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घर मे सीढी कैसे बनाये #हर हर महादेव #🙏🏻सीता राम
हर हर महादेव - सीढ़ियाँ अथवा जीना 9 STAIRCASE दिशा घर में सीढ़ियाँ के लिए सर्वोत्तम उपलब्ध न हो तो - दक्षिण यदि दक्षिण है लिए पश्चिम या दक्षिण - पश्चिम में स्थान इसके के उत्तर - पूर्व में सीढ़ियाँ न रखना चाहिए घर रखी जाएं इससे तनाव वधन नाश के कारण उत्पन्न होते रहते हैं।घर के ब्रह्मस्थान अर्थात्केन्द्र सेभी सीढियाँ नहीं उठाई जानी चाहिए। इससे घर के सदस्यों को हानि व मानसिक बीमारियों का सामना करना पड सकता है। सीढियाँ घर के बाहर प्रवेश द्वार को काटती हुई नहीं होनी चाहिए क्योंकि इनका घर के बालकों के संवेगों पर कुप्रभाव पडता है। ऐसी सीढ़ियाँ जाने अनजाने बच्चों के मन में भय का बन कारण प्रतिकूल असर पड़ सकती हैं॰ जिससे उनके भावनात्मक विकास पर सकता है।घर के भीतर से उठाई जाने वाली सीढ़ियाँ भी प्रवेश द्वार वास्तु की दृष्टि से सीढ़ियों बिल्कुल सामने भी नहीं होनी चाहिएं ক के नीचे शौचालय बनाना ठीक नहीं है। यद्यपि स्थानाभाव के कारण हम ऐसा कर लेते हैं लेकिन वास्तुशास्त्र हमें इसकी नहीं देता | अनुमति अतः जहां तक हो सके सीढ़ियों के नीचे का स्थान शौचालय के लिए प्रयोग में न लाया जाए। हाँ यहाँ पर स्टोर बनाया जा सकता है। सीढ़ियों का ज्यादा सर्पिलाकार या घुमावदार होना भी उचित नही है। सीढ़ियाँ ऐसे स्थान पर हों कि चढ़ने वाला इस पर বলং ম दक्षिण की ओर चढ़े। सीढ़ियों के नीचे सोना नहीं चाहिए। सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए जो प्रगति एवं आवृत्ति की प्रतीक है। सम संख्याएं पूर्णता की प्रतीक है।जो ठहराव का अश्विनी कुमार वंसल 116 भाग्यशाली भवन सरल वास्तुशास्त्र परिचायक है। अतः सीढ़ियों की संख्या (५ ७ ९ ११, १३) आदि ही होनी चाहिएं। घर में प्रवेश द्वार के सामने की सीढ़ियां हमेशा विषम ही रखनी चाहिए। सीढ़ियों से चढ़कर घर में प्रवेश करते हुए पहले हमेशा दायां पैर ही घर के भीतर रखना चाहिए। हमारा दायां अंग अधिक सीढ़िया पूर्व या उत्तर से आरम्भ बलशाली व पवित माना गया ह। होकर पश्चिम या दक्षिण में समाप्त होनी चाहिएं। यदि सीढ़ियों के वीच কী বিxা স ৪ী চালা कोई घुमाव होतो यह घुमाव घड़ी की सुइयों  चाहिए। सीढ़ियाँ साफ व मजबूत होनी चाहिएं समय समय सुथरी इनकी मुरम्मत करवाते रहना चाहिए। पर सीढ़ियाँ अथवा जीना 9 STAIRCASE दिशा घर में सीढ़ियाँ के लिए सर्वोत्तम उपलब्ध न हो तो - दक्षिण यदि दक्षिण है लिए पश्चिम या दक्षिण - पश्चिम में स्थान इसके के उत्तर - पूर्व में सीढ़ियाँ न रखना चाहिए घर रखी जाएं इससे तनाव वधन नाश के कारण उत्पन्न होते रहते हैं।घर के ब्रह्मस्थान अर्थात्केन्द्र सेभी सीढियाँ नहीं उठाई जानी चाहिए। इससे घर के सदस्यों को हानि व मानसिक बीमारियों का सामना करना पड सकता है। सीढियाँ घर के बाहर प्रवेश द्वार को काटती हुई नहीं होनी चाहिए क्योंकि इनका घर के बालकों के संवेगों पर कुप्रभाव पडता है। ऐसी सीढ़ियाँ जाने अनजाने बच्चों के मन में भय का बन कारण प्रतिकूल असर पड़ सकती हैं॰ जिससे उनके भावनात्मक विकास पर सकता है।घर के भीतर से उठाई जाने वाली सीढ़ियाँ भी प्रवेश द्वार वास्तु की दृष्टि से सीढ़ियों बिल्कुल सामने भी नहीं होनी चाहिएं ক के नीचे शौचालय बनाना ठीक नहीं है। यद्यपि स्थानाभाव के कारण हम ऐसा कर लेते हैं लेकिन वास्तुशास्त्र हमें इसकी नहीं देता | अनुमति अतः जहां तक हो सके सीढ़ियों के नीचे का स्थान शौचालय के लिए प्रयोग में न लाया जाए। हाँ यहाँ पर स्टोर बनाया जा सकता है। सीढ़ियों का ज्यादा सर्पिलाकार या घुमावदार होना भी उचित नही है। सीढ़ियाँ ऐसे स्थान पर हों कि चढ़ने वाला इस पर বলং ম दक्षिण की ओर चढ़े। सीढ़ियों के नीचे सोना नहीं चाहिए। सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए जो प्रगति एवं आवृत्ति की प्रतीक है। सम संख्याएं पूर्णता की प्रतीक है।जो ठहराव का अश्विनी कुमार वंसल 116 भाग्यशाली भवन सरल वास्तुशास्त्र परिचायक है। अतः सीढ़ियों की संख्या (५ ७ ९ ११, १३) आदि ही होनी चाहिएं। घर में प्रवेश द्वार के सामने की सीढ़ियां हमेशा विषम ही रखनी चाहिए। सीढ़ियों से चढ़कर घर में प्रवेश करते हुए पहले हमेशा दायां पैर ही घर के भीतर रखना चाहिए। हमारा दायां अंग अधिक सीढ़िया पूर्व या उत्तर से आरम्भ बलशाली व पवित माना गया ह। होकर पश्चिम या दक्षिण में समाप्त होनी चाहिएं। यदि सीढ़ियों के वीच কী বিxা স ৪ী চালা कोई घुमाव होतो यह घुमाव घड़ी की सुइयों  चाहिए। सीढ़ियाँ साफ व मजबूत होनी चाहिएं समय समय सुथरी इनकी मुरम्मत करवाते रहना चाहिए। पर - ShareChat