Gupta Ji
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#💞Heart touching शायरी✍️ #💓सोमवार शायरी✍️ ##️⃣DilShayarana💘 #🥰लव शायरी😘 #💝 इज़हार-ए-मोहब्बत
💞Heart touching शायरी✍️ - uotein Yourl तेरा ज़िक्र ' कभी तेरी आँखों की बात लिखूँ, कभी तेरी मुस्कान का एहसास लिखूँ । मेरे लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं हर बार, जब तेरी मोहब्बत को काग़ज़ पर उतारने की कोशिश करूँ। तू पास हो तो वक़्त ठहर ्सा जाता है, हर लम्हा जैसे ख़ूबसूरत नज़र आता है। यूँ तो बहुत लोग मिले इस ज़िंदगी में , मगर तेरे जैसा कोई दिल को नहीं भाता है। तेरा ज़िक्र आते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, बिना किसी वजह के भी छा जाती है। % ये इश्क़ है या कोई ख़ूबसूरत इबादत, तेरी याद आते ही रूह तक महक जाती है। Gupta Ji uotein Yourl तेरा ज़िक्र ' कभी तेरी आँखों की बात लिखूँ, कभी तेरी मुस्कान का एहसास लिखूँ । मेरे लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं हर बार, जब तेरी मोहब्बत को काग़ज़ पर उतारने की कोशिश करूँ। तू पास हो तो वक़्त ठहर ्सा जाता है, हर लम्हा जैसे ख़ूबसूरत नज़र आता है। यूँ तो बहुत लोग मिले इस ज़िंदगी में , मगर तेरे जैसा कोई दिल को नहीं भाता है। तेरा ज़िक्र आते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, बिना किसी वजह के भी छा जाती है। % ये इश्क़ है या कोई ख़ूबसूरत इबादत, तेरी याद आते ही रूह तक महक जाती है। Gupta Ji - ShareChat
#📽️रविवार शायरी✍️ #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #🖋कहानी: टूटे दिल की💔 #😒दर्द भरी शायरी🌸
📽️रविवार शायरी✍️ - uote.in Your মৌয রূানিল মীযা ঔণনা থা" ऐसे ही नहीं मरा मैं, कोई मेरा क़ातिल था, जो कभी मेरा था, वो किसी और को भी हासिल था। वाक़िफ़ था मैं पहले ही इस दिल की हक़ीक़त से, मेरे दिल में बसने वाला, उसके दिल में कोई और भी शामिल था। भी मोहब्बत की राह में ख़ुद को लुटाता रहा, फ हर झूठी मुस्कान को मैं सच्चा बताता रहा। वो मेरी वफ़ाओं का हिसाब क्या देता , जिसकी चाहतों में ही कोई और शामिल था। आख़िर एक दिन टूटकर बिखर गया मैं, अपने ही ख़्वाबों के मलबे में दब गया मैं। लोग पूछते हैं वजह मेरी इस ख़ामोशी की, कैसे बताऊँ , मेरा क़ातिल वही था जो कभी मेरा हासिल था। Gupta Ji HATE NOTHING ABOUT U uote.in Your মৌয রূানিল মীযা ঔণনা থা" ऐसे ही नहीं मरा मैं, कोई मेरा क़ातिल था, जो कभी मेरा था, वो किसी और को भी हासिल था। वाक़िफ़ था मैं पहले ही इस दिल की हक़ीक़त से, मेरे दिल में बसने वाला, उसके दिल में कोई और भी शामिल था। भी मोहब्बत की राह में ख़ुद को लुटाता रहा, फ हर झूठी मुस्कान को मैं सच्चा बताता रहा। वो मेरी वफ़ाओं का हिसाब क्या देता , जिसकी चाहतों में ही कोई और शामिल था। आख़िर एक दिन टूटकर बिखर गया मैं, अपने ही ख़्वाबों के मलबे में दब गया मैं। लोग पूछते हैं वजह मेरी इस ख़ामोशी की, कैसे बताऊँ , मेरा क़ातिल वही था जो कभी मेरा हासिल था। Gupta Ji HATE NOTHING ABOUT U - ShareChat
#📽️रविवार शायरी✍️ #💞Heart touching शायरी✍️ ##️⃣DilShayarana💘 #👍स्पेशल शायरी🖋 #🥰लव कोट्स🌹
