राकेश तिवारी
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पुजा के उपरांत दान संकल्प कैसे करे #🙏🏻सीता राम #हर हर महादेव
🙏🏻सीता राम - कृण्वन्तुभेषजम्। ' इतिमन्त्रेण सकुटुम्बं यजमानम्   उपयमनकुशमार्जयेत्। उपयमनकुशानामग्नौ प्रक्षेपः ब्रह्मग्रन्थिविमोकः श्रेयोदानम् a तत आचार्यः श्रेयोदानं कुर्यात्। तद्यथा - अद्येत्यादिकृतस्य कर्मणो यजमानाय श्रेयोदानं करिष्ये। भवन्नियोगेन मया अस्मिन् कर्मणियत्कृतम् आचार्यत्व तदुत्पन्नं श्रेयः तत् अमुना साक्षतेन सजलेन पूगी फलेन तुभ्यमहं सम्प्रददे | प्रतिगृह्यताम् ' देवस्यत्वे ' ति प्रतिगृह्लामि| तेन श्रेयसा त्वं श्रेयोवान् भव। ' भवामी ' ति तेन वाच्यम्। इति श्रेयोदानम्।  दक्षिणासङ्कल्प a कर्मणः साङ्गतासिद्ध्यर्थ तत्सम्पूर्ण फलप्राप्त्यर्थ अद्य कृतस्य आचार्यादिभ्यो महर्त्विग्भ्यः মুকপানন্ংশী मन्त्रजापकेभ्यो हवनकर्तृभ्योउन्येभ्यश्च दक्षिणां विभज्य दातुमहमुत्सृजे  इति दक्षिणासङ्कल्पः  ब्राह्मणभोजनसङ्कल्प  ब्राह्मणभोजनसङ्कल्पं ततो कुर्यात्। कर्मणः कृतस्य साङ्गतासिद्ध्यर्थ तत्सम्पूर्णफलप्राप्त्यर्थ यथासङ्खऱ्याकान्   ब्राह्मणान् 4 यथाकाले यथोत्पन्नेनाउत्रेनाएहं भोजयिष्ये भोजनान्ते तेभ्यस्ताम्बूलदक्षिणां च ब्राह्मणभोजनसङ्कल्पः दास्ये। इति 9 पीठदानसङ्कल्प ततो ग्रह ( वाप्रधान ) पीठदेवताना गन्धादिपञ्चोपचारैरुत्तरपूजनं कुर्यात्। गणपत्याद्यावाहित देवताभ्यो प्रधानपीठादि आचार्याय नमः दद्यातू | 1ೆ कर्मणः साङ्गतासिद्ध्यर्थ तत्सम्पूर्ण फलप्राप्त्यर्थ अद्यकृतस्य इदं   प्रधानपीठं ग्रहपीठं मातृकापीठं सोपस्करं दक्षिणासहितम् आचार्याय तुभ्यमहं सम्प्रददे । कृण्वन्तुभेषजम्। ' इतिमन्त्रेण सकुटुम्बं यजमानम्   उपयमनकुशमार्जयेत्। उपयमनकुशानामग्नौ प्रक्षेपः ब्रह्मग्रन्थिविमोकः श्रेयोदानम् a तत आचार्यः श्रेयोदानं कुर्यात्। तद्यथा - अद्येत्यादिकृतस्य कर्मणो यजमानाय श्रेयोदानं करिष्ये। भवन्नियोगेन मया अस्मिन् कर्मणियत्कृतम् आचार्यत्व तदुत्पन्नं श्रेयः तत् अमुना साक्षतेन सजलेन पूगी फलेन तुभ्यमहं सम्प्रददे | प्रतिगृह्यताम् ' देवस्यत्वे ' ति प्रतिगृह्लामि| तेन श्रेयसा त्वं श्रेयोवान् भव। ' भवामी ' ति तेन वाच्यम्। इति श्रेयोदानम्।  