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#📽️रविवार शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह
📽️रविवार शायरी✍️ - दो लफ़्ज़ों की परवाह ' दौलत नहीं , शोहरत नहीं , न वाह चाहिए <कैसे हो?  के दो लफ़्ज़ों की परवाह चाहिए। बस भीड़ में भी जो दिल को सुकून दे जाए, ऐसा ही एक सच्चा सा साथ चाहिए। ना महलों की ख्वाहिश, ना ऊँचे ख्वाब कोई, चाहिए। अपनों में थोड़ा सा एहसास बस खामोशी में भी जो समझ ले हर बात, ऐसा ही कोई अपना खास चाहिए। झूठी चमक से दिल अब भर चुका है, सादगी में ही सारा जहाँ चाहिए। *कैसे हो?  की वही छोटी सी फिक्र, में पूरा ] হন নী লপড়ী प्यार चाहिए। Your uotein Gupta Ji दो लफ़्ज़ों की परवाह ' दौलत नहीं , शोहरत नहीं , न वाह चाहिए <कैसे हो?  के दो लफ़्ज़ों की परवाह चाहिए। बस भीड़ में भी जो दिल को सुकून दे जाए, ऐसा ही एक सच्चा सा साथ चाहिए। ना महलों की ख्वाहिश, ना ऊँचे ख्वाब कोई, चाहिए। अपनों में थोड़ा सा एहसास बस खामोशी में भी जो समझ ले हर बात, ऐसा ही कोई अपना खास चाहिए। झूठी चमक से दिल अब भर चुका है, सादगी में ही सारा जहाँ चाहिए। *कैसे हो?  की वही छोटी सी फिक्र, में पूरा ] হন নী লপড়ী प्यार चाहिए। Your uotein Gupta Ji - ShareChat