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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - " घर की बुनियाद ' ईंट पत्थर से तो सिर्फ मकान बनता है पर अपनों के प्यार से ही घर सजता हैे बुजुर्गों के सलीके और उनके वो संस्कार थाम कर रखते हैं पूरे कुनबे का संसार  महकती हुई छांव त्याग और धीरज की घर की बुनियाद हैं जैसे सुंदर कोई गांव उम्मीदों की दीवारें और भरोसे की छत मिलकर ही बनाती हैं खुशियों की साख और तहज़ीब की मज़बूत है जो नींव अदब डगमगाती नहीं कभी आंधी में वो जीव की इस बुनियाद को रखना सदा संभाल QR' यही रखती है जीवन को हरदम बेमिसाल स्वाती छीपा " घर की बुनियाद ' ईंट पत्थर से तो सिर्फ मकान बनता है पर अपनों के प्यार से ही घर सजता हैे बुजुर्गों के सलीके और उनके वो संस्कार थाम कर रखते हैं पूरे कुनबे का संसार  महकती हुई छांव त्याग और धीरज की घर की बुनियाद हैं जैसे सुंदर कोई गांव उम्मीदों की दीवारें और भरोसे की छत मिलकर ही बनाती हैं खुशियों की साख और तहज़ीब की मज़बूत है जो नींव अदब डगमगाती नहीं कभी आंधी में वो जीव की इस बुनियाद को रखना सदा संभाल QR' यही रखती है जीवन को हरदम बेमिसाल स्वाती छीपा - ShareChat