📽️रविवार शायरी✍️ - कहें तो कैसे ' नज़र मिले तो मिले किससे, और अगर मिल भी जाए तो मिलाए कैसे , दिल की बात लबों तक आए भी तो, इस झिझक को भला हम जताए कैसे। अजनबी चेहरों की इस भीड़ में, किसे अपना कहकर बुलाए कैसे, बस एक एहसासन्सा दिल में ठहरा है, उस एहसास को नाम दिलाए कैसे। न कोई रिश्ता , न कोई पहचान अभी, फिर ख़्वाबों को हक़ीक़त बनाए कैसे, नज़र मिले तो मिले किससे, নিলাব' कैसे। और अगर मिल भी जाए तो Gupta Ji Your uotein कहें तो कैसे ' नज़र मिले तो मिले किससे, और अगर मिल भी जाए तो मिलाए कैसे , दिल की बात लबों तक आए भी तो, इस झिझक को भला हम जताए कैसे। अजनबी चेहरों की इस भीड़ में, किसे अपना कहकर बुलाए कैसे, बस एक एहसासन्सा दिल में ठहरा है, उस एहसास को नाम दिलाए कैसे। न कोई रिश्ता , न कोई पहचान अभी, फिर ख़्वाबों को हक़ीक़त बनाए कैसे, नज़र मिले तो मिले किससे, নিলাব' कैसे। और अगर मिल भी जाए तो Gupta Ji Your uotein - ShareChat
#📓 हिंदी साहित्य #📖 कविता और कोट्स✒️ #💞Heart touching शायरी✍️ #📚कविता-कहानी संग्रह #🤞गुरूवार शायरी✍️
📓 हिंदी साहित्य - दर्द की अदा  दर्द की भी अपनी एक अदा है, वो भी सहने वालों पर फ़़िदा है। हर किसी के हिस्से में कहाँ आता है, ये तो दिल वालों का ही सिलसिला है। ज़ख्म देकर भी अक्सर मुस्कुराता है, दर्द का भी अजीब फ़लसफ़ा है। जो ख़ामोशी से इसे अपना लेते हैं, उन्हीं के नाम इसका हर गिला है। लोग समझें चाहे इसे बदनसीबी , हमने जाना कि, यही जीने की वजह है। Gupta Ji Day NaPoWriMo 1: #BeingAlonePoem uotein Your दर्द की अदा  दर्द की भी अपनी एक अदा है, वो भी सहने वालों पर फ़़िदा है। हर किसी के हिस्से में कहाँ आता है, ये तो दिल वालों का ही सिलसिला है। ज़ख्म देकर भी अक्सर मुस्कुराता है, दर्द का भी अजीब फ़लसफ़ा है। जो ख़ामोशी से इसे अपना लेते हैं, उन्हीं के नाम इसका हर गिला है। लोग समझें चाहे इसे बदनसीबी , हमने जाना कि, यही जीने की वजह है। Gupta Ji Day NaPoWriMo 1: #BeingAlonePoem uotein Your - ShareChat
#💞Heart touching शायरी✍️ #📚कविता-कहानी संग्रह #📖 कविता और कोट्स✒️ #📓 हिंदी साहित्य #💓सोमवार शायरी✍️
💞Heart touching शायरी✍️ - झिझक के फ़ासले ' भला हम मिले भी तो क्या मिले, वही दूरियाँ, वही फ़ासले, न कभी हमारे क़दम बढ़े, न कभी झिझक गई। तुम्हारी यूँ तो कई दफ़ा रूबरू हुए, कई बातें भी हुईं मगर, जो बात दिल से निकलनी थी, वही दिल में ही अटक गई। नज़र से नज़र तो मिली बहुत, मगर बात आगे बढ़ी नहीं , मेरे लबों पे ठहरी रही, तेरे होंठों तक पहुँच न सकी। कभी मैंने दिल को समझा लिया, कभी ख़ुद को रोक लिया, নুসন यूँ ही वक़्त की हर एक लहर, किनारों से आकर पलट गई। न कोई शिकवा, न कोई गिला, न कोई शिकायत रही मगर, जो एक कमी थी हमारे बीच, वही उम्र भर न सिमट गई। भला हम मिले भी तो क्या मिले, वही दूरियाँ, वही फ़ासले, कभी हमारे क़दम बढ़े, न कभी झिझक गई। तुम्हारी न Your uote.in Gupta Ji झिझक के फ़ासले ' भला हम मिले भी तो क्या मिले, वही दूरियाँ, वही फ़ासले, न कभी हमारे क़दम बढ़े, न कभी झिझक गई। तुम्हारी यूँ तो कई दफ़ा रूबरू हुए, कई बातें भी हुईं मगर, जो बात दिल से निकलनी थी, वही दिल में ही अटक गई। नज़र से नज़र तो मिली बहुत, मगर बात आगे बढ़ी नहीं , मेरे लबों पे ठहरी रही, तेरे होंठों तक पहुँच न सकी। कभी मैंने दिल को समझा लिया, कभी ख़ुद को रोक लिया, নুসন यूँ ही वक़्त की हर एक लहर, किनारों से आकर पलट गई। न कोई शिकवा, न कोई गिला, न कोई शिकायत रही मगर, जो एक कमी थी हमारे बीच, वही उम्र भर न सिमट गई। भला हम मिले भी तो क्या मिले, वही दूरियाँ, वही फ़ासले, कभी हमारे क़दम बढ़े, न कभी झिझक गई। तुम्हारी न Your uote.in Gupta Ji - ShareChat
