Gupta Ji
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#📽️रविवार शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #💞Heart touching शायरी✍️ #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य
📽️रविवार शायरी✍️ - গয যা নিল" सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है। भीड़ में भी ये दिल अकेला है, हर तरफ़ शोर, पर अँधेरा है। मुस्कुराहट लबों पे रखता हूँ, आँख में दर्द छुपा सा रहता है। कोई अपना नहीं मिला शायद, इसलिए मन बुझा सा रहता है। Gupta Ji uote.in Yourl গয যা নিল" सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है। भीड़ में भी ये दिल अकेला है, हर तरफ़ शोर, पर अँधेरा है। मुस्कुराहट लबों पे रखता हूँ, आँख में दर्द छुपा सा रहता है। कोई अपना नहीं मिला शायद, इसलिए मन बुझा सा रहता है। Gupta Ji uote.in Yourl - ShareChat
#📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #💞Heart touching शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #📽️रविवार शायरी✍️
📓 हिंदी साहित्य - ्धूप पैमाने में ' থাযন থীভা বর লযী, गुज़रते I धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में। दिल की बर्फ़ अभी पूरी पिघली कहाँ , कुछ हरारत रखो अपने अफ़साने में। নিন; ज़ख़्म बोलेंगे ख़ुद अपनी ज़ुबान एक दर्द को मत रखो यूँ तहख़ाने में। वक़्त की धूल से चेहरे धुँधले सही , रूह बची रहती है वीराने में। Gupta Ji Your uotein ्धूप पैमाने में ' থাযন থীভা বর লযী, गुज़रते I धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में। दिल की बर्फ़ अभी पूरी पिघली कहाँ , कुछ हरारत रखो अपने अफ़साने में। নিন; ज़ख़्म बोलेंगे ख़ुद अपनी ज़ुबान एक दर्द को मत रखो यूँ तहख़ाने में। वक़्त की धूल से चेहरे धुँधले सही , रूह बची रहती है वीराने में। Gupta Ji Your uotein - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️ #💞Heart touching शायरी✍️ #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य #🤞गुरूवार शायरी✍️
📖 कविता और कोट्स✒️ - uote.in Your रात के रेज़े ' भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों में उजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं। झपकती आँखों में चेहरों की धुंध तैरती है, इसी धुंध में कई रिश्ते भटकते रहते हैं। भटकते रिश्तों का हासिल भी अब धुआँ-सा है, सो अपने हाथ हम अक्सर ही मलते रहते हैं। ये हाथ : जब किसी दर पर सवाल रखते हैं, तो बंद दर हमें चुपचाप तकते रहते हैं। उन्हीं बंद दरों की ख़ामोशियों से डरकर हम , हर एक शोर से भीतर सिहरते रहते हैं। ये सिहरनें ही हमें रात भर जगाती हैं, और सुबह होते ही हम आँखें झपकते रहते हैं। Gupta Ji uote.in Your रात के रेज़े ' भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों में उजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं। झपकती आँखों में चेहरों की धुंध तैरती है, इसी धुंध में कई रिश्ते भटकते रहते हैं। भटकते रिश्तों का हासिल भी अब धुआँ-सा है, सो अपने हाथ हम अक्सर ही मलते रहते हैं। ये हाथ : जब किसी दर पर सवाल रखते हैं, तो बंद दर हमें चुपचाप तकते रहते हैं। उन्हीं बंद दरों की ख़ामोशियों से डरकर हम , हर एक शोर से भीतर सिहरते रहते हैं। ये सिहरनें ही हमें रात भर जगाती हैं, और सुबह होते ही हम आँखें झपकते रहते हैं। Gupta Ji - ShareChat
#📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #📖 कविता और कोट्स✒️ #📽️रविवार शायरी✍️ #💞Heart touching शायरी✍️
📓 हिंदी साहित्य - ४ख़ामोश ज़ख़्म" कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, जिंदगी एक नज़्म लगती है। जैसे कर्ज़ में डूबी, हर हँसी भी गरज़ लगती है। खुशी हर कतराती लगती है। भीड़ में नाम तक नहीं मेरा, हर नज़र मुझसे वक़्त की रेत हाथ से फिसली , हर घड़ी मुझसे रूठती लगती है। ख़्वाब आँखों में जलते रहते हैं, नींद भी अब पराई लगती है। चुपचाप ढहती रहती है, सुबह भी कुछ थकी लगती है। যন दिल के अंदर धुआँ सा उठता है, हर हवा भी ख़फ़ा सी लगती है। कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है। @gupta_ji_7232 ४ख़ामोश ज़ख़्म" कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, जिंदगी एक नज़्म लगती है। जैसे कर्ज़ में डूबी, हर हँसी भी गरज़ लगती है। खुशी हर कतराती लगती है। भीड़ में नाम तक नहीं मेरा, हर नज़र मुझसे वक़्त की रेत हाथ से फिसली , हर घड़ी मुझसे रूठती लगती है। ख़्वाब आँखों में जलते रहते हैं, नींद भी अब पराई लगती है। चुपचाप ढहती रहती है, सुबह भी कुछ थकी लगती है। যন दिल के अंदर धुआँ सा उठता है, हर हवा भी ख़फ़ा सी लगती है। कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है, ज़िंदगी एक नज़्म लगती है। @gupta_ji_7232 - ShareChat
#📽️रविवार शायरी✍️ #💞Heart touching शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य
📽️रविवार शायरी✍️ - 6fl4' से भारी ख़्वाब : चाँद रातों के ख़्वाब उम्र भर की नींद माँगते हैं, कुछ अधूरी सी हसरतें भी चुपके चुपके ज़ख़्म बाँटते हैं। इन ख़ामोश राहों में कदम अक्सर ठहर जाते हैं, ख़ामोश गलियों की धड़कन में कुछ सवाल भटक जाते हैं, हुई सी यादों में फिर उजाले से भर जाते हैं। बुझी  जो लम्हे यूँ ही गुज़र गए, वो अब भी दिल में जागते हैं, हम तो सोना चाहते हैं मगर ख़्वाब ही हमें जगाते हैं। आख़िर थक कर ये ख़्वाब भी ख़ुद में सिमट जाते हैं, g बस, ख़ामोशी में रह जाते हैंIl हम अधूरी सी नींद ' Gupta Ji Your uotein 6fl4' से भारी ख़्वाब : चाँद रातों के ख़्वाब उम्र भर की नींद माँगते हैं, कुछ अधूरी सी हसरतें भी चुपके चुपके ज़ख़्म बाँटते हैं। इन ख़ामोश राहों में कदम अक्सर ठहर जाते हैं, ख़ामोश गलियों की धड़कन में कुछ सवाल भटक जाते हैं, हुई सी यादों में फिर उजाले से भर जाते हैं। बुझी  जो लम्हे यूँ ही गुज़र गए, वो अब भी दिल में जागते हैं, हम तो सोना चाहते हैं मगर ख़्वाब ही हमें जगाते हैं। आख़िर थक कर ये ख़्वाब भी ख़ुद में सिमट जाते हैं, g बस, ख़ामोशी में रह जाते हैंIl हम अधूरी सी नींद ' Gupta Ji Your uotein - ShareChat