दक्षिणासङ्कल्प a कर्मणः साङ्गतासिद्ध्यर्थ तत्सम्पूर्ण फलप्राप्त्यर्थ अद्य कृतस्य आचार्यादिभ्यो महर्त्विग्भ्यः মুকপানন্ংশী मन्त्रजापकेभ्यो हवनकर्तृभ्योउन्येभ्यश्च दक्षिणां विभज्य दातुमहमुत्सृजे  इति दक्षिणासङ्कल्पः  ब्राह्मणभोजनसङ्कल्प  ब्राह्मणभोजनसङ्कल्पं ततो कुर्यात्। कर्मणः कृतस्य साङ्गतासिद्ध्यर्थ तत्सम्पूर्णफलप्राप्त्यर्थ यथासङ्खऱ्याकान्   ब्राह्मणान् 4 यथाकाले यथोत्पन्नेनाउत्रेनाएहं भोजयिष्ये भोजनान्ते तेभ्यस्ताम्बूलदक्षिणां च ब्राह्मणभोजनसङ्कल्पः दास्ये। इति 9 पीठदानसङ्कल्प ततो ग्रह ( वाप्रधान ) पीठदेवताना गन्धादिपञ्चोपचारैरुत्तरपूजनं कुर्यात्। गणपत्याद्यावाहित देवताभ्यो प्रधानपीठादि आचार्याय नमः दद्यातू | 1ೆ कर्मणः साङ्गतासिद्ध्यर्थ तत्सम्पूर्ण फलप्राप्त्यर्थ अद्यकृतस्य इदं   प्रधानपीठं ग्रहपीठं मातृकापीठं सोपस्करं दक्षिणासहितम् आचार्याय तुभ्यमहं सम्प्रददे । - ShareChat
शयन किस दिशा मे शिर करके करना चाहिए #हर हर महादेव #🙏🏻सीता राम
हर हर महादेव - तेईसवाँ अध्याय जाननेयोग्य आवश्यक बातें (१ ) शयन पूर्व या दक्षिणकी तरफ सिर करके सोना चाहिये। उत्तर   মহা या पश्चिमकी तरफ सिर करके सोनेसे आयु क्षीण होती है तथा  शरीरमें रोग उत्पन्न होते ह नोत्तराभिमुखः सुप्यात्  पश्चिमाभिमुखो  7d న  ( लपुव्यासस्मृति २। ८८ ) स्वपेद्धि  पश्चिमे  चैव 377' ল odraq I a भवेत्। स्वप्नादायुःक्षयं * याति पुरुषो बहाहा पूर्वदक्षिणम् ।  ततः   स्वप्नं शस्त कुर्वीत  ন a ( पदमपुराण   सप्टि॰ ५१| १२५ १२६ ) " प्राच्यां दिशि शिरश्शस्तं याम्यायामथ वा नृप।    71" विपरीत सदेव ঘুঁমা  स्वपतः (विष्णुपुराण ३। ११| १११ ) a a तरफ  सिर करके सोनेसे   विद्या प्राप्त   होती   है। पूर्वकी  दक्षिणकी तरफ सिर करके सोनेसे धन तथा वृद्धि होती आयुकी  है। पश्चिमकी तरफ सिर करके सोनेसे प्रबल चिन्ता होती है। उत्तरकी तरफ सिर करके सोनेसे हानि तथा मृत्यु होती है, अर्थात् आयु क्षीण होती  शयने  विद्याद्धनमायुश्च  दक्षिणे। प्राकशिरः हानिमृत्युरथोत्तरे । पश्चिमे  নিলা प्रवला a (आचारमयूखः विश्वकर्मप्रकाश ) शास्त्रमें ऐसी बात भी आती है॰ कि अपने घरमें पूर्वकी तरफ सिर करके, ससुरालमें दक्षिणकी तरफ सिर करके और परदेश  ( विदेश) में पश्चिमकी तरफ सिर करके सोये, पर उत्तरकी तरफ तेईसवाँ अध्याय जाननेयोग्य आवश्यक बातें (१ ) शयन पूर्व या दक्षिणकी तरफ सिर करके सोना चाहिये। उत्तर   মহা या पश्चिमकी तरफ सिर करके सोनेसे आयु क्षीण होती है तथा  शरीरमें रोग उत्पन्न होते ह नोत्तराभिमुखः सुप्यात्  पश्चिमाभिमुखो  7d న  ( लपुव्यासस्मृति २। ८८ ) स्वपेद्धि  पश्चिमे  चैव 377' ল odraq I a भवेत्। स्वप्नादायुःक्षयं * याति पुरुषो बहाहा पूर्वदक्षिणम् ।  ततः   स्वप्नं शस्त कुर्वीत  ন a ( पदमपुराण   सप्टि॰ ५१| १२५ १२६ ) प्राच्यां दिशि शिरश्शस्तं याम्यायामथ वा नृप।    