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कबीर साहिब इस वाणी में “कामिनी” शब्द से स्त्री वासना और आकर्षण की उस शक्ति की ओर संकेत करते हैं, जो बाहर से बहुत सुंदर और मोहक लगती है, लेकिन भीतर से अत्यंत खतरनाक होती है। वे इसकी तुलना सर्प से करते हैं —जैसे साँप को छेड़ने पर वह डंस लेता है, वैसे ही स्त्री वासना में पड़ने वाला व्यक्ति अंत में दुख और बंधन में फँस जाता है। यह केवल शारीरिक आकर्षण तक सीमित नहीं, बल्कि हर प्रकार की इंद्रिय वासनाएँ मन को भटकाकर अशांत कर देती हैं। लेकिन जो व्यक्ति अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलता है और अपने मन को आत्म स्वरूप में स्थिर कर लेता है, उसके पास ये वासनाएँ टिक नहीं पातीं। इस वाणी का गहरा संकेत है कि सच्ची भक्ति अपने मन को वासनाओं से हटाकर अपने आत्म स्वरूप में स्थिर करने में है, क्योंकि परमात्मा आत्मा के भीतर ही निवास करता है। ✅ परमात्मा की सच्ची भक्ति के ज्ञान आत्म ज्ञान को समझने के लिए हमारे Youtube Channel "कहत कबीर सुनो भाई साधो" पर live सत्संग सुनें और समझें । साहिब बंदगी सतनाम । #kabirisgod #kabirsahib #kabirvani #nitindassatsang #santnitindassjimaharaj #santrampaljimaharaj #motivationalspeech #mindset #truthseekers #awakening #premanandjimaharaj #spiritualgrowth #education #spiritualawakening #santrampal ji maharaj
santrampal ji maharaj - Of Keachings TEACHINGS OF SATGURU KABIR Satguru Kabir कामिनी सुंदर सर्पिनी , जो छेड़ै तेहि खाय | जो गुरु चरनन राचिया, तिन के निकट न जाय Il Youtube पर खोजें नितिन दास के सत्संग | कबीर साहिब इस वाणी में "कामिनी ॰ शब्द से स्त्री वासना और आकर्षण की हसेवेबइन कांदतुत उस शक्ति की ओर संकेत करते हैं, जो बाहर और मोहक लगती है, लेकिन भीतर से अत्यंत खतरनाक होती है। तुलना सर्प से करते हैं वे ~जैसे साँप को छेड़ने पर वह डंस लेता है, वैसे ही स्त्री वासना में पड़ने वाला #$ और बंधन में फँस जाता है। लेकिन जो व्यक्ति अपने व्यक्ति अंत गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, उसके पास ये वासनाएँ टिक नहीं पातीं | परमात्मा की सच्ची भक्ति के ज्ञान आत्म ज्ञान को समझने के लिए हमारे YouTube Channel "कहत कबीर सुनो भाई साधो" पर live सत्संग सुनें और समझें | Of Keachings TEACHINGS OF SATGURU KABIR Satguru Kabir कामिनी सुंदर सर्पिनी , जो छेड़ै तेहि खाय | जो गुरु चरनन राचिया, तिन के निकट न जाय Il Youtube पर खोजें नितिन दास के सत्संग | कबीर साहिब इस वाणी में "कामिनी ॰ शब्द से स्त्री वासना और आकर्षण की हसेवेबइन कांदतुत उस शक्ति की ओर संकेत करते हैं, जो बाहर और मोहक लगती है, लेकिन भीतर से अत्यंत खतरनाक होती है। तुलना सर्प से करते हैं वे ~जैसे साँप को छेड़ने पर वह डंस लेता है, वैसे ही स्त्री वासना में पड़ने वाला #$ और बंधन में फँस जाता है। लेकिन जो व्यक्ति अपने व्यक्ति अंत गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, उसके पास ये वासनाएँ टिक नहीं पातीं | परमात्मा की सच्ची भक्ति के ज्ञान आत्म ज्ञान को समझने के लिए हमारे YouTube Channel "कहत कबीर सुनो भाई साधो" पर live सत्संग सुनें और समझें | - ShareChat