#✌️शुक्रवार शायरी✍️ #💞Heart touching शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह
✌️शुक्रवार शायरी✍️ - रफ़ू की हुई ज़िंदगी ' थोड़ा सा रफ़ू करके देखिए ना, फिर से नई सी लगेगी ये ज़िंदगी , कुछ टूटे धागे फिर जुड़ जाएंगे , कुछ फीके रंग भी खिल उठेंगे अभी, जो सिलवटें हैं दिल की चुपचाप , वो भी मुस्कुराकर मिट जाएंगी , बस हौसले की सुई थाम लीजिए, हर कमी खुद ब-खुद भर जाएगी। Gupta Ji Your uote.in रफ़ू की हुई ज़िंदगी ' थोड़ा सा रफ़ू करके देखिए ना, फिर से नई सी लगेगी ये ज़िंदगी , कुछ टूटे धागे फिर जुड़ जाएंगे , कुछ फीके रंग भी खिल उठेंगे अभी, जो सिलवटें हैं दिल की चुपचाप , वो भी मुस्कुराकर मिट जाएंगी , बस हौसले की सुई थाम लीजिए, हर कमी खुद ब-खुद भर जाएगी। Gupta Ji Your uote.in - ShareChat
#✌️शुक्रवार शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #😒दर्द भरी शायरी🌸
✌️शुक्रवार शायरी✍️ - Your uote.in "कच्चे मकान की दुआएँ' खबर सबको थी मेरे कच्चे मकान की, फिर लोगों ने दुआओं में सिर्फ़ बरसात ही मांगी। में थे दीयों के उजाले , जिनके ೯೫ उन्हीं आँखों ने मेरी हर रात ही मांगी। मैंने चाहा था थोड़ा सा आसमान , ज़मीं भी मेरे हालात ही मांगी। उन्होंने जो खड़े थे मेरे साथ होने का दावा लिए वक़्त आया तो उन्होंने मेरी मात ही मांगी। ख़ामोशी को समझ बैठे वो कमज़ोरी , हर बात पे उन्होंने मेरी औक़ात ही मांगी। गई है टूट कर संभलने की, अब तो आदत सी हो लोगों ने हर दुआ में मेरी हर बार हार ही मांगी। Gupta Ji Your uote.in "कच्चे मकान की दुआएँ' खबर सबको थी मेरे कच्चे मकान की, फिर लोगों ने दुआओं में सिर्फ़ बरसात ही मांगी। में थे दीयों के उजाले , जिनके ೯೫ उन्हीं आँखों ने मेरी हर रात ही मांगी। मैंने चाहा था थोड़ा सा आसमान , ज़मीं भी मेरे हालात ही मांगी। उन्होंने जो खड़े थे मेरे साथ होने का दावा लिए वक़्त आया तो उन्होंने मेरी मात ही मांगी। ख़ामोशी को समझ बैठे वो कमज़ोरी , हर बात पे उन्होंने मेरी औक़ात ही मांगी। गई है टूट कर संभलने की, अब तो आदत सी हो लोगों ने हर दुआ में मेरी हर बार हार ही मांगी। Gupta Ji - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #🙏बुधवार शायरी✍️
📖 कविता और कोट्स✒️ - "दर्द हल्का , पर सांसें भारी" दर्द हल्का है पर सांसें भारी हैं, जीने की रस्म अभी जारी है। हर लम्हा जैसे कर्ज़ सा लगता है, फिर भी उम्मीदों की पोटली हमारी है। खामोशियों में शोर बहुत है, दिल की गलियों में वीरानी सारी है। टूटकर भी खुद को जोड़ रहा हूँ, ये जिद भी कितनी अजीब हमारी है। रातों से अब दोस्ती सी हो गई, नींद से जैसे कोई दुश्मनी जारी है। गिरकर फिर उठ जाना ही सीखा है, शायद यही जीने की तैयारी है। Gupta Ji Your uote.in "दर्द हल्का , पर सांसें भारी" दर्द हल्का है पर सांसें भारी हैं, जीने की रस्म अभी जारी है। हर लम्हा जैसे कर्ज़ सा लगता