#📽️रविवार शायरी✍️ #📓 हिंदी साहित्य #📖 कविता और कोट्स✒️ #📚कविता-कहानी संग्रह #💞Heart touching शायरी✍️
📽️रविवार शायरी✍️ - मैं ख़ुद " "हमसफ़र ज़िंदगी यूँ ही बसर हुई तन्हा ्तन्हा, क़ाफ़िला साथ था, मगर सफ़र रहा तन्हा ्तन्हा। हर किसी से हँस के मिलता रहा मैं उम्र भर, अपने अंदर का मगर हर डर रहा तन्हान्तन्हा। लोग समझे कि मुझे कोई परेशानी नहीं, 434' दिल के कोने दर्द रहा तन्हा ्तन्हा। अपनी ख़्वाहिश को भी अक्सर मैं दबाता ही रहा, मेरे हिस्से का हर एक ख़्वाब रहा तन्हान्तन्हा। वक़्त ने मुझको बहुत कुछ सिखाया है मगर, हर सबक़ के साथ मेरा सफर रहा तन्हा ्तन्हा। मैंने खुद अपना सहारा बन के जीना सीख लिया, जब कोई साथ न था, हमसफ़र रहा तन्हान्तन्हा। ज़िंदगी यूँ ही बसर हुई तन्हा तन्हा, क़ाफ़िला साथ था, मगर सफ़र रहा तन्हा ्तन्हा। Gupta Ji Your uotein मैं ख़ुद " "हमसफ़र ज़िंदगी यूँ ही बसर हुई तन्हा ्तन्हा, क़ाफ़िला साथ था, मगर सफ़र रहा तन्हा ्तन्हा। हर किसी से हँस के मिलता रहा मैं उम्र भर, अपने अंदर का मगर हर डर रहा तन्हान्तन्हा। लोग समझे कि मुझे कोई परेशानी नहीं, 434' दिल के कोने दर्द रहा तन्हा ्तन्हा। अपनी ख़्वाहिश को भी अक्सर मैं दबाता ही रहा, मेरे हिस्से का हर एक ख़्वाब रहा तन्हान्तन्हा। वक़्त ने मुझको बहुत कुछ सिखाया है मगर, हर सबक़ के साथ मेरा सफर रहा तन्हा ्तन्हा। मैंने खुद अपना सहारा बन के जीना सीख लिया, जब कोई साथ न था, हमसफ़र रहा तन्हान्तन्हा। ज़िंदगी यूँ ही बसर हुई तन्हा तन्हा, क़ाफ़िला साथ था, मगर सफ़र रहा तन्हा ्तन्हा। Gupta Ji Your uotein - ShareChat
#📽️रविवार शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #💞Heart touching शायरी✍️ #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य
📽️रविवार शायरी✍️ - গয যা নিল" सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है। भीड़ में भी ये दिल अकेला है, हर तरफ़ शोर, पर अँधेरा है। मुस्कुराहट लबों पे रखता हूँ, आँख में दर्द छुपा सा रहता है। कोई अपना नहीं मिला शायद, इसलिए मन बुझा सा रहता है। Gupta Ji uote.in Yourl গয যা নিল" सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है। भीड़ में भी ये दिल अकेला है, हर तरफ़ शोर, पर अँधेरा है। मुस्कुराहट लबों पे रखता हूँ, आँख में दर्द छुपा सा रहता है। कोई अपना नहीं मिला शायद, इसलिए मन बुझा सा रहता है। Gupta Ji uote.in Yourl - ShareChat
#📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #💞Heart touching शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #📽️रविवार शायरी✍️