71" विपरीत सदेव ঘুঁমা  स्वपतः (विष्णुपुराण ३। ११| १११ ) a a तरफ  सिर करके सोनेसे   विद्या प्राप्त   होती   है। पूर्वकी  दक्षिणकी तरफ सिर करके सोनेसे धन तथा वृद्धि होती आयुकी  है। पश्चिमकी तरफ सिर करके सोनेसे प्रबल चिन्ता होती है। उत्तरकी तरफ सिर करके सोनेसे हानि तथा मृत्यु होती है, अर्थात् आयु क्षीण होती  शयने  विद्याद्धनमायुश्च  दक्षिणे। प्राकशिरः हानिमृत्युरथोत्तरे । पश्चिमे  নিলা प्रवला a (आचारमयूखः विश्वकर्मप्रकाश ) शास्त्रमें ऐसी बात भी आती है॰ कि अपने घरमें पूर्वकी तरफ सिर करके, ससुरालमें दक्षिणकी तरफ सिर करके और परदेश  ( विदेश) में पश्चिमकी तरफ सिर करके सोये, पर उत्तरकी तरफ - ShareChat
आहुति कैसे दे #🙏🏻सीता राम #हर हर महादेव
🙏🏻सीता राम - ्यस्य देवस्य यो होमस्तसुय   मन्त्रेण होमयेत्। ' जो होम जिस देवताके उद्देश्यसे हो॰ उसका   उसीके मन्त्रसे चाहिये । 77 577[ *हवन करनेकी विघि उत्तानेन तु हस्तेन श्रङ्गुष्ठाग्रेण पोडितम्  ( संहताङ्गुलिपाणस्तु वाग्यतो  जुहृुयाद्धविः Il हविर्द्रव्यको उत्तान ( सीघे ) हाथसे   अंगूठेके  अग्रभागसे दबाकर हाथकी   अंगुलियोंको  सटाकर मौन होकर   हवन करना चाहिये ।' पाण्यार्हुतर्द्वादशपर्वपूरिका ঈব  ম্ুনমাস্ণুহিন্ধা  कांसादिना ( दैवेन तोर्थेन च हविः हूयते स्वङ्गारिणि स्वर्चिषि तच्च qaக II (कात्यायनस्मृति   ६।११ ) 34f यदि पाण्याहुति हो हाथसे आहुति दी जाय तो हाथकी अंगुलियोंके  बारहों पर्व ( पंउरियाँ ) पूरे होने चाहियें | काँसेकी चम्मच आदिसे दी जाय, तो केवल स्र वके होनी चाहिये | बराबर जुहु यान्नानिपातितजानुकः न मुक्तकेशो 8 [ अनिपततितजानोस्तु  राक्षर्सैfह्रयते हविः Il 7 கா जानुओंको   अनिपातित रखकर ओर   दोंनो वाल ) प्रोढ पादादि ) होकर हवन न करे | जो मनुष्य अनिपातित जानु होकर ्यस्य देवस्य यो होमस्तसुय   मन्त्रेण होमयेत्। ' जो होम जिस देवताके उद्देश्यसे हो॰ उसका   उसीके मन्त्रसे चाहिये । 77 577[ *हवन करनेकी विघि उत्तानेन तु हस्तेन श्रङ्गुष्ठाग्रेण पोडितम्  ( संहताङ्गुलिपाणस्तु वाग्यतो  जुहृुयाद्धविः Il हविर्द्रव्यको उत्तान ( सीघे ) हाथसे   अंगूठेके  अग्रभागसे दबाकर हाथकी   अंगुलियोंको  सटाकर मौन होकर   हवन करना चाहिये ।' पाण्यार्हुतर्द्वादशपर्वपूरिका ঈব  ম্ুনমাস্ণুহিন্ধা  कांसादिना ( दैवेन तोर्थेन च हविः हूयते स्वङ्गारिणि स्वर्चिषि तच्च qaக II (कात्यायनस्मृति   ६।११ ) 34f यदि पाण्याहुति हो हाथसे आहुति दी जाय तो हाथकी अंगुलियोंके  बारहों पर्व ( पंउरियाँ ) पूरे होने चाहियें | काँसेकी चम्मच आदिसे दी जाय, तो केवल स्र वके होनी चाहिये | बराबर जुहु यान्नानिपातितजानुकः न मुक्तकेशो 8 [ अनिपततितजानोस्तु  राक्षर्सैfह्रयते हविः Il 7 கா जानुओंको   अनिपातित रखकर ओर   दोंनो वाल ) प्रोढ पादादि ) होकर हवन न करे | जो मनुष्य अनिपातित जानु होकर - ShareChat
