को न देवता लोग जानते हैं अजुन श्रीकृष्ण  ने कहा और न महर्षिगण ही जानते हैं था, जन्म कर्म च मे दिव्यम् मरा वह जन्म और कर्म अलौकिक है, चर्मचक्षुओं से देखा नहीं जा इन इसलिये मेरे उस प्रकट होने को देव और सकता| महर्षि स्तर तक पहुँचे हुए लोग भी नहीं जानते। मैं सब प्रकार से देवताओं और महर्षियों का आदि कारण हू ( - ShareChat