#GodMorningFriday
छप्पन भोग
नर से फिर पशुवा कीजै, गधा, बैल बनाई।
छप्पन भोग कहां मन बौरे, कहीं कुरड़ी चरने जाई।।
मनुष्य जीवन में हम कितने अच्छे अर्थात 56 प्रकार के भोजन खाते हैं। भक्ति न करने से या शास्त्र विरुद्ध साधना करने से गधा बनेगा, फिर ये 56 प्रकार के भोजन कहां प्राप्त होंगे कहीं कुरड़ीयो पर पेट भरने के लिए घास खाने जाएगा। इसी प्रकार बैल आदि-आदि पशुओं की योनियों में कष्ट पर कष्ट उठाएगा। #santrampaljimaharaj
![santrampaljimaharaj - छप्पन भोग नर से फिर पशुवा कीजै , गधा, बैल बनाई। छप्पन भोग कहाँ मन बौरे, कहीं कुरड़ी चरने जाई।। मनुष्य जीवन में हम कितने अच्छे अर्थात् ५६ भावार्थ प्रकार के भोजन खाते हैं। भक्ति न करने से या शास्त्रविरुद्ध साधना करने से गधा बनेगा, फिर ये छप्पन प्रकार के भोजन कहाँ प्राप्त होँगे, कहीं कुरड़ियों [रूड़ी] पर पेट भरने प्रकार बैल आदिआदि fg घास खाने जाएगा | ক इसी पशुओं की योनियों में कष्ट पर कष्ट उठाएगा | बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज = SPIRIUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ छप्पन भोग नर से फिर पशुवा कीजै , गधा, बैल बनाई। छप्पन भोग कहाँ मन बौरे, कहीं कुरड़ी चरने जाई।। मनुष्य जीवन में हम कितने अच्छे अर्थात् ५६ भावार्थ प्रकार के भोजन खाते हैं। भक्ति न करने से या शास्त्रविरुद्ध साधना करने से गधा बनेगा, फिर ये छप्पन प्रकार के भोजन कहाँ प्राप्त होँगे, कहीं कुरड़ियों [रूड़ी] पर पेट भरने प्रकार बैल आदिआदि fg घास खाने जाएगा | ক इसी पशुओं की योनियों में कष्ट पर कष्ट उठाएगा | बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज = SPIRIUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat santrampaljimaharaj - छप्पन भोग नर से फिर पशुवा कीजै , गधा, बैल बनाई। छप्पन भोग कहाँ मन बौरे, कहीं कुरड़ी चरने जाई।। मनुष्य जीवन में हम कितने अच्छे अर्थात् ५६ भावार्थ प्रकार के भोजन खाते हैं। भक्ति न करने से या शास्त्रविरुद्ध साधना करने से गधा बनेगा, फिर ये छप्पन प्रकार के भोजन कहाँ प्राप्त होँगे, कहीं कुरड़ियों [रूड़ी] पर पेट भरने प्रकार बैल आदिआदि fg घास खाने जाएगा | ক इसी पशुओं की योनियों में कष्ट पर कष्ट उठाएगा | बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज = SPIRIUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ छप्पन भोग नर से फिर पशुवा कीजै , गधा, बैल बनाई। छप्पन भोग कहाँ मन बौरे, कहीं कुरड़ी चरने जाई।। मनुष्य जीवन में हम कितने अच्छे अर्थात् ५६ भावार्थ प्रकार के भोजन खाते हैं। भक्ति न करने से या शास्त्रविरुद्ध साधना करने से गधा बनेगा, फिर ये छप्पन प्रकार के भोजन कहाँ प्राप्त होँगे, कहीं कुरड़ियों [रूड़ी] पर पेट भरने प्रकार बैल आदिआदि fg घास खाने जाएगा | ক इसी पशुओं की योनियों में कष्ट पर कष्ट उठाएगा | बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज = SPIRIUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_619179_143d8ee9_1775804617908_sc.jpg?tenant=sc&referrer=pwa-sharechat-service&f=908_sc.jpg)