घर मे सीढी कैसे बनाये #हर हर महादेव #🙏🏻सीता राम
हर हर महादेव - सीढ़ियाँ अथवा जीना 9 STAIRCASE दिशा घर में सीढ़ियाँ के लिए सर्वोत्तम उपलब्ध न हो तो - दक्षिण यदि दक्षिण है लिए पश्चिम या दक्षिण - पश्चिम में स्थान इसके के उत्तर - पूर्व में सीढ़ियाँ न रखना चाहिए घर रखी जाएं इससे तनाव वधन नाश के कारण उत्पन्न होते रहते हैं।घर के ब्रह्मस्थान अर्थात्केन्द्र सेभी सीढियाँ नहीं उठाई जानी चाहिए। इससे घर के सदस्यों को हानि व मानसिक बीमारियों का सामना करना पड सकता है। सीढियाँ घर के बाहर प्रवेश द्वार को काटती हुई नहीं होनी चाहिए क्योंकि इनका घर के बालकों के संवेगों पर कुप्रभाव पडता है। ऐसी सीढ़ियाँ जाने अनजाने बच्चों के मन में भय का बन कारण प्रतिकूल असर पड़ सकती हैं॰ जिससे उनके भावनात्मक विकास पर सकता है।घर के भीतर से उठाई जाने वाली सीढ़ियाँ भी प्रवेश द्वार वास्तु की दृष्टि से सीढ़ियों बिल्कुल सामने भी नहीं होनी चाहिएं ক के नीचे शौचालय बनाना ठीक नहीं है। यद्यपि स्थानाभाव के कारण हम ऐसा कर लेते हैं लेकिन वास्तुशास्त्र हमें इसकी नहीं देता | अनुमति अतः जहां तक हो सके सीढ़ियों के नीचे का स्थान शौचालय के लिए प्रयोग में न लाया जाए। हाँ यहाँ पर स्टोर बनाया जा सकता है। सीढ़ियों का ज्यादा सर्पिलाकार या घुमावदार होना भी उचित नही है। सीढ़ियाँ ऐसे स्थान पर हों कि चढ़ने वाला इस पर বলং ম दक्षिण की ओर चढ़े। सीढ़ियों के नीचे सोना नहीं चाहिए। सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए जो प्रगति एवं आवृत्ति की प्रतीक है। सम संख्याएं पूर्णता की प्रतीक है।जो ठहराव का अश्विनी कुमार वंसल 116 भाग्यशाली भवन सरल वास्तुशास्त्र परिचायक है। अतः सीढ़ियों की संख्या (५ ७ ९ ११, १३) आदि ही होनी चाहिएं। घर में प्रवेश द्वार के सामने की सीढ़ियां हमेशा विषम ही रखनी चाहिए। सीढ़ियों से चढ़कर घर में प्रवेश करते हुए पहले हमेशा दायां पैर ही घर के भीतर रखना चाहिए। हमारा दायां अंग अधिक सीढ़िया पूर्व या उत्तर से आरम्भ बलशाली व पवित माना गया ह। होकर पश्चिम या दक्षिण में समाप्त होनी चाहिएं। यदि सीढ़ियों के वीच কী বিxা স ৪ী চালা कोई घुमाव होतो यह घुमाव घड़ी की सुइयों  चाहिए। सीढ़ियाँ साफ व मजबूत होनी चाहिएं समय समय सुथरी इनकी मुरम्मत करवाते रहना चाहिए। पर सीढ़ियाँ अथवा जीना 9 STAIRCASE दिशा घर में सीढ़ियाँ के लिए सर्वोत्तम उपलब्ध न हो तो - दक्षिण यदि दक्षिण है लिए पश्चिम या दक्षिण - पश्चिम में स्थान इसके के उत्तर - पूर्व में सीढ़ियाँ न रखना चाहिए घर रखी जाएं इससे तनाव वधन नाश के कारण उत्पन्न होते रहते हैं।