ShareChat
click to see wallet page
search
#📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #📖 कविता और कोट्स✒️ #📽️रविवार शायरी✍️ #💞Heart touching शायरी✍️
📓 हिंदी साहित्य - ४ख़ामोश ज़ख़्म" कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, जिंदगी एक नज़्म लगती है। जैसे कर्ज़ में डूबी, हर हँसी भी गरज़ लगती है। खुशी हर कतराती लगती है। भीड़ में नाम तक नहीं मेरा, हर नज़र मुझसे वक़्त की रेत हाथ से फिसली , हर घड़ी मुझसे रूठती लगती है। ख़्वाब आँखों में जलते रहते हैं, नींद भी अब पराई लगती है। चुपचाप ढहती रहती है, सुबह भी कुछ थकी लगती है। যন दिल के अंदर धुआँ सा उठता है, हर हवा भी ख़फ़ा सी लगती है। कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है। @gupta_ji_7232 ४ख़ामोश ज़ख़्म" कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, जिंदगी एक नज़्म लगती है। जैसे कर्ज़ में डूबी, हर हँसी भी गरज़ लगती है। खुशी हर कतराती लगती है। भीड़ में नाम तक नहीं मेरा, हर नज़र मुझसे वक़्त की रेत हाथ से फिसली , हर घड़ी मुझसे रूठती लगती है। ख़्वाब आँखों में जलते रहते हैं, नींद भी अब पराई लगती है। चुपचाप ढहती रहती है, सुबह भी कुछ थकी लगती है। যন दिल के अंदर धुआँ सा उठता है, हर हवा भी ख़फ़ा सी लगती है। कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है। @gupta_ji_7232 - ShareChat