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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - मायनोंकींतलाथ कबीर के इस भजन का अर्थ समझें भीतर ही विद्यमान है लेकिन मन के भ्रम और  कबीर की ये पंक्तियां बहुत अर्थपूर्ण हैं॰ 'तोको सांसारिक मोह के कारण हम उसे पहचान नहीं पीव मिलेंगे , घूंघट के पट खोल रे। ' ऊपर से पाते। यहां पर घूंघट अज्ञान और माया का प्रतीक  तोये बहुत लौकिक बातें मालूम होती हें जिनमें है, जबकि पट खोलना आत्मज्ञान और सत्य को  अवगुंठन में छिपी किसी स्त्री से उन्हें हटाकर अनुभूति का संकेत है। भजन का संदेश है कि॰ अपने प्रिय को देखने का अनुरोध किया जा रहा होे। किंतु इसका गूढ़ार्थ कहीं गहरा है। कबीरदास  यदि मनुष्य अपने भीतर झांके अहकार त्यागे " और सच्ची भक्ति करे तो ईश्वर का साधात्कार  जी संकेत करते हे कि मनुष्य अज्ञान, अहंकार  ही हृदय गें हो सकता है। + १ मिनद रीड  और माया के पर्दे में ढंका हुआ है। ईश्वर हमारे " अपने मायनोंकींतलाथ कबीर के इस भजन का अर्थ समझें भीतर ही विद्यमान है लेकिन मन के भ्रम और  कबीर की ये पंक्तियां बहुत अर्थपूर्ण हैं॰ 'तोको सांसारिक मोह के कारण हम उसे पहचान नहीं पीव मिलेंगे , घूंघट के पट खोल रे। ' ऊपर से पाते। यहां पर घूंघट अज्ञान और माया का प्रतीक  तोये बहुत लौकिक बातें मालूम होती हें जिनमें है, जबकि पट खोलना आत्मज्ञान और सत्य को  अवगुंठन में छिपी किसी स्त्री से उन्हें हटाकर अनुभूति का संकेत है। भजन का संदेश है कि॰ अपने प्रिय को देखने का अनुरोध किया जा रहा होे। किंतु इसका गूढ़ार्थ कहीं गहरा है। कबीरदास  यदि मनुष्य अपने भीतर झांके अहकार त्यागे " और सच्ची भक्ति करे तो ईश्वर का साधात्कार  जी संकेत करते हे कि मनुष्य अज्ञान, अहंकार  ही हृदय गें हो सकता है। + १ मिनद रीड  और माया के पर्दे में ढंका हुआ है। ईश्वर हमारे " अपने - ShareChat