घर के ब्रह्मस्थान अर्थात्केन्द्र सेभी सीढियाँ नहीं उठाई जानी चाहिए। इससे घर के सदस्यों को हानि व मानसिक बीमारियों का सामना करना पड सकता है। सीढियाँ घर के बाहर प्रवेश द्वार को काटती हुई नहीं होनी चाहिए क्योंकि इनका घर के बालकों के संवेगों पर कुप्रभाव पडता है। ऐसी सीढ़ियाँ जाने अनजाने बच्चों के मन में भय का बन कारण प्रतिकूल असर पड़ सकती हैं॰ जिससे उनके भावनात्मक विकास पर सकता है।घर के भीतर से उठाई जाने वाली सीढ़ियाँ भी प्रवेश द्वार वास्तु की दृष्टि से सीढ़ियों बिल्कुल सामने भी नहीं होनी चाहिएं ক के नीचे शौचालय बनाना ठीक नहीं है। यद्यपि स्थानाभाव के कारण हम ऐसा कर लेते हैं लेकिन वास्तुशास्त्र हमें इसकी नहीं देता | अनुमति अतः जहां तक हो सके सीढ़ियों के नीचे का स्थान शौचालय के लिए प्रयोग में न लाया जाए। हाँ यहाँ पर स्टोर बनाया जा सकता है। सीढ़ियों का ज्यादा सर्पिलाकार या घुमावदार होना भी उचित नही है। सीढ़ियाँ ऐसे स्थान पर हों कि चढ़ने वाला इस पर বলং ম दक्षिण की ओर चढ़े। सीढ़ियों के नीचे सोना नहीं चाहिए। सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए जो प्रगति एवं आवृत्ति की प्रतीक है। सम संख्याएं पूर्णता की प्रतीक है।जो ठहराव का अश्विनी कुमार वंसल 116 भाग्यशाली भवन सरल वास्तुशास्त्र परिचायक है। अतः सीढ़ियों की संख्या (५ ७ ९ ११, १३) आदि ही होनी चाहिएं। घर में प्रवेश द्वार के सामने की सीढ़ियां हमेशा विषम ही रखनी चाहिए। सीढ़ियों से चढ़कर घर में प्रवेश करते हुए पहले हमेशा दायां पैर ही घर के भीतर रखना चाहिए। हमारा दायां अंग अधिक सीढ़िया पूर्व या उत्तर से आरम्भ बलशाली व पवित माना गया ह। होकर पश्चिम या दक्षिण में समाप्त होनी चाहिएं। यदि सीढ़ियों के वीच কী বিxা স ৪ী চালা कोई घुमाव होतो यह घुमाव घड़ी की सुइयों  चाहिए। सीढ़ियाँ साफ व मजबूत होनी चाहिएं समय समय सुथरी इनकी मुरम्मत करवाते रहना चाहिए। पर - ShareChat
नारियल को कलश पर कैसे रखे #हर हर महादेव #🙏🏻सीता राम
हर हर महादेव - 3 6 कर्मकाण्ड मीमांसा होती है पूर्वकी ओर मुख करने से धन का नाश होता है इसलिए नारियल को  T चाहिए। करके ही रखना बहुरोगवृद्धयै शत्रुविवर्धनाय  বঙ্নননস अधोमुखं वित्तविनाशनाय   तस्माच्छुभं   सम्मुखनारिकेलम् प्राची 3 6 कर्मकाण्ड मीमांसा होती है पूर्वकी ओर मुख करने से धन का नाश होता है इसलिए नारियल को  T चाहिए। करके ही रखना बहुरोगवृद्धयै शत्रुविवर्धनाय  বঙ্নননস अधोमुखं वित्तविनाशनाय   तस्माच्छुभं   सम्मुखनारिकेलम् प्राची - ShareChat