है, फिर भी उम्मीदों की पोटली हमारी है। खामोशियों में शोर बहुत है, दिल की गलियों में वीरानी सारी है। टूटकर भी खुद को जोड़ रहा हूँ, ये जिद भी कितनी अजीब हमारी है। रातों से अब दोस्ती सी हो गई, नींद से जैसे कोई दुश्मनी जारी है। गिरकर फिर उठ जाना ही सीखा है, शायद यही जीने की तैयारी है। Gupta Ji Your uote.in - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य #📽️रविवार शायरी✍️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #📖 कविता और कोट्स✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - ४आज ही है ज़िन्दगी ' ना राज़ है ज़िन्दगी  , ना नाराज़ है ९ज़िन्दगी : बस जो है, वो आज है ९ज़िन्दगी  | ना किसी से शिकायत, ना खुद से गिला, जैसी भी मिली है, वैसी ही ख़ास है ज़िन्दगी  | ना जीत की जल्दी, ना हार का डर, हर पल में एक नया एहसास है ज़िन्दगी | ना बीते का अफसोस , ना आने की फिक्र, जो मिला वही अपना विश्वास है ^ज़िन्दगी ' ना रुकने की चाहत , ना थमने की बात, चलते रहने का ही नाम है ज़िन्दगी | कभी मुस्कुराहट, कभी आँसुओं की सौगात, हर रंग में खुद को ढालती है "ज़िन्दगी | गुप्ता जी Gupta Ji Your uotein ४आज ही है ज़िन्दगी ' ना राज़ है ज़िन्दगी  , ना नाराज़ है ९ज़िन्दगी : बस जो है, वो आज है ९ज़िन्दगी  | ना किसी से शिकायत, ना खुद से गिला, जैसी भी मिली है, वैसी ही ख़ास है ज़िन्दगी  | ना जीत की जल्दी, ना हार का डर, हर पल में एक नया एहसास है ज़िन्दगी | ना बीते का अफसोस , ना आने की फिक्र, जो मिला वही अपना विश्वास है ^ज़िन्दगी ' ना रुकने की चाहत , ना थमने की बात, चलते रहने का ही नाम है ज़िन्दगी | कभी मुस्कुराहट, कभी आँसुओं की सौगात, हर रंग में खुद को ढालती है "ज़िन्दगी | गुप्ता जी Gupta Ji Your uotein - ShareChat
#📽️रविवार शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह
📽️रविवार शायरी✍️ - दो लफ़्ज़ों की परवाह ' दौलत नहीं , शोहरत नहीं , न वाह चाहिए <कैसे हो?  के दो लफ़्ज़ों की परवाह चाहिए। बस भीड़ में भी जो दिल को सुकून दे जाए, ऐसा ही एक सच्चा सा साथ चाहिए। ना महलों की ख्वाहिश, ना ऊँचे ख्वाब कोई, चाहिए। अपनों में थोड़ा सा एहसास बस खामोशी में भी जो समझ ले हर बात, ऐसा ही कोई अपना खास चाहिए। झूठी चमक से दिल अब भर चुका है, सादगी में ही सारा जहाँ चाहिए। *कैसे हो?  की वही छोटी सी फिक्र, में पूरा ] হন নী লপড়ী प्यार चाहिए। Your uotein Gupta Ji दो लफ़्ज़ों की परवाह ' दौलत नहीं , शोहरत नहीं , न वाह चाहिए <कैसे हो?  के दो लफ़्ज़ों की परवाह चाहिए। बस भीड़ में भी जो दिल को सुकून दे जाए, ऐसा ही एक सच्चा सा साथ चाहिए। ना महलों की ख्वाहिश, ना ऊँचे ख्वाब कोई, चाहिए। अपनों में थोड़ा सा एहसास बस खामोशी में भी जो समझ ले हर बात, ऐसा ही कोई अपना खास चाहिए। झूठी चमक से दिल अब भर चुका है, सादगी में ही सारा जहाँ चाहिए। *कैसे हो?  की वही छोटी सी फिक्र, में पूरा ] হন নী লপড়ী प्यार चाहिए। Your uotein Gupta Ji - ShareChat