📓 हिंदी साहित्य - ्धूप पैमाने में ' থাযন থীভা বর লযী, गुज़रते I धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में। दिल की बर्फ़ अभी पूरी पिघली कहाँ , कुछ हरारत रखो अपने अफ़साने में। নিন; ज़ख़्म बोलेंगे ख़ुद अपनी ज़ुबान एक दर्द को मत रखो यूँ तहख़ाने में। वक़्त की धूल से चेहरे धुँधले सही , रूह बची रहती है वीराने में। Gupta Ji Your uotein ्धूप पैमाने में ' থাযন থীভা বর লযী, गुज़रते I धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में। दिल की बर्फ़ अभी पूरी पिघली कहाँ , कुछ हरारत रखो अपने अफ़साने में। নিন; ज़ख़्म बोलेंगे ख़ुद अपनी ज़ुबान एक दर्द को मत रखो यूँ तहख़ाने में। वक़्त की धूल से चेहरे धुँधले सही , रूह बची रहती है वीराने में। Gupta Ji Your uotein - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️ #💞Heart touching शायरी✍️ #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य #🤞गुरूवार शायरी✍️
📖 कविता और कोट्स✒️ - uote.in Your रात के रेज़े ' भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों में उजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं। झपकती आँखों में चेहरों की धुंध तैरती है, इसी धुंध में कई रिश्ते भटकते रहते हैं। भटकते रिश्तों का हासिल भी अब धुआँ-सा है, सो अपने हाथ हम अक्सर ही मलते रहते हैं। ये हाथ : जब किसी दर पर सवाल रखते हैं, तो बंद दर हमें चुपचाप तकते रहते हैं। उन्हीं बंद दरों की ख़ामोशियों से डरकर हम , हर एक शोर से भीतर सिहरते रहते हैं। ये सिहरनें ही हमें रात भर जगाती हैं, और सुबह होते ही हम आँखें झपकते रहते हैं। Gupta Ji uote.in Your रात के रेज़े ' भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों में उजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं। झपकती आँखों में चेहरों की धुंध तैरती है, इसी धुंध में कई रिश्ते भटकते रहते हैं। भटकते रिश्तों का हासिल भी अब धुआँ-सा है, सो अपने हाथ हम अक्सर ही मलते रहते हैं। ये हाथ : जब किसी दर पर सवाल रखते हैं, तो बंद दर हमें चुपचाप तकते रहते हैं। उन्हीं बंद दरों की ख़ामोशियों से डरकर हम , हर एक शोर से भीतर सिहरते रहते हैं। ये सिहरनें ही हमें रात भर जगाती हैं, और सुबह होते ही हम आँखें झपकते रहते हैं। Gupta Ji - ShareChat
#📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #📖 कविता और कोट्स✒️ #📽️रविवार शायरी✍️ #💞Heart touching शायरी✍️
📓 हिंदी साहित्य - ४ख़ामोश ज़ख़्म" कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, जिंदगी एक नज़्म लगती है। जैसे कर्ज़ में डूबी, हर हँसी भी गरज़ लगती है। खुशी हर कतराती लगती है। भीड़ में नाम तक नहीं मेरा, हर नज़र मुझसे वक़्त की रेत हाथ से फिसली , हर घड़ी मुझसे रूठती लगती है। ख़्वाब आँखों में जलते रहते हैं, नींद भी अब पराई लगती है। चुपचाप ढहती रहती है, सुबह भी कुछ थकी लगती है। যন दिल के अंदर धुआँ सा उठता है, हर हवा भी ख़फ़ा सी लगती है। कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है। @gupta_ji_7232 ४ख़ामोश ज़ख़्म" कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, जिंदगी एक नज़्म लगती है। जैसे कर्ज़ में डूबी, हर हँसी भी गरज़ लगती है। खुशी हर कतराती लगती है। भीड़ में नाम तक नहीं मेरा, हर नज़र मुझसे वक़्त की रेत हाथ से फिसली , हर घड़ी मुझसे रूठती लगती है। ख़्वाब आँखों में जलते रहते हैं, नींद भी अब पराई लगती है। चुपचाप ढहती रहती है, सुबह भी कुछ थकी लगती है। যন दिल के अंदर धुआँ सा उठता है, हर हवा भी ख़फ़ा सी लगती है। कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है। @gupta_ji_7232 - ShareChat