पृथ्वी लोक पर आठ वैकुंठ #🙏🏻सीता राम #हर हर महादेव
🙏🏻सीता राम - 4 న న भूवैकुण्ठ स्मरण 3{ 8 న 8) रंगसंज्ञकम्। নিমান रंगमिति प्रोक्तं आद्यं ٩٨٩ ١١ श्रीमुष्णं वेंकटाद्रिं शालिग्रामं 7 7 a तौताद्रिं पुष्करं नरनारायणाश्रमम्। ` #ಾಷ h7 Taಸಷ Il अष्टौ # ٦٨ मूर्तयः डति अष्टभवैकण्ठस्मरणं सम्पर्णम Il   II 4 న న भूवैकुण्ठ स्मरण 3{ 8 న 8) रंगसंज्ञकम्। নিমান रंगमिति प्रोक्तं आद्यं ٩٨٩ ١١ श्रीमुष्णं वेंकटाद्रिं शालिग्रामं 7 7 a तौताद्रिं पुष्करं नरनारायणाश्रमम्। ` #ಾಷ h7 Taಸಷ Il अष्टौ # ٦٨ मूर्तयः डति अष्टभवैकण्ठस्मरणं सम्पर्णम Il   II - ShareChat
परशुराम जयंती पर दान कैसे करे #हर हर महादेव #🙏🏻सीता राम
हर हर महादेव - वैशाखके व्रत अक्षयतृतीयाव्रत - इस दिन उपर्युक्त तीनों जयन्तियाँ एकः होनेसे व्रतीको चाहिये कि॰ वह प्रातःस्नानादिसे निवृत्त होकर ममाखिलपापक्षयपूर्वकसकलशुभफलप्राप्तये भगवत्प्रीतिकामनया देवत्रयपूजनमहं करिष्ये ' ऐसा संकल्प करके भगवान्का यथाविधिय करे। उन्हें पंचामृतसे स्नान करावे, षोडशोपचारसे सुगन्धित पूजन१ पुष्पमाला पहनावे और नैवेद्यमें नर-नारायणके निमित्त सेके हुए गेहूँका  'सत्तू ' परशुरामके निमित्त कोमल ककडी और जौया हयग्रीवके निमित्त भीगी हुई चनेकी दाल अर्पण करे। बन सक्ूँ या गंगास्नान करे और जौ३, तो उपवास तथा समुद्रस्नान बने हुए खाद्य सत्तू॰ दही-चावल ईखके रस और चने दूधके पदार्थ ( खाँड़, मावा, मिठाई आदि) एवं जलपूर्ण सुवर्ण तथा 31=< सब प्रकारके रस और  ग्रीष्म- ऋतुके धर्मघट कलश उपयोगी वस्तुओंका दान करे तथा पितृश्राद्ध करे और ब्राह्मणभोजन भी करावे यह सब यथाशक्ति करनेसे अनन्त फल होता है परशुराम-्जयन्ती   परशुरामजीका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीयाको रात्रिके प्रथम प्रहरमें हुआ था, अतः यह प्रदोषव्यापिनी ग्राह्य होती है यदि दो दिन प्रदोषव्यापिनी हो तो दूसरा व्रत करना चाहिये पश्यति तृतीयायां चन्दनभूषितम्। ಶ: कृष्णं वैशाखस्य यात्यच्युतमन्दिरम् II सिते पक्षे विष्णुधर्मोत्तरे  स विधिवल्लवणोदधौ युगादौ  तु 7{: HII २ प्राप्नोति गोसहस्रप्रदानस्य फलं ( पृथ्वीचन्द्रोदये सौरपुराणे  T,a: Il यवगोधूमचणकान्  दध्योदनं तथा 49 3 इक्षुक्षीरविकारांश्च  हिरण्यं स्वशक्तितः ।। ৭ सर्वरसैः उदकुम्भान् মন্ধ্োন सन्नान सह | ग्रैष्मिकं सर्वमेवात्र सस्यं दाने प्रशस्यते भविष्योत्तरे गन्धोदकतिलैर्मिश्रं फलान्वितम् | सान्नं कुम्भं ४ अक्षय्यमुपतिष्ठतु पितृभ्यः सम्प्रदास्यामि वि॰ ध॰ || व्रत-्परिचय ८२ 'मम ब्रह्मत्वप्राप्तिकामनया সনন্ধ নিন সান:-সানব্ধ ওনলং परशुरामपूजनमहं करिष्ये ' यह संकल्प करके सूर्यास्ततक मौन रखे और सायंकालमें पुनः स्नान करके परशुरामजीका पूजन करे तथा जमदग्निसुतो वीर क्षत्रियान्तकर प्रभो। