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परशुराम जयंती पर दान कैसे करे #हर हर महादेव #🙏🏻सीता राम
हर हर महादेव - वैशाखके व्रत अक्षयतृतीयाव्रत - इस दिन उपर्युक्त तीनों जयन्तियाँ एकः होनेसे व्रतीको चाहिये कि॰ वह प्रातःस्नानादिसे निवृत्त होकर ममाखिलपापक्षयपूर्वकसकलशुभफलप्राप्तये भगवत्प्रीतिकामनया देवत्रयपूजनमहं करिष्ये ' ऐसा संकल्प करके भगवान्का यथाविधिय करे। उन्हें पंचामृतसे स्नान करावे, षोडशोपचारसे सुगन्धित पूजन१ पुष्पमाला पहनावे और नैवेद्यमें नर-नारायणके निमित्त सेके हुए गेहूँका  'सत्तू ' परशुरामके निमित्त कोमल ककडी और जौया हयग्रीवके निमित्त भीगी हुई चनेकी दाल अर्पण करे। बन सक्ूँ या गंगास्नान करे और जौ३, तो उपवास तथा समुद्रस्नान बने हुए खाद्य सत्तू॰ दही-चावल ईखके रस और चने दूधके पदार्थ ( खाँड़, मावा, मिठाई आदि) एवं जलपूर्ण सुवर्ण तथा 31=< सब प्रकारके रस और  ग्रीष्म- ऋतुके धर्मघट कलश उपयोगी वस्तुओंका दान करे तथा पितृश्राद्ध करे और ब्राह्मणभोजन भी करावे यह सब यथाशक्ति करनेसे अनन्त फल होता है परशुराम-्जयन्ती   परशुरामजीका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीयाको रात्रिके प्रथम प्रहरमें हुआ था, अतः यह प्रदोषव्यापिनी ग्राह्य होती है यदि दो दिन प्रदोषव्यापिनी हो तो दूसरा व्रत करना चाहिये पश्यति तृतीयायां चन्दनभूषितम्। ಶ: कृष्णं वैशाखस्य यात्यच्युतमन्दिरम् II सिते पक्षे विष्णुधर्मोत्तरे  स विधिवल्लवणोदधौ युगादौ  तु 7{: HII २ प्राप्नोति गोसहस्रप्रदानस्य फलं ( पृथ्वीचन्द्रोदये सौरपुराणे  T,a: Il यवगोधूमचणकान्  दध्योदनं तथा 49 3 इक्षुक्षीरविकारांश्च  हिरण्यं स्वशक्तितः ।। ৭ सर्वरसैः उदकुम्भान् মন্ধ্োন सन्नान सह | ग्रैष्मिकं सर्वमेवात्र सस्यं दाने प्रशस्यते भविष्योत्तरे गन्धोदकतिलैर्मिश्रं फलान्वितम् | सान्नं कुम्भं ४ अक्षय्यमुपतिष्ठतु पितृभ्यः सम्प्रदास्यामि वि॰ ध॰ || व्रत-्परिचय ८२ 'मम ब्रह्मत्वप्राप्तिकामनया সনন্ধ নিন সান:-সানব্ধ ওনলং परशुरामपूजनमहं करिष्ये ' यह संकल्प करके सूर्यास्ततक मौन रखे और सायंकालमें पुनः स्नान करके परशुरामजीका पूजन करे तथा जमदग्निसुतो वीर क्षत्रियान्तकर प्रभो। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं कृपया परमेश्वर II ' इस मन्त्रसे अर्घ्य देकर रात्रिभर राममन्त्रका जप करे गौरीपजा  यह भी वैशाख शक्ल ततीयाको ही की ٢ वैशाखके व्रत अक्षयतृतीयाव्रत - इस दिन उपर्युक्त तीनों जयन्तियाँ एकः होनेसे व्रतीको चाहिये कि॰ वह प्रातःस्नानादिसे निवृत्त होकर ममाखिलपापक्षयपूर्वकसकलशुभफलप्राप्तये भगवत्प्रीतिकामनया देवत्रयपूजनमहं करिष्ये ' ऐसा संकल्प करके भगवान्का यथाविधिय करे। उन्हें पंचामृतसे स्नान करावे, षोडशोपचारसे सुगन्धित पूजन१ पुष्पमाला पहनावे और नैवेद्यमें नर-नारायणके निमित्त सेके हुए गेहूँका  'सत्तू ' परशुरामके निमित्त कोमल ककडी और जौया हयग्रीवके निमित्त भीगी हुई चनेकी दाल अर्पण करे। बन सक्ूँ या गंगास्नान करे और जौ३, तो उपवास तथा समुद्रस्नान बने हुए खाद्य सत्तू॰ दही-चावल ईखके रस और चने दूधके पदार्थ ( खाँड़, मावा, मिठाई आदि) एवं जलपूर्ण सुवर्ण तथा 31=< सब प्रकारके रस और  ग्रीष्म- ऋतुके धर्मघट कलश उपयोगी वस्तुओंका दान करे तथा पितृश्राद्ध करे और ब्राह्मणभोजन भी करावे यह सब यथाशक्ति करनेसे अनन्त फल होता है परशुराम-्जयन्ती   परशुरामजीका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीयाको रात्रिके प्रथम प्रहरमें हुआ था, अतः यह प्रदोषव्यापिनी ग्राह्य होती है यदि दो दिन प्रदोषव्यापिनी हो तो दूसरा व्रत करना चाहिये पश्यति तृतीयायां चन्दनभूषितम्। ಶ: कृष्णं वैशाखस्य यात्यच्युतमन्दिरम् II सिते पक्षे विष्णुधर्मोत्तरे  स विधिवल्लवणोदधौ युगादौ  तु 7{: HII २ प्राप्नोति गोसहस्रप्रदानस्य फलं ( पृथ्वीचन्द्रोदये सौरपुराणे  T,a: Il यवगोधूमचणकान्  दध्योदनं तथा 49 3 इक्षुक्षीरविकारांश्च  हिरण्यं स्वशक्तितः ।। ৭ सर्वरसैः उदकुम्भान् মন্ধ্োন सन्नान सह | ग्रैष्मिकं सर्वमेवात्र सस्यं दाने प्रशस्यते भविष्योत्तरे गन्धोदकतिलैर्मिश्रं फलान्वितम् | सान्नं कुम्भं ४ अक्षय्यमुपतिष्ठतु पितृभ्यः सम्प्रदास्यामि वि॰ ध॰ || व्रत-्परिचय ८२ 'मम ब्रह्मत्वप्राप्तिकामनया সনন্ধ নিন সান:-সানব্ধ ওনলং परशुरामपूजनमहं करिष्ये ' यह संकल्प करके सूर्यास्ततक मौन रखे और सायंकालमें पुनः स्नान करके परशुरामजीका पूजन करे तथा जमदग्निसुतो वीर क्षत्रियान्तकर प्रभो। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं कृपया परमेश्वर II ' इस मन्त्रसे अर्घ्य देकर रात्रिभर राममन्त्रका जप करे गौरीपजा  यह भी वैशाख शक्ल ततीयाको ही की ٢ - ShareChat