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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - কম্ানী जो जीवन बदल दे। அடபபக  ா महर्षि কর   মরমীণবনী ঠাঁব ম ৎক J $ 31T9T बार अपने कौटुम्बिक जीवन अध्यापक   रहते थे। एक से अत्याधिक क्षुब्ध होकर आत्महत्या करने की बात सोचने   लगे। किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले उन्होंने महर्षि की और   पहुँच उनके মম্সনি  তাননী   ব্রামী गए आश्रम। महर्षि आश्रमवासियों के भोजन के लिए पत्त्ाल रमण दिव्यदृष्टा ऋषि ने अध्यापक महोदय के बना रहे थे। का अभिप्राय समझ लिया था। आने करने aid- के उपरांत अध्यापक प्रणाम भगवन! आप इन पत्तालोंको रहे परिश्रम के साथ इतने ননা ব্ানা ব্াকয কঁক ঠঠীI हैं और आश्रमवासी इनमें ஈ64 हुए  बोले- वस्तु का पूर्ण उपयोग हो ಶಹ್ಾಗ' पर उसे फेंक देना बुरा नहीं॰ बुरा तो तब है जाने 3 3ி 3নখো মঁ  ৪ী करके   ्फेंक जब खराब दियाजाए। को   महर्षि का   मर्मस्पर्शी अभिप्राय अध्यापक महादय और उन्होंने आत्महत्या   करने समझ में आ ঠাযা করা इरादा छोड़ दिया। अखंड ज्योति अप्रैल १९९९ কম্ানী जो जीवन बदल दे। அடபபக  ா महर्षि কর   মরমীণবনী ঠাঁব ম ৎক J $ 31T9T बार अपने कौटुम्बिक जीवन अध्यापक   रहते थे। एक से अत्याधिक क्षुब्ध होकर आत्महत्या करने की बात सोचने   लगे। किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले उन्होंने महर्षि की और   पहुँच उनके মম্সনি  তাননী   ব্রামী गए आश्रम। महर्षि आश्रमवासियों के भोजन के लिए पत्त्ाल रमण दिव्यदृष्टा ऋषि ने अध्यापक महोदय के बना रहे थे। का अभिप्राय समझ लिया था। आने करने aid- के उपरांत अध्यापक प्रणाम भगवन! आप इन पत्तालोंको रहे परिश्रम के साथ इतने ননা ব্ানা ব্াকয কঁক ঠঠীI हैं और आश्रमवासी इनमें ஈ64 हुए  बोले- वस्तु का पूर्ण उपयोग हो ಶಹ್ಾಗ' पर उसे फेंक देना बुरा नहीं॰ बुरा तो तब है जाने 3 3ி 3নখো মঁ  ৪ী करके   ्फेंक जब खराब दियाजाए। को   महर्षि का   मर्मस्पर्शी अभिप्राय अध्यापक महादय और उन्होंने आत्महत्या   करने समझ में आ ঠাযা করা इरादा छोड़ दिया। अखंड ज्योति अप्रैल १९९९ - ShareChat