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं कृपया परमेश्वर II ' इस मन्त्रसे अर्घ्य देकर रात्रिभर राममन्त्रका जप करे गौरीपजा  यह भी वैशाख शक्ल ततीयाको ही की ٢ वैशाखके व्रत अक्षयतृतीयाव्रत - इस दिन उपर्युक्त तीनों जयन्तियाँ एकः होनेसे व्रतीको चाहिये कि॰ वह प्रातःस्नानादिसे निवृत्त होकर ममाखिलपापक्षयपूर्वकसकलशुभफलप्राप्तये भगवत्प्रीतिकामनया देवत्रयपूजनमहं करिष्ये ' ऐसा संकल्प करके भगवान्का यथाविधिय करे। उन्हें पंचामृतसे स्नान करावे, षोडशोपचारसे सुगन्धित पूजन१ पुष्पमाला पहनावे और नैवेद्यमें नर-नारायणके निमित्त सेके हुए गेहूँका  'सत्तू ' परशुरामके निमित्त कोमल ककडी और जौया हयग्रीवके निमित्त भीगी हुई चनेकी दाल अर्पण करे। बन सक्ूँ या गंगास्नान करे और जौ३, तो उपवास तथा समुद्रस्नान बने हुए खाद्य सत्तू॰ दही-चावल ईखके रस और चने दूधके पदार्थ ( खाँड़, मावा, मिठाई आदि) एवं जलपूर्ण सुवर्ण तथा 31=< सब प्रकारके रस और  ग्रीष्म- ऋतुके धर्मघट कलश उपयोगी वस्तुओंका दान करे तथा पितृश्राद्ध करे और ब्राह्मणभोजन भी करावे यह सब यथाशक्ति करनेसे अनन्त फल होता है परशुराम-्जयन्ती   परशुरामजीका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीयाको रात्रिके प्रथम प्रहरमें हुआ था, अतः यह प्रदोषव्यापिनी ग्राह्य होती है यदि दो दिन प्रदोषव्यापिनी हो तो दूसरा व्रत करना चाहिये पश्यति तृतीयायां चन्दनभूषितम्। ಶ: कृष्णं वैशाखस्य यात्यच्युतमन्दिरम् II सिते पक्षे विष्णुधर्मोत्तरे  स विधिवल्लवणोदधौ युगादौ  तु 7{: HII २ प्राप्नोति गोसहस्रप्रदानस्य फलं ( पृथ्वीचन्द्रोदये सौरपुराणे  T,a: Il यवगोधूमचणकान्  दध्योदनं तथा 49 3 इक्षुक्षीरविकारांश्च  हिरण्यं स्वशक्तितः ।। ৭ सर्वरसैः उदकुम्भान् মন্ধ্োন सन्नान सह | ग्रैष्मिकं सर्वमेवात्र सस्यं दाने प्रशस्यते भविष्योत्तरे गन्धोदकतिलैर्मिश्रं फलान्वितम् | सान्नं कुम्भं ४ अक्षय्यमुपतिष्ठतु पितृभ्यः सम्प्रदास्यामि वि॰ ध॰ || व्रत-्परिचय ८२ 'मम ब्रह्मत्वप्राप्तिकामनया সনন্ধ নিন সান:-সানব্ধ ওনলং परशुरामपूजनमहं करिष्ये ' यह संकल्प करके सूर्यास्ततक मौन रखे और सायंकालमें पुनः स्नान करके परशुरामजीका पूजन करे तथा जमदग्निसुतो वीर क्षत्रियान्तकर प्रभो। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं कृपया परमेश्वर II ' इस मन्त्रसे अर्घ्य देकर रात्रिभर राममन्त्रका जप करे गौरीपजा  यह भी वैशाख शक्ल ततीयाको ही की ٢ - ShareChat
