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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - जन्मा हूँ जिस जग में उस जग के संबंधों में " ऋणी हे उधारी भी हे अभी बाकी " केसे पूरा करूंगा मैं उन्हें इस छोटे जीवन में 314314 " के परेशानियां भी हैे अभी बाकी " क्यूंकी कमियां मुझ में इतनी सारी बाकी मुझ पर कितनी ही देनदारी माँ पिता का लाड प्यार चिंता फिकर दुआ पुकार बडे बुजुर्ग की स्नेह धार संस्कार सारा लुटा निहसार गुरुजनों का ज्ञान अपार बना जिससे जीवन आधार संगी साथी साथ व्यवहार मन मानस पूरा देह श्रृंगार ईश कृपा का रस बहार प्रकट मन में अतुल आभार इनसे उऋण होना मेरे बस में नहीं श्रद्धा मिटे यह भी तो मुमकिन नहीं करूं मैं तो बस इनका शत शत वंदन..!! निखरे काया मेरी मिटे रुह का क्रंदन..!! स्वाती छीपा जन्मा हूँ जिस जग में उस जग के संबंधों में " ऋणी हे उधारी भी हे अभी बाकी " केसे पूरा करूंगा मैं उन्हें इस छोटे जीवन में 314314 " के परेशानियां भी हैे अभी बाकी " क्यूंकी कमियां मुझ में इतनी सारी बाकी मुझ पर कितनी ही देनदारी माँ पिता का लाड प्यार चिंता फिकर दुआ पुकार बडे बुजुर्ग की स्नेह धार संस्कार सारा लुटा निहसार गुरुजनों का ज्ञान अपार बना जिससे जीवन आधार संगी साथी साथ व्यवहार मन मानस पूरा देह श्रृंगार ईश कृपा का रस बहार प्रकट मन में अतुल आभार इनसे उऋण होना मेरे बस में नहीं श्रद्धा मिटे यह भी तो मुमकिन नहीं करूं मैं तो बस इनका शत शत वंदन..!! निखरे काया मेरी मिटे रुह का क्रंदन..!! स्वाती छीपा - ShareChat