शंख को भगवान से किधर रखना चाहिए #🙏🏻सीता राम #हर हर महादेव
🙏🏻सीता राम - शंख जल से भरा शंख देवता के बांयी ओर स्थापित करें। शंख को जल में डुबोकर न भरें क्योंकि शंख के पीठ में लगा जल पाप संज्ञा वाला होता है। मज्जयेत् शंखं उद्धरिण्यां जले 7 ग्राह्यं जलं प्रकल्पयेत् ಗೆಕೆ || ٦٣ ஈுர் गृहणन्ति 7 तस्य शंख जल से भरा शंख देवता के बांयी ओर स्थापित करें। शंख को जल में डुबोकर न भरें क्योंकि शंख के पीठ में लगा जल पाप संज्ञा वाला होता है। मज्जयेत् शंखं उद्धरिण्यां जले 7 ग्राह्यं जलं प्रकल्पयेत् ಗೆಕೆ || ٦٣ ஈுர் गृहणन्ति 7 तस्य - ShareChat
पुजा और भोजन करते समय जल कहाँ रखना चाहिए #हर हर महादेव #🙏🏻सीता राम
हर हर महादेव - करते एउस कमपात्र कहत इरालिए  जिस लोटे के जल से पूजादि  Jur i ओर अर्थात् पूजक के बांयी ओर पहत  स्थापित  करके बायी कर्मपात्र कीही पूजा  करं। जलपान चह मदिरा तुल्य गाना जाता  में दांयी ओरजो पूजक रखता  इरलिए  Vুতা जलपूर्ण  के बांयी ओर तथा शोजनकाल गें शोजनकर्ता के दांयी 1 पूजक  দুতা ओर 01' 8| ढाना  चाहिए। মনানাম  पूजाकाले भोजने दक्षिणे 9 तु गोमांस 317 मदिरा तुल्यं तत्कालं भक्षणम् I (؟٦٢ Tf) पूजा में वेदमन्त्र एवं नाममन्त्र दोनों ग्रह्य PE--- 3- करते एउस कमपात्र कहत इरालिए  जिस लोटे के जल से पूजादि  Jur i ओर अर्थात् पूजक के बांयी ओर पहत  स्थापित  करके बायी कर्मपात्र कीही पूजा  करं। जलपान चह मदिरा तुल्य गाना जाता  में दांयी ओरजो पूजक रखता  इरलिए  Vুতা जलपूर्ण  के बांयी ओर तथा शोजनकाल गें शोजनकर्ता के दांयी 1 पूजक  দুতা ओर 01' 8| ढाना  चाहिए। মনানাম  पूजाकाले भोजने दक्षिणे 9 तु गोमांस 317 मदिरा तुल्यं तत्कालं भक्षणम् I (؟٦٢ Tf) पूजा में वेदमन्त्र एवं नाममन्त्र दोनों ग्रह्य PE--- 3- - ShareChat
भगवन नृसिंह ध्यान श्लोक #🙏🏻सीता राम #हर हर महादेव
🙏🏻सीता राम - भूखण्डं वारणाण्डं परवरविरटं डंपडंपोरुडंपं डिं डिं डिं डिं डिडिम्बं दहमपि झम्पझम्पैश्चझम्पैः दहमैः 4 धुमधुमधुमकैः कुङ्कुमाङ्कैःकुमाङ्कैः तुल्यास्तुल्यास्तु तुल्याः एतत्ते पूर्णयुक्तमहरहकरहः पातु मां नारसिंहः || भूखण्डं वारणाण्डं परवरविरटं डंपडंपोरुडंपं डिं डिं डिं डिं डिडिम्बं दहमपि झम्पझम्पैश्चझम्पैः दहमैः 4 धुमधुमधुमकैः कुङ्कुमाङ्कैःकुमाङ्कैः तुल्यास्तुल्यास्तु तुल्याः एतत्ते पूर्णयुक्तमहरहकरहः पातु मां नारसिंहः || - ShareChat